खबर रफ्तार, हरिद्वार:Kajal-saini लोक सेवा आयोग की पीसीएस परीक्षा में सफलता हासिल कर एसडीएम बनने वाली आज युवाओं के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन गई हैं। अपनी सफलता का श्रेय उन्होंने अपने माता-पिता को दिया, जिन्होंने सामाजिक दबावों की परवाह किए बिना बेटी की शिक्षा को प्राथमिकता दी।
हरिद्वार जिले के झबरेड़ा क्षेत्र स्थित सड़ौली गांव की रहने वाली काजल सैनी एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता रामकुमार खेती करते हैं, जबकि मां राजदुलारी गृहिणी हैं। परिवार में उनका छोटा भाई गुरमीत भी उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहा है।
काजल की शुरुआती शिक्षा राजीव गांधी नवोदय विद्यालय, लंढौरा में हुई। इसके बाद उन्होंने गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय से बीएएमएस की डिग्री हासिल की। बचपन में गांव के एक शिक्षक से एसडीएम पद के बारे में सुनकर उनके मन में प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना जागा।
बीएएमएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद काजल ने महसूस किया कि उनका रुझान चिकित्सा क्षेत्र से अधिक प्रशासनिक सेवाओं की ओर है। इसके बाद उन्होंने सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी शुरू की। हालांकि शुरुआती प्रयासों में उन्हें सफलता नहीं मिली। यूपीएससी के साथ-साथ वर्ष 2021 में पीसीएस और लोअर पीसीएस परीक्षाओं में भी वे चयनित नहीं हो सकीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
लगातार प्रयासों का परिणाम वर्ष 2025 में मिला, जब उन्होंने सहायक समीक्षा अधिकारी (ARO) परीक्षा उत्तीर्ण कर सचिवालय में नियुक्ति प्राप्त की। वर्तमान में इसी पद पर कार्यरत रहते हुए उन्होंने पीसीएस परीक्षा में सफलता हासिल कर एसडीएम बनने का सपना साकार किया।
काजल का कहना है कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में सफलता के लिए मजबूत आधारभूत तैयारी बेहद जरूरी है। उन्होंने युवाओं को नियमित अध्ययन, सकारात्मक मित्रों का साथ और परिवार के सहयोग को सफलता की कुंजी बताया। काजल ने यह भी कहा कि अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी समाचार पत्रों का अध्ययन उनके लिए बेहद उपयोगी साबित हुआ।

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