खबररफ़्तार , मसूरी : पहाड़ों की रानी मसूरी में आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां बंद करने से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) की नोटिस कार्रवाई ने पर्यटन कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। होमस्टे, होटल, गेस्ट हाउस और बेड एंड ब्रेकफास्ट (BNB) संचालकों को नोटिस मिलने के बाद कई कारोबारी प्राधिकरण कार्यालय के बाहर एकत्रित हुए। उन्होंने सरकार से मामले में हस्तक्षेप करने और राहत दिलाने की मांग की।
कारोबारियों का कहना है कि यदि मौजूदा परिस्थितियों में पर्यटन से जुड़ी व्यावसायिक गतिविधियां बंद करनी पड़ीं, तो इसका असर केवल होटल और होमस्टे संचालकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मसूरी की पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था और उससे जुड़े रोजगार भी प्रभावित हो सकते हैं।
MDDA की नोटिस कार्रवाई से पर्यटन कारोबारियों में चिंता
मसूरी में आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर MDDA की ओर से नोटिस दिए जाने के बाद होटल, गेस्ट हाउस, होमस्टे और BNB संचालकों में बेचैनी है। प्रभावित कारोबारियों ने प्राधिकरण कार्यालय के बाहर एकत्रित होकर अपनी समस्याएं रखीं और सरकार से समाधान निकालने की अपील की।
कारोबारियों का कहना है कि मसूरी में बड़ी संख्या में लोग पर्यटन पर निर्भर हैं। यहां आने वाले पर्यटकों को ठहरने की सुविधा देने में बड़े होटलों के साथ-साथ छोटे गेस्ट हाउस, होमस्टे और BNB इकाइयों की भी अहम भूमिका है। ऐसे में इन गतिविधियों पर व्यापक रोक लगने से स्थानीय कारोबार और रोजगार पर असर पड़ने की आशंका है।
मास्टर प्लान और भूमि उपयोग को लेकर उठाए सवाल
स्थानीय निवासी सुधांशु रावत और सभासद पवन थलवाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत आवासीय संपत्तियों में नियमों के विपरीत संचालित व्यावसायिक गतिविधियों पर कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, उन्होंने मसूरी में मास्टर प्लान, अधिसूचित और गैर-अधिसूचित क्षेत्रों तथा भूमि उपयोग की स्थिति को लेकर स्पष्टता की जरूरत बताई।
उनका कहना है कि नियोजन संबंधी स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण कारोबारियों के सामने असमंजस बना हुआ है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पृष्ठ संख्या 21 के उपखंड-2 का हवाला देते हुए कहा कि जहां मास्टर प्लान या भूमि उपयोग निर्धारित नहीं है, वहां यथास्थिति बनाए रखने से संबंधित प्रावधान पर भी विचार किया जाना चाहिए।
कारोबारियों ने मांग की कि मसूरी की भौगोलिक परिस्थितियों और नियोजन संबंधी स्थिति को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की जाए, ताकि नियमों का पालन सुनिश्चित करने के साथ स्थानीय कारोबारियों की समस्याओं का भी समाधान हो सके।
होमस्टे योजना को बढ़ावा देने के बीच नोटिस पर नाराजगी
पर्यटन कारोबारियों ने कहा कि सरकार ने पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए होमस्टे योजना को बढ़ावा दिया है। ऐसे में होमस्टे और अन्य पर्यटन इकाइयों को नोटिस मिलने से संचालकों के सामने असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।
कारोबारियों का तर्क है कि पर्यटन को बढ़ावा देने की नीतियों और आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर लागू नियमों के बीच स्पष्टता जरूरी है। उन्होंने सरकार से मांग की कि वह मसूरी की वास्तविक परिस्थितियों और पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था से जुड़े पहलुओं को सुप्रीम कोर्ट के सामने प्रभावी ढंग से रखे, जिससे नियमों के दायरे में कोई व्यावहारिक समाधान निकाला जा सके।
कारोबारियों पर मानसिक दबाव बढ़ने का दावा
स्थानीय निवासी सुधांशु रावत ने आरोप लगाया कि नोटिस कार्रवाई से पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों पर मानसिक दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि मसूरी एक प्रमुख पर्यटन स्थल है, जहां पर्यटकों के ठहरने की व्यवस्था में होटल, गेस्ट हाउस, होमस्टे और BNB संचालकों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
उनका कहना है कि यदि इन गतिविधियों पर बड़े स्तर पर रोक लगती है, तो इसका असर पर्यटन उद्योग के साथ-साथ उससे जुड़े अन्य छोटे कारोबारों और रोजगार पर भी पड़ सकता है। कारोबारियों ने मांग की कि उनकी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई के संबंध में स्पष्ट नीति बनाई जाए।
95 प्रतिशत कारोबारियों के प्रभावित होने का दावा
सभासद पवन थलवाल ने कहा कि मसूरी में आवासीय नक्शों के आधार पर बने भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने को लेकर नोटिस दिए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इस कार्रवाई से होटल, गेस्ट हाउस, होमस्टे और BNB कारोबार से जुड़े करीब 95 प्रतिशत लोग प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, यह आंकड़ा उनका दावा है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
कारोबारियों ने बताया कि वे इस मामले में मसूरी के उपजिलाधिकारी (SDM) से मुलाकात कर ज्ञापन भी दे चुके हैं। उन्होंने सरकार और MDDA से मांग की कि मामले का समाधान निकलने तक नोटिस कार्रवाई पर पुनर्विचार किया जाए।
पर्यटन कारोबार को राहत देने की मांग
मसूरी के पर्यटन कारोबारियों का कहना है कि वे नियमों के दायरे में समाधान चाहते हैं। उनकी मांग है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों, मास्टर प्लान और भूमि उपयोग से जुड़े प्रावधानों को स्पष्ट करते हुए ऐसा रास्ता निकाला जाए, जिससे नियमानुसार कार्रवाई भी हो और पर्यटन पर निर्भर स्थानीय लोगों के हितों का भी ध्यान रखा जा सके।
फिलहाल, नोटिस कार्रवाई के बाद मसूरी में पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों की चिंता बढ़ी हुई है। अब कारोबारियों की नजर सरकार और MDDA के अगले कदम पर है।
