Meerut में CBI का बड़ा एक्शन : रिश्वत लेते पकड़े गए कैंट बोर्ड सदस्य, घर से मिला लाखों का कैश

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ख़बर रफ़्तार, मेरठ : Meerut में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की एंटी करप्शन विंग ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए कैंट बोर्ड के नामित सदस्य और भाजपा नेता डॉ. सतीश चंद्र शर्मा को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उन्होंने एक ठेकेदार से टेंडर रद्द न करने के बदले मोटी रकम की मांग की थी।

सीबीआई ने शुक्रवार शाम जाल बिछाकर डॉ. शर्मा को उनके पल्लवपुरम स्थित अंसल टाउन आवास से 3 लाख रुपये की रिश्वत की पहली किस्त लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। कार्रवाई के बाद उनके घर और अन्य ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया गया, जिसमें 50 लाख रुपये से अधिक की नकदी बरामद होने की जानकारी सामने आई है।

जानकारी के मुताबिक, मामला तहबाजारी, पार्किंग और गांधी बाग से जुड़े ठेकों से संबंधित है। शिकायतकर्ता ठेकेदार ने आरोप लगाया था कि उसके टेंडर को निरस्त न करने के बदले 10 लाख रुपये की मांग की गई थी। बताया गया कि शनिवार को होने वाली कैंट बोर्ड की बैठक में संबंधित ठेकों को रद्द करने का प्रस्ताव रखा जाना था।

शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने प्रारंभिक जांच की और आरोपों की पुष्टि होने पर ट्रैप ऑपरेशन तैयार किया। जैसे ही ठेकेदार ने निर्धारित रकम आरोपी को सौंपी, पहले से तैनात सीबीआई अधिकारियों ने उसे मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया। जांच के दौरान रासायनिक परीक्षण में भी रिश्वत लेने की पुष्टि होने की बात कही गई है।

गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने डॉ. शर्मा के आवास और लालकुर्ती स्थित क्लीनिक पर छापेमारी की। तलाशी के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी मिलने से जांच एजेंसी ने आय के स्रोतों की भी पड़ताल शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि बरामद नकदी के संबंध में संतोषजनक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके।

छापेमारी और पूछताछ के दौरान परिवार के सदस्यों से भी जानकारी जुटाई गई। वहीं, कार्रवाई के दौरान तनाव के चलते आरोपी की पत्नी की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई गई।

डॉ. सतीश चंद्र शर्मा लंबे समय से राजनीति और सामाजिक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। वर्ष 2022 में उन्हें केंद्र सरकार द्वारा मेरठ कैंट बोर्ड का सदस्य नामित किया गया था और हाल ही में उनका कार्यकाल बढ़ाया गया था। इससे पहले भी वे विभिन्न विवादों को लेकर चर्चा में रहे हैं।

सीबीआई अधिकारियों के अनुसार भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच जारी है। एजेंसी अब बैंक खातों, लॉकरों और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है ताकि आय से अधिक संपत्ति के संभावित पहलुओं की भी पड़ताल की जा सके। आरोपी को अदालत में पेश कर रिमांड लेने की तैयारी की जा रही है।

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