Uttrakhand में BJP ने 70 सीटों पर नियुक्त किए विधानसभा प्रभारी, 18 दायित्वधारियों को जिम्मेदारी मिलने पर कांग्रेस ने उठाए सवाल

ख़बर रफ़्तार , देहरादून : उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने संगठनात्मक तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी ने प्रदेश की सभी 70 विधानसभा सीटों पर प्रभारियों की नियुक्ति की है। इन नियुक्तियों में 18 ऐसे नेता भी शामिल हैं, जिन्हें राज्य सरकार में दायित्व सौंपे गए हैं और जिन्हें दायित्वधारी मंत्री का दर्जा प्राप्त है। अब इन नेताओं को संगठन में चुनावी जिम्मेदारी दिए जाने पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं।

कांग्रेस का कहना है कि जब इन नेताओं को सरकार की ओर से गाड़ी, मानदेय और अन्य सुविधाएं मिलती हैं, तो उन्हें पार्टी के संगठनात्मक और चुनावी कार्यक्रमों की जिम्मेदारी देना जवाबदेही से जुड़ा सवाल खड़ा करता है। विपक्ष ने दायित्वधारियों को सरकारी पदों से हटाने की मांग करते हुए पूछा है कि सरकारी संसाधनों और राजनीतिक गतिविधियों के बीच अंतर कैसे सुनिश्चित किया जाएगा।

सभी 70 विधानसभा सीटों पर भाजपा ने नियुक्त किए प्रभारी

आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के तहत भाजपा ने प्रदेश की सभी 70 विधानसभा सीटों पर प्रभारियों की नियुक्ति की है। इन नेताओं को अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने और पार्टी के कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई है।

हालांकि, इन नियुक्तियों में सरकार के दायित्वधारियों के शामिल होने से राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। सवाल उठ रहा है कि सरकारी जिम्मेदारियां निभाने वाले नेता पार्टी संगठन के लिए किस तरह काम करेंगे और उनकी सरकारी तथा संगठनात्मक भूमिकाओं के बीच स्पष्ट अंतर कैसे रखा जाएगा।

18 दायित्वधारियों को भी मिली संगठनात्मक जिम्मेदारी

भाजपा की ओर से विधानसभा प्रभारी बनाए गए नेताओं में 18 ऐसे नाम शामिल हैं, जिन्हें राज्य सरकार ने दायित्व सौंपे हैं। इनमें जगत सिंह चौहान, रामचंद्र गौड़, ऋषि प्रसाद सती, जोत सिंह बिष्ट, बच्चन सिंह पवार, मधु भट्ट, अभिषेक शाही, भुवन विक्रम डबराल, अनुराधा वालिया, शोभाराम प्रजापति, नितिन गौतम, विशाल गुप्ता, जयपाल चौहान, श्यामवीर सैनी, विजय कपरवान, श्याम नारायण पांडे, सुभाष बगौली और दीपक मेहरा के नाम शामिल हैं।

इन नेताओं को सरकार में दायित्व मिलने के बाद अब पार्टी संगठन ने भी उन्हें विधानसभा स्तर पर जिम्मेदारी सौंपी है। इसी को लेकर कांग्रेस ने सवाल किया है कि सरकार से मिलने वाली सुविधाओं और पार्टी के चुनावी कार्यों के बीच खर्च तथा संसाधनों का हिसाब किस तरह रखा जाएगा।

भाजपा ने नियुक्तियों का किया बचाव

भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने इन नियुक्तियों का बचाव किया है। उनका कहना है कि दायित्वधारी बनाए गए नेता पार्टी संगठन से ही जुड़े हुए हैं और सरकार के कामों को जनता तक पहुंचाना भी उनकी भूमिका का हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि यदि पार्टी संगठन उन्हें कोई अतिरिक्त जिम्मेदारी देता है, तो इसमें परेशानी नहीं होनी चाहिए। भाजपा का पक्ष है कि सरकार में दायित्व निभाने वाले नेताओं का संगठन से जुड़ाव स्वाभाविक है और वे पार्टी के कामकाज में भी योगदान दे सकते हैं।

कांग्रेस ने सरकारी धन के इस्तेमाल पर उठाए सवाल

कांग्रेस ने भाजपा की इन नियुक्तियों पर आपत्ति जताते हुए दायित्वधारियों को सरकारी पदों से हटाने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि सरकार से गाड़ी, मानदेय और अन्य सुविधाएं प्राप्त करने वाले नेताओं से यदि संगठन के चुनावी कार्यक्रमों में काम लिया जाता है, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल किस उद्देश्य से हो रहा है।

कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता अमरेंद्र बिष्ट ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकारी धन का इस्तेमाल संगठनात्मक गतिविधियों के लिए करवा रही है। उन्होंने कहा कि यदि दायित्वधारियों से पार्टी संगठन का काम लिया जाना है, तो उन्हें पहले सरकारी पदों से हटाया जाना चाहिए।

कांग्रेस का मुख्य सवाल यह है कि सरकारी सुविधाओं का उद्देश्य सरकारी योजनाओं और कार्यों को बेहतर तरीके से जनता तक पहुंचाना तथा संबंधित जिम्मेदारियों का निर्वहन करना है। ऐसे में पार्टी के कार्यक्रमों के लिए सरकारी वाहन या अन्य सुविधाओं के इस्तेमाल को लेकर नियमों और जवाबदेही की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।

सरकारी जिम्मेदारी और पार्टी के काम में अंतर जरूरी

इस पूरे मामले में मुख्य सवाल सरकारी दायित्वों और पार्टी संगठन की जिम्मेदारियों के बीच अंतर को लेकर है। दायित्वधारियों को सरकार की ओर से कौन-कौन से आधिकारिक काम सौंपे गए हैं और विधानसभा प्रभारी के तौर पर उन्हें क्या जिम्मेदारियां मिली हैं, यह अंतर स्पष्ट होना महत्वपूर्ण है।

इसके साथ ही यह भी देखना होगा कि सरकारी सुविधाओं का इस्तेमाल किन उद्देश्यों के लिए अधिकृत है और पार्टी के संगठनात्मक कार्यक्रमों पर होने वाला खर्च किस मद से किया जाता है।

हालांकि, केवल विधानसभा प्रभारी नियुक्त किए जाने से सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि नहीं होती। इसके लिए सरकारी संसाधनों के वास्तविक इस्तेमाल, लागू नियमों और संबंधित खर्च के विवरण की पड़ताल जरूरी होगी।

फिलहाल भाजपा की इन नियुक्तियों ने उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सरकार और पार्टी संगठन की भूमिकाओं तथा सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है।

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