खबररफ़्तार , देहरादून : Uttarakhand के अग्निवीरों के लिए राहत भरी खबर है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भारतीय सेना से नवंबर 2026 में सेवानिवृत्त होने जा रहे अग्निवीरों के पहले बैच में शामिल प्रदेश के दो अग्निवीरों को 40वीं वाहिनी प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी (PAC) में उपलब्ध रिक्त पदों के सापेक्ष समायोजित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से सैन्य सेवा पूरी करने के बाद इन युवाओं को राज्य की सुरक्षा व्यवस्था में योगदान देने का अवसर मिलेगा।
राज्य सरकार के इस निर्णय को सेवामुक्त होने वाले अग्निवीरों के पुनर्वास और रोजगार से जोड़कर देखा जा रहा है। इससे उनके सैन्य प्रशिक्षण, अनुशासन और अनुभव का उपयोग प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था में किया जा सकेगा।
नवंबर 2026 में सेवामुक्त होगा अग्निवीरों का पहला बैच
भारत सरकार के संयुक्त सचिव की ओर से उत्तराखंड सरकार को भेजे गए पत्र में बताया गया था कि अग्निपथ योजना के तहत भारतीय सेना में भर्ती हुए अग्निवीरों का पहला बैच नवंबर 2026 में सशस्त्र बलों से सेवामुक्त होगा।
इसी क्रम में उत्तराखंड के दो अग्निवीरों को 40वीं वाहिनी PAC में समायोजित करने का प्रस्ताव राज्य सरकार के सामने रखा गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रस्ताव पर सहमति जताते हुए दोनों अग्निवीरों को उपलब्ध रिक्त पदों के सापेक्ष समायोजित करने की स्वीकृति दे दी है।
इस निर्णय का उद्देश्य सेना में सेवा दे चुके युवाओं को आगे भी प्रदेश की सेवा से जोड़ना और उनके अनुभव का लाभ राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को दिलाना है।
CM धामी बोले- अग्निवीरों का अनुभव राष्ट्र की अमूल्य पूंजी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में शुरू की गई अग्निपथ योजना देश के युवाओं में अनुशासन, राष्ट्रसेवा और कर्तव्यनिष्ठा की भावना को मजबूत कर रही है।
उन्होंने कहा कि भारतीय सेना में सेवा के दौरान अग्निवीर जो कौशल, अनुभव और अनुशासन हासिल करते हैं, वह राष्ट्र की अमूल्य पूंजी है। राज्य सरकार उनके योगदान और क्षमताओं का सम्मान करती है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, सरकार का प्रयास है कि देश की सेवा कर चुके इन युवाओं को आगे भी उत्तराखंड की सेवा करने का अवसर मिले। उनके सैन्य अनुभव, दक्षता और अनुशासन का लाभ प्रदेश को मिल सके, इसके लिए सरकार प्रतिबद्ध है।
PAC में समायोजन से सैन्य प्रशिक्षण का मिलेगा लाभ
चार साल की सैन्य सेवा पूरी करने के बाद अग्निवीरों को रोजगार के नए अवसरों की जरूरत होती है। ऐसे में PAC जैसी वर्दीधारी सेवा में समायोजन का अवसर उनके लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सेना में प्रशिक्षण के दौरान अग्निवीर अनुशासन, टीमवर्क, शारीरिक दक्षता और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से निपटने का अनुभव हासिल करते हैं। इन क्षमताओं का इस्तेमाल सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियों और आपातकालीन परिस्थितियों में उपयोगी हो सकता है।
हालांकि, फिलहाल मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड के दो अग्निवीरों को 40वीं वाहिनी PAC में उपलब्ध रिक्त पदों के सापेक्ष समायोजित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसे सभी अग्निवीरों के लिए स्वतः लागू होने वाली नियुक्ति व्यवस्था नहीं माना जाना चाहिए।
समूह ‘ग’ के वर्दीधारी पदों पर 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण
उत्तराखंड सरकार पहले से ही सेवामुक्त अग्निवीरों के पुनर्वास और रोजगार के लिए कदम उठा रही है। राज्य सरकार ने समूह ‘ग’ के वर्दीधारी पदों में अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था की है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य सैन्य सेवा पूरी करने के बाद प्रदेश लौटने वाले युवाओं को सरकारी सेवाओं में अवसर उपलब्ध कराना है। इससे अग्निवीर अपने सैन्य प्रशिक्षण और अनुभव के आधार पर राज्य की विभिन्न वर्दीधारी सेवाओं में रोजगार पाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
अग्निवीर रोजगार सेल से युवाओं को मिलेगी मदद
राज्य सरकार ने सेवामुक्त अग्निवीरों के लिए समर्पित अग्निवीर रोजगार सेल के गठन को भी मंजूरी दी है। इस सेल के माध्यम से सेना से सेवा पूरी करके लौटने वाले युवाओं को उनकी योग्यता और कौशल के अनुरूप रोजगार के अवसरों की जानकारी देने का प्रयास किया जाएगा।
इसके अलावा, युवाओं को सरकारी योजनाओं, उपलब्ध रोजगार विकल्पों और आवश्यक मार्गदर्शन से जोड़ने पर भी जोर दिया जाएगा। इसका मकसद यह है कि सैन्य सेवा पूरी करने के बाद अग्निवीरों को अपने भविष्य की योजना बनाने और रोजगार तलाशने में सहायता मिल सके।
अग्निवीरों के पुनर्वास पर सरकार का जोर
उत्तराखंड के दो अग्निवीरों को 40वीं वाहिनी PAC में समायोजित करने के प्रस्ताव को मंजूरी देना राज्य में अग्निवीरों के पुनर्वास और रोजगार से जुड़े प्रयासों की कड़ी है। इसके साथ ही 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण और अग्निवीर रोजगार सेल जैसी व्यवस्थाओं के जरिए सेवामुक्त युवाओं को नए अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।
सरकार का कहना है कि सेना में सेवा दे चुके युवाओं के अनुशासन, प्रशिक्षण और दक्षता का लाभ प्रदेश को मिलना चाहिए। नवंबर 2026 में अग्निवीरों के पहले बैच की सेवा पूरी होने के साथ ही उनके आगे के रोजगार और पुनर्वास से जुड़े अवसरों पर भी ध्यान रहेगा।
