ख़बर रफ़्तार, देहरादून : Neet Paper Leak देशभर में परीक्षा रद्द होने के बाद उत्तराखंड की राजनीति भी गरमा गई है। कांग्रेस और भाजपा एक-दूसरे पर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने का आरोप लगा रहे हैं। NEET पेपर लीक विवाद के बीच अब राज्य में भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता को लेकर भी बड़े सवाल खड़े होने लगे हैं।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने परीक्षा रद्द होने को लाखों छात्रों के सपनों पर हमला बताते हुए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि वर्षों की मेहनत और परिवारों के आर्थिक त्याग के बाद परीक्षा देने वाले छात्रों को मानसिक और आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
वहीं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक अवसरवाद बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने जीरो टॉलरेंस नीति अपनाते हुए तुरंत परीक्षा रद्द की और CBI जांच के आदेश दिए। भाजपा का दावा है कि सरकार परीक्षा माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है।
NEET विवाद के बीच उत्तराखंड के पुराने भर्ती घोटाले भी फिर चर्चा में आ गए हैं। UKSSSC स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा पेपर लीक, VDO-VPDO भर्ती घोटाला, सचिवालय रक्षक भर्ती विवाद और वन दारोगा भर्ती मामलों ने पहले ही राज्य की परीक्षा प्रणाली पर सवाल खड़े किए थे।
विशेषज्ञों का कहना है कि पेपर लीक अब केवल नकल का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह करोड़ों रुपये के संगठित नेटवर्क में बदल चुका है। इसमें दलाल, कोचिंग नेटवर्क, तकनीकी विशेषज्ञ और सिस्टम से जुड़े लोग शामिल हो सकते हैं।
हालांकि लगातार सामने आए घोटालों के बाद उत्तराखंड सरकार ने 2023 में देश का सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया था। इस कानून में दोषियों के लिए उम्रकैद और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
लगातार हो रहे पेपर लीक और परीक्षा विवादों ने युवाओं में गहरा अविश्वास पैदा कर दिया है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र अब परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठाने लगे हैं।

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