ख़बर रफ़्तार, चमोली : Mahendra Bhatt राज्यसभा सांसद और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के पैतृक गांव ब्राह्मण थाला का बंदोबस्ती रिकॉर्ड राजस्व अभिलेखागार से उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। अभिलेख न मिलने के कारण ग्रामीणों को भूमि से जुड़े जरूरी कामों के लिए जिला मुख्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। कई मामलों में दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने से ग्रामीणों को मायूस होकर लौटना पड़ रहा है।
जमीन के मुआवजे से लेकर जाति प्रमाणपत्र तक प्रभावित
गांव के बंदोबस्ती अभिलेख उपलब्ध नहीं होने का असर ग्रामीणों के कई कामों पर पड़ रहा है। सड़क निर्माण के दौरान जिन ग्रामीणों की जमीन सड़क में गई, उनमें कुछ लोगों का मुआवजा भी अटक गया है। इसके अलावा भूमि के स्वामित्व से जुड़े विवाद, परिवार में जमीन का बंटवारा और बच्चों के जाति प्रमाणपत्र बनवाने जैसे काम भी प्रभावित बताए जा रहे हैं।
ग्राम प्रधान दीपक थपलियाल के मुताबिक, वह पिछले करीब तीन वर्षों से क्षेत्र पंचायत की बैठकों और पत्राचार के माध्यम से ब्राह्मण थाला का बंदोबस्ती रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो सका।
सड़क में गई जमीन का मुआवजा भी अटका
ग्रामीणों के मुताबिक मोहनखाल-ताली सड़क निर्माण के दौरान थाला गांव के कई लोगों की जमीन सड़क की जद में आई थी। जोरापाणी तोक की जमीन से संबंधित मुआवजा भी अभिलेख उपलब्ध नहीं होने के कारण अटका हुआ है।
ग्रामीण गणपति थपलियाल ने बताया कि जमीन उनके नाम दर्ज है, लेकिन बंदोबस्ती रिकॉर्ड नहीं मिलने के कारण स्वामित्व से जुड़े पुराने दस्तावेज प्रस्तुत करने में परेशानी हो रही है। इसका सीधा असर मुआवजे की प्रक्रिया पर पड़ रहा है।
वहीं, हरीश थपलियाल का कहना है कि भूमि अभिलेख उपलब्ध नहीं होने के कारण परिवार में जमीन के बंटवारे का मामला भी लंबित है। कई ग्रामीण अपने बच्चों के जाति प्रमाणपत्र के लिए भी बंदोबस्ती नकल नहीं निकलवा पा रहे हैं।
1936 में शुरू हुई थी बंदोबस्ती प्रक्रिया
ब्रिटिश शासनकाल में वर्ष 1936 में भूमि का सर्वेक्षण, सीमांकन और मालिकाना हक निर्धारित करने के लिए बंदोबस्त प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसके तहत गांवों की जमीन के नक्शे, खसरा-खतौनी और भू-राजस्व से संबंधित रिकॉर्ड तैयार किए गए थे।
इसके बाद वर्ष 1957 में दोबारा बंदोबस्त किया गया, जो वर्ष 1962 तक प्रभावी रहा। इसके बाद दोबारा बंदोबस्त नहीं हुआ। पुराने बंदोबस्ती अभिलेख आज भी जमीन के स्वामित्व और राजस्व से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
महेंद्र भट्ट बोले- मामला अब संज्ञान में आया
ब्राह्मण थाला गांव पोखरी ब्लॉक में स्थित है और यह राज्यसभा सांसद एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का पैतृक गांव है। उनकी भी गांव में पुश्तैनी भूमि बताई जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने से कई लोग अपने बच्चों के नाम भूमि अभिलेखों में दर्ज कराने समेत अन्य जरूरी प्रक्रियाएं पूरी नहीं कर पा रहे हैं।
महेंद्र भट्ट ने कहा कि यह मामला पहले उनके संज्ञान में नहीं था। अब उन्हें इसकी जानकारी मिली है।
रिकॉर्ड गायब होने की होगी जांच
चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने बताया कि ब्राह्मण थाला गांव का बंदोबस्ती रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। उनके मुताबिक, पुराने रिकॉर्ड पहले पौड़ी मुख्यालय में रखे गए थे, जिन्हें अब जिला मुख्यालय लाया गया है।
डीएम ने कहा कि ब्राह्मण थाला का रिकॉर्ड आखिर कहां गायब हुआ, इसकी जांच कराई जाएगी और जल्द से जल्द अभिलेख उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाएंगे।

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