Rajouri: विश्वनाथ घाट पर सैन्य सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार, हजारों लोगों ने नम आंखों से दी श्रद्धांजलि

खबरे शेयर करे -

खबर रफ्तार, राजौरी: Rajouri में आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान शहीद हुए युवा सेना अधिकारी लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी को उनके गृह जनपद अल्मोड़ा में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। विश्वनाथ घाट पर हुए अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में लोगों ने पहुंचकर वीर सपूत को श्रद्धांजलि अर्पित की। भारतीय सेना ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर उन्हें अंतिम सलामी दी।

शहीद अधिकारी का पार्थिव शरीर सेना के विमान से जम्मू से पंतनगर एयरपोर्ट लाया गया। इसके बाद सेना के हेलिकॉप्टर के माध्यम से उन्हें अल्मोड़ा स्थित आर्मी हेलीपैड पहुंचाया गया। वहां सेना के अधिकारियों और जवानों ने श्रद्धापूर्वक अंतिम सलामी दी। बाद में पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए पांडेखोला स्थित उनके आवास ले जाया गया।

आवास तक पहुंचने के दौरान मार्ग में लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। अनेक स्थानों पर नागरिकों ने सड़क किनारे खड़े होकर पुष्प वर्षा की और शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की। पूरा क्षेत्र ‘भारत माता की जय’ और ‘शहीद बीरेश्वर गोस्वामी अमर रहें’ के नारों से गूंज उठा।

पांडेखोला स्थित आवास पर अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। परिजन, रिश्तेदार, मित्र, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के सदस्य तथा प्रशासनिक अधिकारी भी श्रद्धांजलि देने के लिए मौजूद रहे। तिरंगे में लिपटे बेटे का पार्थिव शरीर देखकर माता-पिता और अन्य परिजनों का दुख छलक पड़ा। इस भावुक माहौल में उपस्थित लोगों की आंखें भी नम हो गईं।

अंतिम दर्शन के बाद शहीद की अंतिम यात्रा निकाली गई और उनकी पार्थिव देह को विश्वनाथ घाट ले जाया गया। यहां सैन्य परंपराओं के अनुरूप पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। शहीद के चाचा और बड़े भाई ने उन्हें मुखाग्नि दी। सेना के जवानों ने शस्त्र झुकाकर और गार्ड ऑफ ऑनर देकर अपने वीर अधिकारी को अंतिम विदाई दी।

इस अवसर पर प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस अधिकारियों और सैन्य अधिकारियों ने पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। अधिकारियों ने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा के लिए लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी का सर्वोच्च बलिदान सदैव याद रखा जाएगा और यह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।

दो दिन बाद बनने वाले थे कैप्टन

लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी का सैन्य जीवन बेहद उज्ज्वल माना जा रहा था। जनवरी 2023 में सेना में शामिल होने के बाद जून 2024 में उन्हें कमीशन प्राप्त हुआ था। जानकारी के अनुसार, वह मात्र दो दिन बाद कैप्टन पद पर पदोन्नत होने वाले थे। परिवार और सहकर्मी इस महत्वपूर्ण उपलब्धि का इंतजार कर रहे थे, लेकिन उससे पहले ही उन्होंने देश की सेवा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दे दिया।

मेधावी छात्र और देशभक्ति का उदाहरण

25 वर्षीय बीरेश्वर गोस्वामी मूल रूप से अल्मोड़ा जिले के बगवालीपोखर (बाड़ी) क्षेत्र के निवासी थे। वर्तमान में उनका परिवार पांडेखोला (अथरबनी) में रहता है। उनके पिता प्रमोद नाथ गोस्वामी प्रशासनिक सेवा से जुड़े हैं, जबकि माता सरस्वती गोस्वामी शिक्षिका हैं।

बीरेश्वर बचपन से ही प्रतिभाशाली छात्र रहे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा आर्मी स्कूल रानीखेत और सैनिक स्कूल घोड़ाखाल में हुई। बाद में उन्होंने ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की और सिल्वर मेडल प्राप्त किया। उन्हें एनडीए के साथ-साथ कैट, एनएलयू और इंग्लैंड की एक प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में भी अवसर मिला था, लेकिन उन्होंने देश सेवा को प्राथमिकता देते हुए सेना का मार्ग चुना।

क्षेत्र में शोक की लहर

युवा अधिकारी की शहादत की खबर से पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है। उनके माता-पिता, बड़े भाई और अन्य परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके बलिदान को राष्ट्र के लिए अमूल्य बताया है। लोगों ने कहा कि लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी का साहस, समर्पण और देशभक्ति हमेशा याद रखी जाएगी।

You May Also Like

More From Author

+ There are no comments

Add yours