खबररफ़्तार , देहरादून : उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। मामले में कथित वीआईपी की भूमिका और उससे जुड़े व्यक्ति की राज्यपाल पद पर नियुक्ति को लेकर भाजपा और कांग्रेस एक बार फिर आमने-सामने हैं। भाजपा विधायक और पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता विनोद चमोली ने कांग्रेस पर अंकिता भंडारी के माता-पिता की भावनाओं का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। वहीं, कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने भाजपा के आरोपों पर पलटवार करते हुए सरकार की जांच प्रक्रिया और कथित वीआईपी से जुड़े सवालों के जवाब मांगे हैं।
विनोद चमोली बोले- अंकिता पूरे उत्तराखंड की बेटी थी
भाजपा विधायक विनोद चमोली ने कहा कि अंकिता भंडारी का मामला पूरे उत्तराखंड की भावनाओं से जुड़ा है। उनके मुताबिक, अंकिता किसी एक राजनीतिक दल की बेटी नहीं थी, बल्कि पूरे प्रदेश की बेटी थी। ऐसे संवेदनशील मामले में राजनीतिक दलों को जिम्मेदारी के साथ अपनी बात रखनी चाहिए।
चमोली ने कहा कि अंकिता के परिवार का दुख और उनकी पीड़ा अपनी जगह है। इस दुख को पूरा उत्तराखंड महसूस करता है और भाजपा भी पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि परिवार की भावनाओं को राजनीतिक मुद्दा बनाना उचित नहीं है।
भाजपा विधायक ने अपील की कि मामले को राजनीतिक रंग देने के बजाय न्याय की प्रक्रिया पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार को न्याय मिलना सबसे महत्वपूर्ण है और सभी राजनीतिक दलों को इस दिशा में जिम्मेदारी से काम करना चाहिए।
तीन आरोपियों को उम्रकैद का हवाला, सीबीआई जांच के निष्कर्ष का इंतजार
विनोद चमोली ने अपने बयान में कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड के तीन मुख्य आरोपियों को अदालत से उम्रकैद की सजा मिल चुकी है। उन्होंने इसे मामले में हुई कानूनी कार्रवाई और अभियोजन की पैरवी से जोड़ते हुए कहा कि अब सीबीआई जांच के निष्कर्षों का इंतजार किया जाना चाहिए।
चमोली के मुताबिक, जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर न्याय की प्रक्रिया में कोई कानूनी या प्रक्रियागत बाधा है, तो उसे दूर किया जाना चाहिए।
भाजपा विधायक ने भरोसा जताया कि जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
गरिमा दसौनी का पलटवार- सरकार जनता के सवालों का जवाब दे
भाजपा विधायक के बयान पर कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने पलटवार किया। उन्होंने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अंकिता भंडारी मामले में सरकार को जनता के सवालों का स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
दसौनी ने सवाल उठाया कि घटना के बाद लंबे समय तक सीबीआई जांच की मांग के बावजूद राज्य और केंद्र सरकार की ओर से जांच की सिफारिश क्यों नहीं की गई। उनके मुताबिक, प्रदेश में लगातार न्याय की मांग उठती रही, लेकिन मामले में कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर उठे सवालों का स्पष्ट जवाब अब तक सामने नहीं आया है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने राज्य सरकार की ओर से गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मामले से जुड़े सभी संदेहों को दूर करना सरकार की जिम्मेदारी है, ताकि जनता के बीच उठ रहे सवालों का जवाब मिल सके।
कथित वीआईपी की पहचान और भूमिका स्पष्ट करने की मांग
गरिमा दसौनी ने कहा कि सीबीआई जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में जिस कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर लगातार चर्चा होती रही है, उसकी पहचान क्या है और मामले में उसकी कथित भूमिका क्या रही।
उन्होंने आरोप लगाया कि जांच के निष्कर्ष सामने आने और इन सवालों के स्पष्ट जवाब मिलने से पहले संबंधित व्यक्ति को संवैधानिक पद पर नियुक्त किया जाना संदेह पैदा करता है। कांग्रेस प्रवक्ता ने इस नियुक्ति को लेकर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि इससे संबंधित व्यक्ति को कानूनी सुरक्षा देने की कोशिश हो सकती है।
हालांकि, कथित वीआईपी की भूमिका और नियुक्ति को लेकर कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों और संबंधित आधिकारिक तथ्यों के आधार पर ही की जा सकती है।
अंकिता भंडारी मामले पर फिर तेज हुई राजनीतिक बहस
अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच जारी बयानबाजी से प्रदेश की राजनीति में यह मुद्दा फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। भाजपा का कहना है कि मामले में कानूनी प्रक्रिया और चल रही जांच के निष्कर्षों का इंतजार किया जाना चाहिए, जबकि कांग्रेस कथित वीआईपी की पहचान, भूमिका और नियुक्ति को लेकर सरकार से जवाब मांग रही है।
इस पूरे विवाद में अब सीबीआई जांच के निष्कर्ष और कथित वीआईपी से जुड़े सवालों पर सामने आने वाली आधिकारिक जानकारी अहम मानी जा रही है। फिलहाल, दोनों राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं और मामले से जुड़े सवालों के स्पष्ट जवाब सामने आने का इंतजार है।
