जानकारी के अनुसार, शुक्रवार रात से ही पुलिस की टीम उनके कोचिंग संस्थान के आसपास मौजूद रही। इस दौरान बड़ी संख्या में छात्र भी वहां जुटने लगे, जिससे कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बनी रही। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने तत्काल बलपूर्वक कार्रवाई से परहेज किया।
शनिवार सुबह कोचिंग से जुड़े छात्रों को संदेश भेजा गया कि निर्धारित समय पर कक्षा संचालित होगी। हालांकि, बाद में खान सर सार्वजनिक रूप से कक्षा लेते नजर नहीं आए और दोपहर में कोर्ट पहुंच गए।
मामले में दर्ज शिकायत के अनुसार, कोचिंग संस्थान के बाहर हुए हंगामे के दौरान दो सुरक्षा गार्डों द्वारा फायरिंग किए जाने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि सार्वजनिक स्थान पर हथियार का प्रदर्शन कर लोगों में भय का माहौल बनाया गया।
जांच के दौरान सुरक्षा कर्मियों द्वारा दिए गए कथित बयानों का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें दावा किया गया है कि हंगामे और मारपीट की स्थिति के बीच फायरिंग की गई। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।
पुलिस ने इस मामले में खान सर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं और आर्म्स एक्ट के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जांच और अदालत में यह साबित होता है कि फायरिंग किसी निर्देश पर की गई थी, तो संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और अदालत में होने वाली आगामी सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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