खबर रफ्तार, उत्तराखंड: Uttarakhand साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के पीड़ितों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से एक नई ऑनलाइन व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत अब ऐसे लोगों को फ्रीज की गई धनराशि वापस पाने के लिए पुलिस थानों, बैंकों या अन्य कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं होगी।
नई व्यवस्था के अंतर्गत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म पर मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल (एमआरएम) शुरू किया गया है। इस पोर्टल के माध्यम से पात्र पीड़ित स्वयं ऑनलाइन आवेदन कर अपनी रोकी गई धनराशि की वापसी का दावा कर सकते हैं।
अधिकारियों के अनुसार यह सुविधा केवल उन मामलों में उपलब्ध होगी, जिनमें पीड़ित ने समय रहते 1930 हेल्पलाइन या साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई हो और संबंधित राशि अपराधियों के बैंक खातों में होल्ड कर दी गई हो। यदि धनराशि पहले ही खाते से निकाली जा चुकी है, तो इस प्रणाली के माध्यम से रिफंड संभव नहीं होगा।
नई प्रक्रिया के तहत 50 हजार रुपये तक की फ्रीज राशि वाले मामलों ईआर या न्यायालयमें एफआ के आदेश की जरूरत नहीं पड़ेगी। पुलिस रिपोर्ट और इंडेमनिटी बॉन्ड के आधार पर राशि सीधे पीड़ित के बैंक खाते में स्थानांतरित की जा सकेगी।
यदि कुल होल्ड राशि 50 हजार रुपये से अधिक हो, लेकिन अलग-अलग खातों में रोकी गई हो और किसी एक खाते में 50 हजार रुपये से ज्यादा रकम न हो, तब भी बिना एफआईआर के रिफंड प्रक्रिया पूरी की जाएगी। हालांकि किसी एक बैंक खाते में 50 हजार रुपये से अधिक राशि फ्रीज होने पर एफआईआर दर्ज कराना अनिवार्य होगा।
पीड़ित द्वारा पोर्टल पर आवेदन करने के बाद संबंधित पुलिस इकाई आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करेगी और निर्धारित प्रावधानों के तहत नोटिस अपलोड किया जाएगा। इसके पश्चात संबंधित बैंक सीधे पीड़ित के खाते में धनराशि वापस भेज देगा।

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