ख़बर रफ़्तार , मानसा/चंडीगढ़ : पंजाब में ड्रग्स के खिलाफ आवाज उठाने वाले एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में आखिरकार 22 दिनों से जारी आंदोलन समाप्त हो गया है। मानसा में परिवार और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच करीब पांच घंटे तक चली बैठक के बाद कई अहम मांगों पर सहमति बनी। इसके बाद झोटा का परिवार पोस्टमॉर्टम और अंतिम संस्कार कराने के लिए राजी हो गया। समझौते के तहत पंजाब सरकार ने परिवार को 2 करोड़ रुपये का मुआवजा देने और झोटा की पत्नी को सरकारी नौकरी देने का आश्वासन दिया है। इसके साथ ही आंदोलन में शामिल लाखा सिधाना समेत अन्य प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने और उनकी रिहाई पर भी सहमति बनी है।
पांच घंटे की बैठक के बाद निकला समाधान
झोटा की हत्या के बाद गठित संयुक्त कार्रवाई समिति लगातार सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रही थी। बुधवार को मानसा में झोटा के परिवार, संयुक्त कार्रवाई समिति और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच लंबी बैठक हुई। सरकार की ओर से विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवान और कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुदियां शामिल हुए।
करीब पांच घंटे तक चली बातचीत के बाद दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ। सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और जेल में बंद नेताओं की रिहाई के लिए सहमति जताई। समझौते के बाद संयुक्त कार्रवाई समिति ने 5 नवंबर को मुख्यमंत्री आवास के प्रस्तावित घेराव को भी स्थगित कर दिया।
परिवार को 2 करोड़ मुआवजा, पत्नी को मिलेगी नौकरी
समझौते के तहत पंजाब सरकार ने परविंदर सिंह झोटा के परिवार को 2 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया है। इसके अलावा उनकी पत्नी को सरकारी नौकरी देने पर भी सहमति बनी है।
बैठक में भम्मे कलां के दलजीत सिंह के परिवार का मुद्दा भी उठाया गया। दलजीत सिंह की 27 अक्टूबर को मृत्यु हो गई थी। सरकार ने उनके परिवार को 50 लाख रुपये मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का आश्वासन दिया है।
13 अक्टूबर को मेडिकल स्टोर में हुई थी झोटा की हत्या
परविंदर सिंह झोटा की 13 अक्टूबर को मानसा के एक व्यस्त बाजार में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना उस समय हुई, जब वह एक मेडिकल स्टोर के अंदर मौजूद थे और फेसबुक लाइव कर रहे थे।
जानकारी के मुताबिक, झोटा ने मेडिकल स्टोर संचालक अश्विनी कुमार से एक बुजुर्ग व्यक्ति को नशीली दवाएं बेचे जाने को लेकर सवाल किया था। इसी दौरान कथित तौर पर मेडिकल स्टोर संचालक ने उन पर गोली चला दी। घटना के बाद आरोपी अश्विनी कुमार को राजस्थान के सालासर से हिरासत में लिया गया था।
हत्या के बाद से ही झोटा का शव मानसा के सिविल अस्पताल की मोर्चरी में रखा हुआ था। परिवार और प्रदर्शनकारी पोस्टमॉर्टम से पहले सरकार से अपनी मांगें पूरी करने की मांग कर रहे थे। अब समझौते के बाद पोस्टमॉर्टम चंडीगढ़ के PGIMER में कराए जाने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री और DGP के इस्तीफे की कर रहे थे मांग
झोटा की हत्या के बाद कई सामाजिक संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मिलकर संयुक्त कार्रवाई समिति बनाई थी। समिति लगातार पंजाब सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रही थी। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग मुख्यमंत्री भगवंत मान और पुलिस महानिदेशक गौरव यादव के इस्तीफे की थी।
इसके अलावा समिति ने जेल में बंद लाखा सिधाना और अन्य प्रदर्शनकारियों की रिहाई तथा उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग भी उठाई थी। संयुक्त कार्रवाई समिति के सदस्य हरदीप सिंह सिद्धू के मुताबिक, सरकार के साथ बैठक में जेल में बंद नेताओं की रिहाई का मुद्दा सबसे अहम रहा और इस पर कई घंटों तक बातचीत हुई।
कृषि मंत्री खुदियां ने परिवार से की थी मुलाकात
समझौते से पहले कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुदियां मंगलवार शाम को झोटा के परिवार से मिलने पहुंचे थे। वह आम आदमी पार्टी के पहले नेता थे, जिन्होंने परिवार से मुलाकात कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
वहीं, इस मामले को लेकर पंजाब की राजनीति में भी काफी हलचल देखने को मिली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, कांग्रेस नेता सचिन पायलट, पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष परगट सिंह, शिरोमणि अकाली दल प्रमुख सुखबीर सिंह बादल और पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों समेत कई राजनीतिक नेताओं ने झोटा के परिवार से मुलाकात की थी।
CBI जांच और पुलिस अधिकारियों पर भी हुई कार्रवाई
परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद परिवार की मांग पर पंजाब सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला किया था। इसके अलावा सरकार ने कार्रवाई करते हुए एक थाना प्रभारी (SHO), एक पुलिस उपाधीक्षक (DSP) और एक ड्रग इंस्पेक्टर को निलंबित कर दिया था।
सरकार का कहना है कि परिवार की अन्य मांगों पर भी पहले ही सहमति जताई जा चुकी थी। अब ताजा समझौते के बाद 22 दिनों से चल रहा आंदोलन समाप्त हो गया है और परिवार पोस्टमॉर्टम के बाद अंतिम संस्कार के लिए तैयार हो गया है।
पंजाब की राजनीति में भी चर्चा का विषय बना मामला
परविंदर सिंह झोटा की हत्या का मामला केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पंजाब में नशे के कारोबार और सरकार की कार्रवाई को लेकर बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले इस घटना को लेकर विपक्षी दलों ने भी सरकार को घेरा।
अब समझौते के बाद आंदोलन तो समाप्त हो गया है, लेकिन इस मामले में सीबीआई जांच, आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई और सरकार की ओर से किए गए वादों के क्रियान्वयन पर सभी की नजर रहेगी।
