खबर रफ्तार, नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष पर भारत सरकार का क्या रुख है? ऊर्जा आपूर्ति को लेकर भारत सरकार क्या-क्या कदम उठा रही है? खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा और स्वदेश वापसी को लेकर सरकार ने क्या-क्या कदम उठाए हैं? पीएम मोदी ने आज इन सभी सवालों का जवाब लोकसभा में दिया।
लोकसभा में पश्चिम एशिया संघर्ष पर बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि बीत दो तीन हफ्तों में जयशंकर जी ने और हरदीप पुरी जी ने सदन को जानकारी दी है। इसका पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था पर और लोगों के जीवन पर विपरीत असर हो रहा है। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया इस संकट के जल्द से जल्द समाधान के लिए सभी पक्षों से आग्रह भी कर रही है। भारत के सामने भी इस युद्ध ने अप्रत्याशित चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। ये चुनौतियां आर्थिक भी हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ी हैं और मानवीय भी हैं। पीएम मोदी ने आगे कहा कि जहां तक डिप्लोमेसी की बात है, भारत की नीति स्पष्ट है।
पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति बरकरार रखने की कोशिश जारी- पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा कि पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति लगातार बरकरार रखने की कोशिश की जा रही है। बीते एक दशक में उठाए गए कदम अब और भी प्रासंगिक हो गए हैं। भारत ने बीते 11 साल में अपनी ऊर्जा जरूरतों की आपूर्ति का डायवर्सिफिकेशन किया है। उन्होंने कहा कि पहले भारत में 27 देशों से कच्चे तेल और गैस का आयात किया जाता था। अब भारत 41 देशों से ऊर्जा जरूरतों का आयात किया जाता है। भारत ने कच्चे तेल के भंडारण को भी प्राथमिकता दी है। आज भारत के पास 53 लाख मीट्रिक टन का स्ट्रैटिजिक रिजर्व है और 65 लाख मीट्रिक टन के रिजर्व पर काम किया जा रहा है। पिछले 11 वर्ष में हमारी रिफाइनरिंग क्षमता भी बढ़ी है।
अलग-अलग सप्लायर्स के संपर्क में भारत सरकार- पीएम मोदी
पीएम मोदी ने आगे कहा कि भारत लगातार अलग-अलग सप्लायर्स से भी संपर्क में है। प्रयास है कि जहां से संभव हो वहां से सप्लाई होती रहे। हमारा प्रयास है कि तेल हो गैस हो, फर्टिलाइजर हो, ऐसे सभी जहाज भारत तक सुरक्षित पहुंचें। उन्होंने कहा कि हम सभी वैश्विक सहयोगियों के साथ निरंतर संवाद कर रहे हैं, ताकि हमारे मैरिटाइम कॉरीडोर सुरक्षित रहें। इन वार्ताओं के चलते होर्मुज में फंसे हमारे कई जहाज भारत आए भी हैं।
संकट का भारतीय कृषि पर प्रभाव और इसके लिए क्या-क्या तैयारी?
पीएम मोदी ने कहा कि एक सवाल यह है कि युद्ध का खेती पर क्या प्रभाव होगा। देश के किसानों ने हमारे भंडार भर रखे हैं। हमारे पास पर्याप्त खाद्यान्न हैं। सरकार ने खाद की पर्याप्त व्यवस्था भी की है। खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए सरकार का ध्यान इस पर भी है। उन्होंने कहा कि कोरोनाकाल में भी दुनियाभर में सप्लाई चेन में दिक्कत आई थी। दुनिया में यूरिया की बोरी 3000 रुपये तक पहुंच गई थी लेकिन हमारे किसानों को वह बोरी 300 रुपये में ही मिली। बीते वर्षों में भारत में छह यूरिया प्लांट शुरू किए गए हैं। इस दौरान डीएनपी और घरेलू यूरिया का उत्पादन बढ़ाया गया। इसी तरह डीएनपी और एनपीके के आयात को भी विस्तार दिया है।
इथेनॉल मिक्सिंग पर भी बोले पीएम
