शिकायतकर्ता के अनुसार उनकी बहन को 14 फरवरी 2026 को गंभीर अवस्था में एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकीय जांच में महिला के एचआईवी संक्रमित होने की पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने इसके बाद महिला के पति और बेटे की भी जांच कराने की सलाह दी थी।
आरोप है कि महिला का पति अस्पताल से चला गया और निर्धारित जांच नहीं कराई। कुछ दिनों बाद उसने व्हाट्सएप के माध्यम से अपनी एचआईवी जांच रिपोर्ट भेजी। रिपोर्ट को एक अस्पताल की बताई गई जांच रिपोर्ट बताया गया था।
परिजनों का कहना है कि जब अस्पताल प्रशासन से रिपोर्ट की पुष्टि कराई गई तो रिपोर्ट पर दर्ज यूएचआईडी नंबर किसी अन्य महिला मरीज का निकला। साथ ही संबंधित व्यक्ति के नाम से कोई जांच रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं मिला। इसके बाद रिपोर्ट के फर्जी होने की आशंका जताई गई।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि महिला के पति ने दूसरे अस्पताल में दोबारा एचआईवी जांच कराने से भी इनकार कर दिया था। उपचार के दौरान 2 मार्च 2026 को महिला की मौत हो गई।
मृतका के परिजनों का आरोप है कि पति ने अपनी बीमारी की जानकारी छिपाई, कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार कराए और महिला की सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया। पुलिस ने शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
