ख़बर रफ़्तार , देहरादून : उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्रों में पाई जाने वाली औषधीय वनस्पतियां वैज्ञानिकों के लिए शोध का महत्वपूर्ण विषय बनी हुई हैं। इसी कड़ी में नैनीताल जिले के भवाली क्षेत्र में मिलने वाले एक सुगंधित पौधे इसोडोन कोएस्टा (Isodon coesta) को लेकर गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर के शोधकर्ताओं ने अध्ययन किया है। शोध में पौधे के अर्क में एंटीऑक्सीडेंट क्षमता से जुड़े रासायनिक तत्व पाए गए हैं। हालांकि, यह शुरुआती स्तर का अध्ययन है और इससे किसी बीमारी के इलाज में पौधे की प्रभावशीलता साबित नहीं होती।
शोधकर्ताओं के अनुसार, पौधे के मेथनॉल और हेक्सेन अर्क का विश्लेषण किया गया। इसमें मेथनॉल अर्क में फेनोलिक और फ्लेवोनॉयड तत्वों की मात्रा तुलनात्मक रूप से अधिक मिली। अध्ययन में पौधे के नमूनों में कुल 48 रासायनिक यौगिकों की पहचान भी की गई। शोध के निष्कर्ष 3 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका Discover Chemistry में प्रकाशित हुए।
पंतनगर विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने किया अध्ययन
इस शोध में देवकी मावड़ी, रोहित पुजारी, अनन्या बहुगुणा, धर्मेंद्र सिंह रावत, ओम प्रकाश, रवींद्र कुमार और शिव कुमार दुबे शामिल रहे। शोध का विषय उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र से प्राप्त इसोडोन कोएस्टा के हेक्सेन और मेथनॉल अर्क का फाइटोकेमिकल विश्लेषण, आणविक स्तर पर अध्ययन और ADMET विश्लेषण था।
अध्ययन के लिए पौधे का नमूना नैनीताल जिले के भवाली क्षेत्र से एकत्र किया गया। यह पौधा समुद्र तल से लगभग 1,654 मीटर की ऊंचाई पर मिला था। जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वनस्पति वैज्ञानिक डॉ. डीएस रावत ने इसकी पहचान की। पौधे का नमूना विश्वविद्यालय के हर्बेरियम में GBPUH-1615 नंबर के साथ सुरक्षित रखा गया है।
क्या है इसोडोन कोएस्टा पौधा?
इसोडोन कोएस्टा एक सुगंधित और बहुवर्षीय पौधा है, जिसे स्थानीय स्तर पर बांगरा या छिछरी नाम से भी जाना जाता है। इसकी ऊंचाई लगभग आधा मीटर से ढाई मीटर तक हो सकती है। इसके फूल बैंगनी या नीले-बैंगनी रंग के होते हैं और छोटे-छोटे गुच्छों में खिलते हैं। इसमें अक्टूबर से फरवरी के बीच फूल आने की जानकारी दी गई है।
इसकी पत्तियों को मसलने पर तुलसी या पुदीने जैसी तेज और सुगंधित गंध आती है। यह तुलसी के परिवार से संबंधित पौधा है। भारत के अलावा यह नेपाल, चीन, बांग्लादेश, म्यांमार, श्रीलंका और थाईलैंड में भी पाया जाता है।
पौधे से तैयार किए गए मेथनॉल और हेक्सेन अर्क
शोध के दौरान पौधे के जड़ों को छोड़कर अन्य हिस्सों को सुखाया गया और उनका पाउडर तैयार किया गया। इसके बाद अलग-अलग रसायनों की मदद से दो प्रकार के अर्क निकाले गए। इनमें मेथनॉल अर्क और हेक्सेन अर्क शामिल थे।
मेथनॉल अर्क तैयार करने के लिए 187.61 ग्राम सूखे पौधे का इस्तेमाल किया गया, जबकि हेक्सेन अर्क के लिए 151.27 ग्राम पौधे का पाउडर लिया गया। शोधकर्ताओं ने पौधे की सामग्री को संबंधित रसायनों में 10 से 15 दिनों तक भिगोकर रखा।
इस प्रक्रिया से मेथनॉल अर्क की प्राप्ति 4.02 प्रतिशत रही, जबकि हेक्सेन अर्क की मात्रा 1.10 प्रतिशत दर्ज की गई।
मेथनॉल अर्क में अधिक मिले फेनोलिक और फ्लेवोनॉयड तत्व
अध्ययन में दोनों अर्क की रासायनिक संरचना और एंटीऑक्सीडेंट क्षमता का विश्लेषण किया गया। शोध के अनुसार, मेथनॉल अर्क में फेनोलिक और फ्लेवोनॉयड तत्वों की मात्रा हेक्सेन अर्क की तुलना में अधिक पाई गई।
