ख़बर रफ़्तार , रुद्रपुर : उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले में साइबर धोखाधड़ी से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। रुद्रपुर की खालसा डिजिटल स्टूडियो फर्म के बैंक खाते के खिलाफ देश के 18 राज्यों से साइबर अपराध संबंधी 65 शिकायतें दर्ज होने की जानकारी मिली है। गृह मंत्रालय के समन्वय पोर्टल और जेएमआइएस पर उपलब्ध विवरण के आधार पर ट्रांजिट कैंप कोतवाली पुलिस ने फर्म के तीन अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस अब बैंक खाते के संचालन, उसमें हुए लेन-देन, धनराशि के स्रोत और दूसरे खातों में उसके हस्तांतरण से संबंधित जानकारी जुटा रही है। साथ ही, बैंक के दस्तावेजों और केवाईसी रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। हालांकि, शिकायतें दर्ज होने मात्र से संबंधित व्यक्तियों की संलिप्तता साबित नहीं होती। पुलिस जांच में ही उनकी भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।
18 राज्यों से दर्ज हुईं साइबर धोखाधड़ी की शिकायतें
ट्रांजिट कैंप कोतवाली में तैनात एएसआई रमेश चंदोला के अनुसार, गृह मंत्रालय के समन्वय पोर्टल पर खालसा डिजिटल स्टूडियो से जुड़े बैंक खाते के खिलाफ राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर कुल 65 शिकायतें दर्ज पाई गई हैं।
पुलिस के मुताबिक, ये शिकायतें देश के अलग-अलग राज्यों से संबंधित हैं। इनमें आंध्र प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, केरल, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, नागालैंड, ओडिशा, पंजाब, तमिलनाडु और छत्तीसगढ़ शामिल हैं।
पुलिस इन शिकायतों में दर्ज तथ्यों और संबंधित बैंक खाते के बीच संभावित संबंधों की जांच कर रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि खाते में हुए लेन-देन का कथित साइबर धोखाधड़ी की घटनाओं से कोई संबंध है या नहीं।
फर्म के तीन अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं पर मुकदमा
पुलिस के अनुसार, खालसा डिजिटल स्टूडियो फर्म के बैंक खाते के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं में जयनगर नंबर तीन निवासी पदम सिंह पुत्र प्रीतम सिंह, बरकत सिंह पुत्र प्रीतम सिंह और जयनगर नंबर दो निवासी भाग सिंह पुत्र प्रीतम सिंह शामिल हैं।
इन तीनों के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर उनकी भूमिका की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल जांच का केंद्र बैंक खाते का संचालन और उससे जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड हैं।
पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि खाते का संचालन कौन करता था, उसमें किस प्रकार की धनराशि जमा हुई और रकम किन खातों या व्यक्तियों तक पहुंची। इसके लिए बैंक स्टेटमेंट, खाता खोलने के आवेदन, केवाईसी दस्तावेज और अधिकृत हस्ताक्षरों से संबंधित रिकॉर्ड की पड़ताल की जा रही है।
बैंकिंग रिकॉर्ड और संदिग्ध लेन-देन की जांच
मामले में पुलिस विभिन्न राज्यों से दर्ज शिकायतों और बैंक खाते में हुए लेन-देन का मिलान करेगी। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि शिकायतों में बताए गए वित्तीय लेन-देन का संबंधित खाते से कोई सीधा संबंध है या नहीं।
एएसआई रमेश चंदोला के अनुसार, बैंकिंग दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तीनों अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं की भूमिका स्पष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
देहरादून में नौकरी और क्रिप्टो कारोबार के नाम पर खाते के इस्तेमाल का आरोप
इसी बीच देहरादून में नौकरी दिलाने और क्रिप्टो कारोबार के जरिए अच्छी कमाई का लालच देकर बैंक खाता खुलवाने तथा उसके संदिग्ध इस्तेमाल का एक अलग मामला भी सामने आया है।
मोती बाजार निवासी अभिषेक सेठ ने कोतवाली नगर पुलिस को शिकायत देकर आरोप लगाया कि अनन्येष लहरी और संतोष नाम के व्यक्तियों ने उसे नौकरी और क्रिप्टो कारोबार के जरिए कमाई का भरोसा दिलाया था। शिकायत के आधार पर पुलिस ने दोनों के खिलाफ धोखाधड़ी समेत संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, वर्ष 2024 में देहरादून में नौकरी तलाशने के दौरान उसकी मुलाकात अनन्येष लहरी से हुई थी। अनन्येष ने उसे नौकरी दिलाने का भरोसा दिया और संतोष नाम के व्यक्ति से परिचय कराया। शिकायत में बताया गया कि संतोष विदेश में रहता था और उससे संपर्क करने के लिए एक विदेशी मोबाइल नंबर दिया गया था।
टेलीग्राम के जरिए क्रिप्टो कारोबार का दिया गया लालच
अभिषेक सेठ का आरोप है कि टेलीग्राम पर बातचीत के दौरान संतोष ने उसे क्रिप्टो कारोबार में अच्छी कमाई होने की बात कही। इसके बाद उसे एक लिंक भेजकर ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा गया।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, ऐप डाउनलोड करने के बाद उसके मोबाइल पर आने वाले संदेशों की जानकारी दूसरे पक्ष तक पहुंचने लगी। बाद में उसे बताया गया कि कारोबार के लिए उसके नाम से बैंक खाता खुलवाना जरूरी है।
आरोप है कि वर्ष 2025 में उसके नाम पर बैंक खाता खुलवाया गया और फिर खाते से संबंधित लॉगिन आईडी तथा पासवर्ड हासिल कर लिए गए। अभिषेक को भरोसा दिलाया गया था कि खाते का इस्तेमाल क्रिप्टो कारोबार के लिए होगा।
संदिग्ध लेन-देन के बाद बैंक ने खाते पर लगाई रोक
शिकायत के अनुसार, कुछ समय तक आरोपी उससे संपर्क में रहे, लेकिन बाद में बातचीत बंद कर उसे ब्लॉक कर दिया। इसके बाद अभिषेक को पता चला कि उसके बैंक खाते में संदिग्ध लेन-देन हुए हैं और बैंक ने खाते को फ्रीज कर दिया है।
आरोपियों से संपर्क करने की कोशिश के बावजूद संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उसने पुलिस से शिकायत की। उसने मोबाइल नंबरों, टेलीग्राम आईडी, ऐप डाउनलोड कराने के लिए भेजे गए लिंक और बैंक खाते में हुए लेन-देन की जांच की मांग की है।
पुलिस ने दो आरोपियों के खिलाफ दर्ज किया मुकदमा
नगर कोतवाली के प्रभारी कैलाश चंद्र भट्ट के अनुसार, अभिषेक सेठ की शिकायत के आधार पर अनन्येष लहरी और संतोष के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(2) और 61(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
पुलिस मामले की जांच कर रही है। जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि बैंक खाते का इस्तेमाल किन गतिविधियों में किया गया और आरोपियों की भूमिका क्या रही।
दोनों मामलों में पुलिस वित्तीय लेन-देन और उपलब्ध दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही संबंधित व्यक्तियों की भूमिका और कथित साइबर धोखाधड़ी से जुड़े तथ्यों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