पीएम मोदी ने आगे इथेनॉल मिक्सिंग पर भी अपना रुख साफ किया। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष के समय में हमारी एक और तैयारी बहुत कम आ रही है। बीते 10-11 साल में इथेनॉल की मिक्सिंग को बढ़ाया गया है। आज पेट्रोल में 20 फीसदी तक इथेनॉल की मिक्सिंग को बढ़ाया गया है। पीएम मोदी ने जोर दिया कि रेलवे के विद्युतीकऱण से भी काफी फायदा हो रहा है। इतना इलेक्ट्रिफिकेशन आज न होता तो भारत को 180 करोड़ लीटर तेल अतिरिक्त लगता।
भारत का भविष्य और सुरक्षित होगा- पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा कि आज जिस स्केल पर वैकल्पिक ईंधन पर काम हो रहा है, उससे भारत का भविष्य और सुरक्षित होगा। एनर्जी आज इकोनॉमी की रीढ़ है और वैश्विक ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने वाला स्रोत पश्चिम एशिया है। उन्होंने कहा कि दुनियाभर की इकोनॉमी अभी प्रभावित हो रही है। भारत पर इसका कम से कम प्रभाव हो इसके प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार इसके छोटी अवधि, मध्यम और लंबी अवधि के हल पर काम कर रही है। इससे देश को काफी मदद मिली है। पीएम मोदी ने कहा कि हम हर सेक्टर के स्टेकहोल्डर के साथ चर्चा कर रहे हैं। हर सेक्टर को आवश्यक सपोर्ट दिया जा रहा है। सरकार ने एक इंटर मिनिस्ट्रियल ग्रुप बनाया है। यह समूह हर दिन मिलता है और हमारे इंपोर्ट एक्सपोर्ट पर बात करता है और समाधान पर चर्चा करता है।
नैनो यूरिया के विकल्प पर क्या बोले पीएम मोदी?
पीएम मोदी ने कहा कि सरकार ने किसानों को नैनो यूरिया का विकल्प भी दिया है। साथ ही हम जैविक खेती के लिए भी उन्हें प्रोत्साहित कर रहे हैं। मैं सदन के माध्यम से किसानों को विश्वास दिलाता हूं कि सरकार किसानों की हरंसभव मदद करती रहेगी।
कोयला उत्पादन में भारत ने बनाया रिकॉर्ड- पीएम मोदी
लोकसभा में पीएम मोदी ने आगे कहा कि युद्ध की एक चुनौती है कि देश में बढ़ती गर्मी का सीजन शुरू हो रहा है। इससे देश में बिजली की मांग भी बढ़ती जाएगी। भारत ने लगातार दूसरे साल 100 टन कोयला उत्पादन का रिकॉर्ड बनाया है। पावर सिस्टम्स की निगरानी की जा रही है। सरकरा की तैयारियों में अक्षय ऊर्जा से भी मदद मिली है। उन्होंने कहा कि आज हमारी टोटल एनर्जी का एक हिस्सा अक्षय ऊर्जा से है। बीते 11 साल में देश ने अपनी सोलर पावर कैपेसिटी को 3 गीगावाट से बढ़ाकर 140 गीगावाट तक बढ़ाई है। उन्होंने कहा कि सरकार ने शांति कानून के जरिए परमाणु ऊर्जा पैदा करने पर भी जोर दिया है। इसके अलावा हाइड्रोपावर क्षमताओं को भी बढ़ाया जा रहा है।
सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है- पीएम मोदी
जब ऐसे संकट आते हैं तो कुछ तत्व इसका गलत इस्तेमाल करने की कोशिश करते हैं। सभी सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है। तटीय सुरक्षा हो, साइबर सुरक्षा हो, आदि, सभी को अलर्ट किया गया है। दुनिया में जो कठिन हालात बने हैं, उनका प्रभाव लंबे समय के लिए रहने की आशंका है। हमें तैयार रहना होगा और एकजुट रहना होगा। हम कोरोना के समय भी एकजुटता से ऐसी चुनौतियों को सामना कर चुके हैं।
अपने बयान के अंत में पीएम मोदी ने कहा कि अभ भी हमें धीरज के साथ, संयम के साथ, शांत मन से हर चुनौती का सामना करना है। यही हमारी पहचान और यही हमारी ताकत है। हमें सावधान और सतर्क भी रहना है। हालात बिगाड़ने वाले झूठ फैलाने की कोशिश करंगे। ऐसे लोगों को सफल नहीं होने देना है। कालाबाजारी करने वाले, जमाखोरी करने वाले सक्रिय हो जाते हैं। इनके लिए कड़ी निगरानी जरूरी है। जहां से भी ऐसी शिकायतें आती हैं, वहां कार्रवाई होनी चाहिए।

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