शोध में दर्ज आंकड़े इस प्रकार हैं:
- मेथनॉल अर्क: फेनोलिक तत्व 31.37 मिलीग्राम प्रति ग्राम, फ्लेवोनॉयड 313.28 मिलीग्राम प्रति ग्राम और एंटीऑक्सीडेंट क्षमता से संबंधित दर्ज मान 8.61 मिलीग्राम प्रति ग्राम।
- हेक्सेन अर्क: फेनोलिक तत्व 17.19 मिलीग्राम प्रति ग्राम, फ्लेवोनॉयड 117.57 मिलीग्राम प्रति ग्राम और एंटीऑक्सीडेंट क्षमता से संबंधित दर्ज मान 2.07 मिलीग्राम प्रति ग्राम।
इन नतीजों से संकेत मिलता है कि अध्ययन में इस्तेमाल किए गए नमूनों में मेथनॉल अर्क ने इन मापदंडों पर बेहतर परिणाम दिए। हालांकि, इन आंकड़ों के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि पौधा सीधे किसी बीमारी का इलाज कर सकता है।
वैज्ञानिक जांच में मिले 48 रासायनिक यौगिक
शोधकर्ताओं ने पौधे के अर्क में मौजूद रासायनिक तत्वों की पहचान के लिए GC-MS यानी गैस क्रोमैटोग्राफी-मास स्पेक्ट्रोमेट्री तकनीक का इस्तेमाल किया। यह तकनीक किसी नमूने में मौजूद विभिन्न रासायनिक यौगिकों की पहचान करने में मदद करती है।
इस विश्लेषण में मेथनॉल अर्क में 24 और हेक्सेन अर्क में 24 रासायनिक यौगिकों की पहचान की गई। इस तरह दोनों अर्क में कुल 48 यौगिक दर्ज किए गए।
इसके अतिरिक्त, पौधे की एंटीऑक्सीडेंट क्षमता का आकलन करने के लिए DPPH परीक्षण किया गया। इस परीक्षण के माध्यम से यह जांचा जाता है कि कोई पदार्थ प्रयोगशाला की परिस्थितियों में फ्री रेडिकल्स को कितनी हद तक निष्क्रिय कर सकता है।
एंटीऑक्सीडेंट और सूजन कम करने की संभावनाओं पर शोध
जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वनस्पति वैज्ञानिक डॉ. डीएस रावत के अनुसार, इसोडोन कोएस्टा में ऐसे रासायनिक तत्व मिले हैं जिनमें एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि और सूजन कम करने की संभावनाओं का अध्ययन किया जा सकता है। खासतौर पर मेथनॉल अर्क में फेनोलिक और फ्लेवोनॉयड तत्व अधिक मात्रा में पाए गए।
एंटीऑक्सीडेंट ऐसे पदार्थ होते हैं जो प्रयोगशाला या जैविक परिस्थितियों में फ्री रेडिकल्स से जुड़ी ऑक्सीडेटिव प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं। लेकिन किसी पौधे के अर्क में ऐसे तत्व मिलने का अर्थ यह नहीं है कि वह मनुष्यों में किसी बीमारी का इलाज करने में प्रभावी साबित हो चुका है।
इसलिए शोध के निष्कर्षों को शुरुआती वैज्ञानिक जानकारी के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
दवा बनाने से पहले जरूरी होंगे और परीक्षण
शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस पौधे से दवा या उपचार के लिए कोई उत्पाद विकसित करने से पहले विस्तृत प्रयोगशाला अध्ययन और सुरक्षा संबंधी जांच जरूरी होगी। इसके बाद उपयुक्त परिस्थितियों में जीवों पर परीक्षण तथा नियमानुसार मानव क्लिनिकल परीक्षणों की आवश्यकता हो सकती है।
फिलहाल अध्ययन से उत्तराखंड की हिमालयी वनस्पतियों में मौजूद रासायनिक संभावनाओं के बारे में नई जानकारी मिली है। हालांकि, इसोडोन कोएस्टा या इसके अर्क को किसी बीमारी के उपचार के लिए इस्तेमाल करने की पुष्टि नहीं हुई है।
विशेष सावधानी: आम लोगों को इस पौधे की पत्तियों, जड़ों या अर्क का सेवन खुद से औषधि के रूप में नहीं करना चाहिए। इसके सुरक्षित इस्तेमाल, प्रभावशीलता और संभावित दुष्प्रभावों की पुष्टि के लिए आगे वैज्ञानिक शोध आवश्यक है।
