ख़बर रफ़्तार , नई दिल्ली : राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की 221 कंपनियों की तैनाती अगले 30 दिनों तक बढ़ाने का फैसला किया है। त्योहारी सीजन और हाल के विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। अधिकारियों के अनुसार, करीब 26 हजार केंद्रीय जवान दिल्ली में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में स्थानीय पुलिस और प्रशासन की सहायता करेंगे।
मामले से जुड़े सूत्रों ने सोमवार को बताया कि केंद्रीय बलों की तैनाती को लेकर गृह मंत्रालय में समीक्षा बैठक हुई। इसमें राजधानी की मौजूदा सुरक्षा स्थिति और आगे बलों की जरूरत का आकलन किया गया। अधिकारियों के मुताबिक, हालात के आधार पर आगे भी समय-समय पर समीक्षा की जाएगी।
30 दिन तक जारी रहेगी केंद्रीय बलों की तैनाती
दिल्ली पुलिस को 8 से 12 अक्टूबर के बीच सुरक्षा ड्यूटी के लिए केंद्रीय बलों की कम से कम 221 कंपनियां उपलब्ध कराई गई थीं। इनमें लगभग 26 हजार जवान शामिल हैं। अब इनकी तैनाती अगले 30 दिनों तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।
यह व्यवस्था ऐसे समय में की गई है, जब मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए हैं। अधिकारियों के अनुसार, केंद्रीय बल कानून-व्यवस्था बनाए रखने और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा प्रबंध मजबूत करने में दिल्ली पुलिस की मदद करेंगे।
हाल के वर्षों में विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्था के लिए दिल्ली में केंद्रीय बलों की यह बड़ी तैनातियों में से एक है। जवानों को संवेदनशील इलाकों की निगरानी, सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और निर्धारित प्रदर्शन स्थलों के आसपास सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है।
पहले से तैनात 111 कंपनियों के साथ 110 नई कंपनियां
सुरक्षा व्यवस्था के तहत राजधानी में पहले से तैनात 111 कंपनियों को बनाए रखा गया है। इसके अलावा, 10 अक्टूबर को हुए विरोध प्रदर्शन से पहले 110 अतिरिक्त कंपनियों की तैनाती मंजूर की गई थी। इस तरह कुल 221 कंपनियां सुरक्षा ड्यूटी में लगाई गईं।
एक कंपनी में सामान्य तौर पर लगभग 120 से 130 जवान होते हैं। इन बलों की तैनाती का उद्देश्य जंतर-मंतर, संसद और मध्य दिल्ली के अन्य संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बनाए रखना है। इसके साथ ही प्रतिबंधित क्षेत्रों में अनधिकृत प्रवेश रोकने और जरूरत पड़ने पर स्थानीय पुलिस को अतिरिक्त सहायता देने की जिम्मेदारी भी केंद्रीय जवानों को सौंपी गई है।
CRPF की 85 कंपनियां भी तैनात
दिल्ली में तैनात केंद्रीय बलों में विभिन्न सुरक्षा संगठनों की कंपनियां शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इनमें शामिल हैं:
- केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की 85 कंपनियां
- सशस्त्र सीमा बल (SSB) की 10 कंपनियां
- रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की 7 कंपनियां
- इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) की 7 कंपनियां
- केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की 1 कंपनी
इन जवानों को जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ समेत देश के विभिन्न हिस्सों से दिल्ली लाया गया है। जानकारी के अनुसार, जवानों की आवाजाही के लिए छह विशेष ट्रेनों का इस्तेमाल किया गया।
जमीनी हालात के आधार पर तय होगी जवानों की वापसी
10 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शन के बाद भी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई। रविवार को भी राजधानी के अलग-अलग हिस्सों में छोटे समूहों के विरोध प्रदर्शन की जानकारी सामने आई।
सुरक्षा विशेषज्ञ और CRPF के पूर्व महानिरीक्षक आरके यादव के मुताबिक, केंद्रीय बलों की तैनाती जारी रखने या उन्हें वापस बुलाने का निर्णय जमीनी हालात और खतरे के आकलन के आधार पर लिया जाता है।
उन्होंने बताया कि सुरक्षा एजेंसियां यह देखती हैं कि दोबारा बड़े पैमाने पर भीड़ जुटने, बैरिकेडिंग तोड़ने या निर्धारित प्रदर्शन स्थलों से बाहर विरोध फैलने की कितनी आशंका है। इसके साथ ही दिल्ली पुलिस की अपनी क्षमता और राजधानी में पहले से उपलब्ध सुरक्षा बलों की संख्या को भी ध्यान में रखा जाता है।
दूसरे सुरक्षा कार्यों पर भी पड़ सकता है असर
केंद्रीय बलों की बड़ी संख्या में दिल्ली में तैनाती से दूसरे राज्यों में चल रहे सुरक्षा अभियानों और जवानों की ड्यूटी के प्रबंधन पर भी असर पड़ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, CRPF के कुछ जवानों को उन क्षेत्रों से वापस बुलाया गया था, जहां वे उग्रवाद-विरोधी या अन्य सुरक्षा कार्यों में तैनात थे।
पूर्व IG आरके यादव ने कहा कि केंद्रीय बलों को लंबे समय तक दिल्ली में बनाए रखने से अन्य स्थानों पर जवानों की उपलब्धता, रोटेशन और मैनपावर प्लानिंग प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि बिना पर्याप्त आकलन के एक निश्चित तारीख पर सभी अतिरिक्त जवानों को वापस भेजने से राजधानी में अचानक भीड़ जुटने की स्थिति में सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।
12 अक्टूबर के बाद की तैनाती पर रहेगी नजर
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मुख्य सवाल यह है कि 12 अक्टूबर के बाद केंद्रीय बलों की कितनी कंपनियों को दिल्ली में बनाए रखना जरूरी समझा जाता है। इस संबंध में गृह मंत्रालय जमीनी स्थिति, संभावित विरोध प्रदर्शनों और दिल्ली पुलिस की जरूरतों का आकलन करेगा।
फिलहाल, केंद्र सरकार ने CAPF की 221 कंपनियों की तैनाती अगले 30 दिनों तक बढ़ाने का फैसला किया है। आगे जवानों की संख्या में बदलाव या उनकी वापसी का निर्णय सुरक्षा समीक्षा और राजधानी की कानून-व्यवस्था की स्थिति के आधार पर किया जाएगा।
