ख़बर रफ़्तार, नई दिल्ली: मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के आरोपों को लेकर NSUI कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने प्रतीकात्मक तरीके से सफेद कपड़ा ओढ़कर जमीन पर लेटकर अपना विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मतदाता सूची में नाम हटना सिर्फ एक नाम का रिकॉर्ड से गायब होना नहीं है, बल्कि इससे नागरिक के मतदान के अधिकार पर भी असर पड़ सकता है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि व्यक्ति वास्तविक रूप से मौजूद है, लेकिन यदि सरकारी रिकॉर्ड में उसका नाम नहीं है तो चुनाव के दौरान वह अपने मताधिकार का इस्तेमाल नहीं कर पाएगा। इसी संदेश को सामने रखने के लिए कार्यकर्ताओं ने खुद को प्रतीकात्मक रूप से ‘मृत’ दिखाकर प्रदर्शन किया।
‘हम जिंदा हैं, लेकिन कागजों में मर गए’
प्रदर्शन में शामिल कार्यकर्ता आकाश ने कहा कि युवाओं और वोट देने वाले नागरिकों के साथ कथित तौर पर हुए अन्याय को सामने लाने के लिए यह प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि युवा वास्तविक रूप से जिंदा हैं, लेकिन कागजों में उन्हें मृत दिखाए जाने जैसी स्थिति पैदा हो गई है।
आकाश ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती, तब तक युवा इसी तरह अपना विरोध जारी रखेंगे।
चुनाव आयोग पर उठाए सवाल
NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने भी मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से बाहर किए गए हैं। जाखड़ ने कहा कि यह केवल वोटर लिस्ट का मुद्दा नहीं है, बल्कि लोकतंत्र और संविधान से जुड़ा सवाल है।
उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई और कहा कि मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर भी उन्होंने सवाल उठाए।
जाखड़ ने कहा कि पुलिस प्रदर्शनकारियों के शरीर को रोक सकती है, लेकिन उनके हौसले और आवाज को नहीं रोक सकती।
पीएम मोदी का मास्क पहनकर भी प्रदर्शन
प्रदर्शन के दौरान एक कार्यकर्ता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मास्क पहने हुए भी नजर आया। उसके साथ मौजूद कार्यकर्ताओं ने मतदाता सूची में नाम हटाए जाने के आरोपों को लेकर प्रतीकात्मक प्रस्तुति दी।
प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा अपनी प्रमुख मांग बताया। संगठन की ओर से पूरे मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की गई है।

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