ख़बर रफ़्तार, Trend 80 के दशक का पुराना लुक पाने का AI ट्रेंड इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग कुछ ही सेकंड में अपनी सामान्य तस्वीर को पुराने जमाने के कपड़े, हेयर स्टाइल और अंदाज में बदल रहे हैं। इसके लिए बड़ी संख्या में लोग अलग-अलग AI ऐप और वेबसाइट पर अपनी तस्वीरें अपलोड कर रहे हैं। हालांकि, साइबर विशेषज्ञों ने इस ट्रेंड को लेकर लोगों को सावधान किया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मनोरंजन के लिए अनजान AI प्लेटफॉर्म पर शेयर की गई आपकी तस्वीर भविष्य में साइबर अपराधियों के लिए उपयोगी डेटा बन सकती है। फोटो अपलोड करने से पहले यह समझना जरूरी है कि संबंधित प्लेटफॉर्म आपकी तस्वीर और चेहरे से जुड़े डेटा को किस तरह स्टोर, प्रोसेस और इस्तेमाल करता है।
सोशल मीडिया की जानकारी के साथ जुड़ सकता है चेहरा
साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक, सोशल मीडिया पर पहले से मौजूद नाम, मोबाइल नंबर, फोटो और दूसरी व्यक्तिगत जानकारियों के साथ अगर चेहरे से जुड़ी डिजिटल जानकारी भी जुड़ जाए तो अपराधियों के लिए किसी व्यक्ति को निशाना बनाना आसान हो सकता है।
पहले AI के जरिए आवाज की नकल और वॉइस क्लोनिंग को लेकर चिंता जताई जाती रही है। अब वायरल हो रहे फोटो एडिटिंग ट्रेंड के चलते लोगों के चेहरे का डिजिटल डेटा भी अलग-अलग प्लेटफॉर्म तक पहुंच रहा है। इससे भविष्य में निजता और डिजिटल सुरक्षा को लेकर खतरा बढ़ सकता है।
पहले आवाज, अब चेहरे की बारी
फरवरी 2025 में फ्रांस में एक प्रतिष्ठित मोबाइल कंपनी के वॉइस असिस्टेंट को लेकर शिकायत और जांच का मामला सामने आया था। आरोप था कि वॉइस असिस्टेंट के माध्यम से रिकॉर्ड हुई कुछ बातचीत में यूजर्स की निजी जानकारी शामिल थी। कंपनी ने इन आरोपों से इनकार किया था।
इसके बाद अक्टूबर 2025 में पेरिस अभियोजक कार्यालय में भी डेटा हैंडलिंग को लेकर जांच शुरू हुई। आरोपों में यह भी कहा गया कि वॉइस असिस्टेंट के डेटा बैंक से एक व्यक्ति की रिकॉर्डिंग लीक हुई और कथित तौर पर उसकी आवाज का इस्तेमाल विज्ञापन तैयार करने में किया गया।
AI ने भी माना, पूरी तरह सुरक्षित नहीं है फोटो शेयर करना
AI प्लेटफॉर्म पर फोटो शेयर करने की सुरक्षा को लेकर पूछे जाने पर जवाब में यह स्पष्ट किया गया कि किसी भी AI प्लेटफॉर्म को फोटो साझा करना पूरी तरह सुरक्षित मानना सही नहीं होगा। जोखिम इस बात पर निर्भर करता है कि तस्वीर किस प्लेटफॉर्म पर, किन शर्तों के तहत और किस तरह प्रोसेस की जा रही है।
सिर्फ चेहरे की तस्वीर होना हमेशा बायोमेट्रिक डेटा नहीं माना जाता, लेकिन यदि उसे चेहरे की पहचान के लिए तकनीकी रूप से प्रोसेस करके फेस-प्रिंट या प्रोफाइल तैयार किया जाता है, तो वह संवेदनशील बायोमेट्रिक जानकारी का रूप ले सकती है।
क्या कहते हैं साइबर एक्सपर्ट?
हरिद्वार के सीओ साइबर सुमित पांडे के मुताबिक, AI एक तरह से डेटा स्टोरेज की तरह भी काम करता है। हम जो जानकारी उस पर अपडेट या साझा करते हैं, वह डेटा के रूप में एकत्र हो सकती है। आज मोबाइल से लेकर बैंकिंग सिस्टम तक चेहरे की पहचान, फिंगरप्रिंट और वॉइस ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल हो रहा है। ऐसे में अनजान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या AI प्रॉम्प्ट के जरिए आवाज और चेहरे से जुड़ी जानकारी साझा करना भविष्य में जोखिम पैदा कर सकता है।
नैनीताल के सीओ साइबर अमित कुमार सैनी ने कहा कि ट्रेंड फॉलो करने के चक्कर में लोग अपने चेहरे की पहचान से जुड़ी जानकारी साझा कर रहे हैं। साइबर अपराधी इसका गलत इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके जरिए फर्जी पहचान बनाना, निजी जानकारी हासिल करना या किसी व्यक्ति को ब्लैकमेल करने जैसी कोशिशें की जा सकती हैं।
आपकी फोटो का इस तरह हो सकता है गलत इस्तेमाल
- आपके चेहरे की फोटो से आपके नाम पर फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनाया जा सकता है।
- आपकी तस्वीर को किसी दूसरे वीडियो में लगाकर भ्रामक या आपत्तिजनक कंटेंट तैयार किया जा सकता है।
- चेहरे और आवाज की नकल कर परिचित बनकर पैसे मांगने की कोशिश हो सकती है।
- AI से फोटो में बदलाव कर धमकाने या ब्लैकमेल करने का प्रयास किया जा सकता है।
- आपकी पहचान का इस्तेमाल कर रिश्तेदारों और दोस्तों का भरोसा जीतकर ठगी की जा सकती है।
- फोटो और दूसरी उपलब्ध जानकारियों को जोड़कर आपकी डिजिटल प्रोफाइल तैयार की जा सकती है।
- चेहरे की पहचान से जुड़ी जानकारी का इस्तेमाल पहचान आधारित धोखाधड़ी में किया जा सकता है।
- आपके चेहरे को किसी उत्पाद, बयान या गतिविधि से जोड़कर फर्जी और भ्रामक सामग्री बनाई जा सकती है।
ऐसे में सिर्फ वायरल ट्रेंड का हिस्सा बनने के लिए किसी अनजान AI ऐप या वेबसाइट पर अपनी फोटो अपलोड करने से पहले उसकी प्राइवेसी पॉलिसी और डेटा इस्तेमाल की शर्तों को जरूर जांचें।
