22.3 C
London
Tuesday, June 18, 2024
spot_img

ऋषिकेश: तीन मरीज किडनी प्रत्यारोपण से हुए स्वस्थ्य…साझा किए अनुभव, डोनर हुए सम्मानित

ख़बर रफ़्तार, ऋषिकेश:  एम्स में अब तक तीन मरीजों का सफलतापूर्वक किडनी प्रत्यारोपण हो चुका है। एम्स दिल्ली के सहयोग से ट्रांसप्लांट के इन तीनों मामलों में दानदाता और मरीज पूरी तरह से स्वस्थ हैं। रविवार को एम्स में आयोजित कार्यक्रम में तीनों किडनी दानदाताओं और मरीजों ने अपने अनुभव साझा किए। साथ ही दूसरे लोगों को भी अंगदान के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम में अंगदान प्रत्यारोपण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित की गई रंगोली प्रतिस्पर्धा के अव्वल प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। 22 जनवरी को यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी विभाग, नर्सिंग कॉलेज और मोहन फाउंडेशन की ओर से राष्ट्रीय स्तर पर किडनी एवं अंगदान प्रत्यारोपण को बढ़ावा देने के लिए रंगोली प्रतियोगिता की गई थी। जिसमें पहले श्रेष्ठ छह पुरस्कारों में से पांच एम्स ऋषिकेश के कॉलेज ऑफ नर्सिंग के प्रतिभागियों ने हासिल किए हैं।

एम्स की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह, डीन अकादमिक प्रो. जया चतुर्वेदी, चिकित्सा अधीक्षक प्रो. आरबी कालिया ने अव्वल प्रतिभागियों को पुरस्कार वितरित किए। यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अंकुर मित्तल, यूरोलॉजी विभाग के प्रो. अरूप कुमार मंडल, डॉ. विकास पंवार, नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. शेरोन कंडारी ने संस्थान में तीन सफल गुर्दा प्रत्यारोपण के लिए ग्रसित रोगियों और उनके डोनर्स को भी संस्थान की ओर से सम्मानित किया।

केस-1

कुमाऊं निवासी मरीज विक्रम नेगी ने बताया कि एम्स में चिकित्सकों की ओर से किडनी प्रत्यारोपण कराने के सुझाव के बाद वह कई तरह की शंकाओं से घिरे हुए थे। उनके मन में सवाल था कि किडनी प्रत्यारोपण का क्या परिणाम रहेगा। परिजन से किडनी देने के बाद क्या मैं ठीक हो सकूंगा। जब किडनी ट्रांसप्लांट की जांच प्रक्रिया पूरी हुई और चिकित्सकों ने भरोसा दिलाया कि वह फिर से स्वस्थ जीवन जी सकेंगे तो मन में उम्मीद की किरण जगी। विक्रम के पिता लक्ष्मण सिंह नेगी बताया कि उनके मन में अपने पुत्र को किडनी डोनेट करने के दौरान कोई सवाल नहीं था। इसलिए संपूर्ण उपचार प्रक्रिया के दौरान वह घर नहीं लौटे। उन्हें इस सफलता पर पूरा भरोसा था। आखिर चिकित्सकों के अथक प्रयासों और प्रोत्साहन से यह कामयाबी हासिल हुई और पुत्र को नया जीवन मिला।

केस-2

किडनी डोनर सुनीता देवी ने अपने पुत्र सचिन को किडनी दान की। सचिन की पत्नी सपना ने बताया कि पति को इस बीमारी से उबारने के लिए पारिवारिक लोगों से अधिक एम्स के चिकित्सकों का सहयोग मिला। सपना ने बताया कि वह जब आठ माह की गर्भवती थीं, तब उन्हें पता चला कि उनके पति किडनी पेशेंट हैं। इसलिए उनका नियमित डायलिसिस होने लगा। बीमारी से वह मायूस रहने लगी। एक दिन उनके पति एम्स से डायलिसिस कराकर घर लौटे ही थे कि तभी डॉ. शेरोन कंडारी का फोन आया। उस फोन को रिसीव करने के बाद उनमें जीवन को लेकर उम्मीद की किरण जागने लगी। इसके बाद किडनी प्रत्यारोपण की प्रक्रिया शुरू हुई और चिकित्सकों की ओर से उनके परिवार का भरोसा जगाने पर उनके पति को नया जीवन मिल सका। अब वह पूरी तरह से स्वस्थ हैं।

केस-3

किडनी पेशेंट निर्दोष को उनकी माता शकुंतला देवी ने किडनी डोनेट की। निर्दोष के अनुसार उनकी दोनों किडनियों में पथरी फंसी थी। इसलिए उन्हें एम्स अस्पताल की इमरजेंसी में इलाज के लिए लाया गया। जहां सबसे पहले यूरोलॉजी विभाग की ओर से उनकी दोनों किडनियों का ऑपरेशन कर पथरी हटाई गईं। इसके बाद तीसरे ऑपरेशन में उनको किडनी प्रत्यारोपित की गई। निर्दोष ने बताया कि प्रत्यारोपण को लेकर उनके मन में कई तरह शंकाएं थी। जांच रिपोर्ट कैसी रहेगी, ट्रांसप्लांट हो पाएगा या नहीं, इसके परिणाम क्या होंगे। लेकिन उनके मन की सभी शंकाएं लगातार चिकित्सकीय टीम का सहयोग मिलने से मिटती गईं और विश्वास बढ़ता गया।

नुक्कड़ नाटक से अंगदान करने का दिया संदेश

यूरोलॉजी विभाग के ओपीडी एरिया में नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया। जिसमें एम्स के कॉलेज ऑफ नर्सिंग के विद्यार्थियों ने मरीजों व उनके तीमारदारों को गुर्दा और अन्य अंग दान करने के लिए प्रेरित किया। संदेश दिया कि किडनी खराब होने की स्थिति में अपने रक्त संबंधी को एक किडनी डोनेट कर सकते हैं। इससे दोनों स्वस्थ रहते हैं। नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से सड़क दुर्घटना या अन्य कारणों से अकाल मृत्यु होने पर भी विभिन्न अंगों को डोनेट कर किसी जरूरतमंद को जीवनदान देने का संदेश दिया। इस मौके पर डॉ. रोहित गुप्ता, प्रिंसिपल नर्सिंग स्मृति अरोड़ा, एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. प्रवीन, चीफ नर्सिंग ऑफिसर डॉ. रीटा शर्मा आदि मौजूद रहे।

ये भी पढ़ें…ऊधम सिंह नगर: 22 साल की महिला की पंखे से लटकी मिली लाश, दो बच्चों की मां है अनीता

2021 में मिली थी किडनी ट्रांसप्लांट की अनुमति

रीजनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन ने 8 जनवरी 2021 को एम्स ऋषिकेश को किडनी ट्रांसप्लांट की अनुमति दी थी। 19 अप्रैल 2023 को एम्स ने पहली किडनी ट्रांसप्लांट की। एम्स अब तक तीन मरीजों की किडनी ट्रांसप्लांट कर चुका है।
- Advertisement -spot_imgspot_img
Latest news
- Advertisement -spot_img
Related news
- Advertisement -spot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here