ख़बर रफ़्तार, नई दिल्ली : Supreme Court सोमवार को उन याचिकाओं पर सुनवाई करेगा, जिनमें यह सवाल उठाया गया है कि क्या मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार अकेले उन शक्तियों का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो संविधान और कानून के तहत पूरे चुनाव आयोग यानी बहु-सदस्यीय आयोग को दी गई हैं।
सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक कॉज लिस्ट के मुताबिक, CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी। वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने 29 सितंबर को CJI के समक्ष इस मामले का उल्लेख किया था, जिसके बाद मामले को अगले सप्ताह सूचीबद्ध करने की बात कही गई थी।
चुनाव आयोग के सामूहिक फैसले पर जोर
याचिका में चुनाव आयोग के कामकाज में सामूहिक निर्णय लेने की व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है। साथ ही CEC द्वारा कथित तौर पर चुनाव आयोग के नाम पर इस्तेमाल की गई शक्तियों के अधिकार को लेकर क्वो वारंटो जैसी राहत दिए जाने की मांग भी की गई है।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनावों की निगरानी, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति चुनाव आयोग को दी गई है, न कि केवल मुख्य चुनाव आयुक्त को।
2023 के कानून का भी दिया गया हवाला
याचिका में Chief Election Commissioner and Other Election Commissioners (Appointment, Conditions of Service and Term of Office) Act, 2023 की धारा 18 का भी उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ता के अनुसार, यह प्रावधान आयोग के सामूहिक निर्णय लेने की व्यवस्था से संबंधित है। इसमें असहमति की स्थिति में बहुमत के आधार पर फैसला किए जाने का प्रावधान बताया गया है।
दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का जिक्र
याचिका में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की कथित आपत्तियों का भी उल्लेख किया गया है। याचिका के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच कम से कम 14 बार कुछ फैसलों और कदमों को लेकर आपत्ति दर्ज की।
इनमें कथित तौर पर आयोग की मंजूरी के बिना जारी किए गए संचार और आदेश, बैठकों से पहले और बाद में एजेंडे से जुड़े मुद्दे, विदेश यात्राएं, फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता सूची के डेटाबेस तक पहुंच और पश्चिम बंगाल में ट्रिब्यूनल के समक्ष अपील दायर करने जैसे मामले शामिल हैं।
मतदाता डेटा के केंद्रीकरण पर भी सवाल
याचिका में मतदाता सूची के डेटाबेस के कथित तौर पर धीरे-धीरे केंद्रीकरण और चुनाव आयोग के आईटी सिस्टम में काम के बंटवारे में बदलाव को लेकर भी दोनों चुनाव आयुक्तों द्वारा उठाई गई चिंताओं का जिक्र किया गया है।
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग को मिली शक्तियों का इस्तेमाल निर्धारित संवैधानिक और कानूनी ढांचे के अनुसार ही किया जाए।
इसके अलावा विवादित फैसलों से जुड़े रिकॉर्ड को पेश करने और सुरक्षित रखने तथा चुनाव आयोग में सामूहिक निर्णय लेने की व्यवस्था का पालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करने की भी मांग की गई है।
