ख़बर रफ़्तार , देहरादून : उत्तराखंड की राजनीति में करीब 23 साल पुराने जेनी प्रकरण को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। इस मामले में अब खुद को जेनी बताने वाली एक महिला का वीडियो सामने आया है। महिला ने दावा किया है कि वह जल्द ही सार्वजनिक रूप से सामने आकर पूरे मामले की सच्चाई बताएगी। इसके लिए उसने एक दिन का समय मांगा है और कहा है कि उसके पास अपने दावों से जुड़े सबूत भी मौजूद हैं। महिला के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि महिला अपने खुलासे में किन तथ्यों और नामों को सामने रखती है।
महिला ने नेताओं पर लगाया नाम का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप
सामने आए वीडियो में महिला ने उत्तराखंड के राजनीतिक नेताओं पर अपने नाम का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए करने का आरोप लगाया है। उसका कहना है कि वर्ष 2003 में उसके साथ वास्तव में क्या हुआ था, इसकी सच्चाई केवल वही जानती है। महिला ने दावा किया कि उसके पास इस पूरे प्रकरण से जुड़े सबूत हैं और वह जल्द ही उन्हें सार्वजनिक करेगी।
महिला ने राजनीतिक दलों के नेताओं से अपील की है कि वे एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने के बजाय इस मामले पर राजनीति करना बंद करें। उसने कहा कि उसे एक दिन का समय दिया जाए, जिसके बाद वह खुद सामने आकर अपनी बात रखेगी।
क्या है 23 साल पुराना जेनी प्रकरण?
दरअसल, जेनी प्रकरण की शुरुआत वर्ष 2003 में हुई थी। उस समय उत्तराखंड में नारायण दत्त तिवारी के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार थी और हरक सिंह रावत कैबिनेट मंत्री के पद पर थे। इसी दौरान असम मूल की एक महिला ने नौकरी दिलाने का झांसा देकर शारीरिक शोषण किए जाने और एक बच्चे के पितृत्व को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे।
इस मामले ने उस समय प्रदेश की राजनीति में काफी हलचल मचाई थी। आरोपों के बाद प्रकरण की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। इसके बाद यह मामला लंबे समय तक राजनीतिक और कानूनी चर्चाओं का हिस्सा बना रहा।
हरक सिंह रावत ने DNA और CBI जांच का दिया हवाला
जेनी प्रकरण को लेकर हरक सिंह रावत लगातार अपनी सफाई देते रहे हैं। उनका कहना है कि इस मामले में सीबीआई जांच हुई थी और डीएनए जांच में भी वह पाक-साफ निकले थे। हरक सिंह रावत ने दावा किया है कि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने तत्कालीन मंत्री पद से इस्तीफा भी दिया था।
उनका कहना है कि जांच के बाद भी इस पुराने मामले को राजनीतिक रूप से उठाना उचित नहीं है।
सीएम धामी के बयान के बाद फिर गरमाई सियासत
करीब दो दशक से अधिक समय से शांत पड़े इस मामले को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के बयान के बाद फिर हवा मिल गई। बीती 24 अक्टूबर को हल्द्वानी में एक कार्यक्रम के दौरान सीएम धामी ने जेनी प्रकरण का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा था।
मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। देखते ही देखते 23 साल पुराना मामला प्रदेश की राजनीति का प्रमुख मुद्दा बन गया।
महेंद्र भट्ट के सवाल पर हरक सिंह रावत का पलटवार
मुख्यमंत्री के बयान के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने भी जेनी प्रकरण को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि जेनी के बच्चे के पिता की पहचान अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं हुई है?
महेंद्र भट्ट के इस सवाल पर हरक सिंह रावत ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनका डीएनए टेस्ट हो चुका है और अगर इस मामले में सवाल उठाए जा रहे हैं तो महेंद्र भट्ट का भी डीएनए टेस्ट होना चाहिए। हरक के इस बयान के बाद दोनों नेताओं के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई।
अब सबूतों के साथ सामने आने का दावा, किसका नाम लेगी महिला?
अब खुद को जेनी बताने वाली महिला का वीडियो सामने आने के बाद इस पूरे प्रकरण में नया मोड़ आ गया है। महिला ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि वह जल्द ही सबूतों के साथ अपनी बात रखेगी। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि वह अपने अगले बयान में किन लोगों या घटनाओं का जिक्र करेगी।
अगर महिला अपने दावे के समर्थन में कोई दस्तावेज, नाम या अन्य सबूत सार्वजनिक करती है, तो इसका असर उत्तराखंड की मौजूदा राजनीतिक बयानबाजी पर पड़ सकता है।
फिलहाल इस मामले में महिला के अगले बयान का इंतजार किया जा रहा है। 23 साल पुराने इस विवाद में अब कौन-सा नया तथ्य सामने आता है और भाजपा-कांग्रेस की राजनीति किस दिशा में जाती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
