खबर रफ्तार, नई दिल्ली: प्रियंका गांधी ने विपक्ष की एकता और संविधान की जीत का दावा करते हुए कहा कि सरकार की तरफ से पूरी कोशिश की गई थी कि किसी भी तरह लंबे समय तक सत्ता में बने रहने का रास्ता बनाया जाए, और इसके लिए महिलाओं के नाम का इस्तेमाल करने की कोशिश हुई। उन्होंने कहा कि महिलाओं का “मसीहा” बनने की कोशिश की गई, लेकिन यह केवल काम करके ही संभव होता है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह संविधान संशोधन विधेयक असल में महिला आरक्षण के लिए नहीं बल्कि परिसीमन से जुड़ा था, इसलिए विपक्ष ने इसका समर्थन नहीं किया। उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि जब वे इसे “काला दिन” बता रहे हैं, तो वास्तव में यह उनके लिए झटका है। प्रियंका गांधी ने यह भी कहा कि अगर सरकार सच में महिला आरक्षण लागू करना चाहती है, तो 2023 के कानून को लागू करे, जिसे पूरा विपक्ष समर्थन देगा।
इस विधेयक के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रस्ताव था, जिसे 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने की बात कही गई थी, लेकिन यह संसद के निचले सदन में पारित नहीं हो सका। मतदान में विधेयक के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े, जबकि संविधान संशोधन के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल पाया।
सरकार ने इसके साथ परिसीमन विधेयक, 2026 और संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 भी पेश किए थे, लेकिन उन पर भी आगे की कार्रवाई नहीं हो सकी।

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