ख़बररफ़्तार , नई दिल्ली : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा है। शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में त्रिवेदी ने राहुल गांधी के विदेशी दौरों, उनके राजनीतिक नेतृत्व और विरोध-प्रदर्शनों में उनकी भूमिका को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी विदेश यात्राओं के दौरान संदिग्ध लोगों से मुलाकात करते हैं और भारत लौटने के बाद भारत-विरोधी प्रचार में जुट जाते हैं। हालांकि, ये आरोप भाजपा नेता ने लगाए हैं।
राहुल गांधी के विदेशी दौरों पर उठाए सवाल
सुधांशु त्रिवेदी ने दावा किया कि राहुल गांधी अपनी विदेश यात्राओं के दौरान ऐसी जगहों पर जाते हैं, जिनकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती। उन्होंने आरोप लगाया कि इन यात्राओं में राहुल की मुलाकात ऐसे लोगों से होती है, जिनकी गतिविधियों पर सवाल उठते रहे हैं। त्रिवेदी के मुताबिक, भारत लौटने के बाद राहुल गांधी सरकार और देश से जुड़े मुद्दों पर ऐसे बयान देते हैं, जिन्हें भाजपा भारत-विरोधी प्रचार के रूप में देखती है।
भाजपा प्रवक्ता ने कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि सत्ता से बाहर रहने के कारण पार्टी बेचैन है। उन्होंने कांग्रेस के मूलमंत्र पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि पार्टी सत्ता हासिल करने के लिए राजनीति करती है तथा समाज में विभाजन और भारतीय धर्म-संस्कृति के प्रति नकारात्मकता को बढ़ावा देती है।
‘चंपा’ वाली टिप्पणी से राहुल गांधी पर तंज
राहुल गांधी के विदेशी दौरों पर कटाक्ष करते हुए त्रिवेदी ने कहा कि भारतीय संस्कृति के प्रति कथित घृणा के केंद्र में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी हैं। उन्होंने ‘चंपा’ का जिक्र करते हुए तंज कसा और कहा कि राहुल गांधी ‘चंपत होकर चंपा’ हो गए हैं। यह टिप्पणी राहुल गांधी के विदेश दौरे को लेकर राजनीतिक निशानेबाजी का हिस्सा रही।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी की तुलना करते हुए त्रिवेदी ने कहा कि प्रधानमंत्री का रिकॉर्ड शानदार है, जबकि राहुल गांधी का राजनीतिक ट्रैक रिकॉर्ड समस्याओं से भरा हुआ है।
राहुल गांधी के नेतृत्व और कांग्रेस की चुनावी हार पर निशाना
भाजपा प्रवक्ता ने कांग्रेस में राहुल गांधी की नेतृत्वकारी भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कई चुनावी हार के बावजूद कांग्रेस बार-बार राहुल गांधी को पार्टी के प्रमुख चेहरे के रूप में पेश करती रही है।
त्रिवेदी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक टिप्पणी का हवाला देते हुए कांग्रेस नेतृत्व पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि पार्टी एक ‘असफल प्रॉडक्ट’ को बार-बार पेश करने की कोशिश कर रही है। उनके मुताबिक, इससे कांग्रेस के संगठन के साथ-साथ देश के संवैधानिक ढांचे को लेकर भी सवाल खड़े होते हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस राजनीतिक विरोध-प्रदर्शनों के दौरान नेता प्रतिपक्ष के पद की गरिमा का ध्यान नहीं रखती। इस संदर्भ में उन्होंने प्रधानमंत्री आवास के पास हुए प्रदर्शनों और आकाशवाणी भवन में प्रदर्शनकारियों के प्रवेश की घटनाओं का उल्लेख किया।
विरोध-प्रदर्शनों और समर्थन के दावों पर भी सवाल
सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी के विरोध-प्रदर्शनों के दौरान अधिकारियों और राजनीतिक हस्तियों से समर्थन मिलने संबंधी दावों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व इन दावों को व्यापक राजनीतिक समर्थन के प्रमाण के तौर पर पेश करता है, जबकि उनके आधार पर स्पष्टीकरण की जरूरत है।
त्रिवेदी ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की किताब ‘अ प्रॉमिस्ड लैंड’ का भी उल्लेख किया। उन्होंने किताब में 2010 में ओबामा की भारत यात्रा के दौरान राहुल गांधी से हुई मुलाकात से संबंधित अंश का हवाला देते हुए राहुल गांधी की राजनीतिक तैयारी पर सवाल उठाए। भाजपा नेता ने कांग्रेस से इस विषय पर जवाब देने की मांग की।
विदेशी फंडिंग और नेविल रॉय सिंघम नेटवर्क का भी जिक्र
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भाजपा नेता ने विदेशी फंडिंग हासिल करने वाले संगठनों और राजनीतिक गतिविधियों के कथित संबंधों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने नेविल रॉय सिंघम से जुड़े फंडिंग नेटवर्क की जांच का उल्लेख किया।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अमेरिकी हाउस वेज एंड मीन्स कमिटी इस बात की जांच कर रही है कि क्या टैक्स छूट प्राप्त गैर-लाभकारी संगठनों के माध्यम से भेजी गई फंडिंग का इस्तेमाल अमेरिका में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के हितों को आगे बढ़ाने के लिए किया गया। इस जांच में कुछ लोगों की पहचान पूछताछ के लिए किए जाने का भी जिक्र है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ‘द पीपल्स फोरम इंक.’ और ‘ब्रेकथ्रू न्यूज’ ने वित्तीय रिकॉर्ड से जुड़ी समिति की मांगों को चुनौती दी है। ‘ब्रेकथ्रू न्यूज’ का तर्क है कि पत्रकारों को अनिवार्य रूप से बयान देने के लिए बाध्य करना प्रेस की स्वतंत्रता के लिए खतरा बन सकता है।
भाजपा नेताओं ने सवाल उठाया है कि क्या सिंघम से जुड़े संगठनों का भारत में राजनीतिक गतिविधियों या चुनाव आयोग के खिलाफ राहुल गांधी के विरोध-प्रदर्शनों से कोई संबंध है। हालांकि, इन कथित संबंधों को लेकर लगाए गए आरोपों की पुष्टि के लिए स्वतंत्र और ठोस साक्ष्य आवश्यक हैं।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच बयानबाजी तेज
सुधांशु त्रिवेदी के बयान ने भाजपा और कांग्रेस के बीच जारी राजनीतिक टकराव को फिर चर्चा में ला दिया है। भाजपा ने राहुल गांधी के विदेशी दौरों, नेतृत्व और कथित विदेशी फंडिंग संबंधों को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं, इन आरोपों को तथ्यों के आधार पर परखना जरूरी है। फिलहाल, प्रस्तुत जानकारी में राहुल गांधी या कांग्रेस की ओर से इन विशिष्ट आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया शामिल नहीं है।
