ख़बर रफ़्तार, नई दिल्ली : Sonam Wangchuk सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने वाले सोनम वांगचुक को शनिवार सुबह जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले जाने के बाद उनकी पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो ने अस्पताल प्रशासन से विशेष अपील की है। उन्होंने कहा कि परिवार और पिछले कई दिनों से उनकी देखभाल कर रहे डॉक्टरों की सहमति के बिना सोनम वांगचुक को किसी भी प्रकार की मौखिक दवा या नसों के माध्यम से (आईवी) उपचार नहीं दिया जाए।
गीतांजलि आंगमो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए बताया कि वह स्वयं सफदरजंग अस्पताल में मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि यदि परिवार की अनुमति के बिना कोई चिकित्सा प्रक्रिया शुरू की जाती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों और अस्पताल प्रशासन की होगी।
पत्नी का दावा- शुक्रवार तक स्वास्थ्य स्थिर था, अस्पताल ले जाने की जरूरत नहीं थी
गीतांजलि आंगमो ने अस्पताल में भर्ती किए जाने के फैसले पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि शुक्रवार तक सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति स्थिर थी और उन्हें अस्पताल ले जाने की आवश्यकता नहीं थी। उन्होंने आग्रह किया कि वांगचुक का उपचार उनके निजी चिकित्सक और परिवार की सहमति से ही किया जाए।
वहीं, अस्पताल सूत्रों के अनुसार सोनम वांगचुक पूरी तरह होश में हैं। उनके सभी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संकेतक (वाइटल पैरामीटर) फिलहाल स्थिर हैं और उन्हें सफदरजंग अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।
दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट और डॉक्टरों की सलाह का दिया हवाला, 21 दिन से भूख हड़ताल पर हैं वांगचुक
दिल्ली पुलिस का कहना है कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह और दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से अस्पताल पहुंचाया गया। पुलिस के अनुसार, उनकी लगातार बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए चिकित्सकीय निगरानी आवश्यक थी। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से जंतर-मंतर पर शांतिपूर्वक धरना समाप्त कर स्थल खाली करने की अपील भी की है।
गौरतलब है कि सोनम वांगचुक 28 जून से कथित नीट परीक्षा अनियमितताओं, पेपर लीक के मामलों और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। शुक्रवार रात जारी एक वीडियो संदेश में उन्होंने बताया था कि भूख हड़ताल के दौरान उनका लगभग 20 प्रतिशत वजन कम हो चुका है, लेकिन वे अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने सरकार से छात्रों और युवाओं की आवाज सुनने की भी अपील की थी।
दिल्ली हाईकोर्ट पहले ही वांगचुक के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने और आवश्यकता पड़ने पर उचित चिकित्सकीय हस्तक्षेप करने के निर्देश दे चुका है। फिलहाल उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर डॉक्टरों की टीम लगातार नजर बनाए हुए है।
