ख़बर रफ़्तार , गैरसैंण : उत्तराखंड की राजनीति में खानपुर से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार के इस्तीफे के बाद हलचल तेज हो गई है। विधानसभा सत्र के दौरान उन्होंने अपनी सदस्यता छोड़ने का फैसला लिया और साफ किया कि वह न तो भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होंगे और न ही कांग्रेस का दामन थामेंगे। उमेश कुमार ने ऐलान किया कि वह आगामी विधानसभा चुनाव जन निर्माण पार्टी के चुनाव चिह्न पर लड़ेंगे। वहीं, पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन ने उनके इस्तीफे को लेकर सवाल उठाए और इसे ‘ड्रामेबाजी’ बताया।
भाजपा-कांग्रेस में जाने से उमेश कुमार का इनकार
विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफे के बाद उमेश कुमार ने अपनी आगे की राजनीतिक रणनीति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उनकी भाजपा या कांग्रेस में शामिल होने की कोई योजना नहीं है। वह अपनी अलग राजनीतिक पहचान के साथ जनता के बीच जाएंगे और जन निर्माण पार्टी के माध्यम से चुनाव लड़ेंगे।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ मुलाकातों को लेकर उठ रही अटकलों पर भी उन्होंने सफाई दी। उमेश कुमार के मुताबिक, राजनीतिक नेताओं से मिलना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। इसका अर्थ यह नहीं है कि वह कांग्रेस में शामिल होने जा रहे हैं।
उन्होंने संकेत दिया कि आगामी विधानसभा चुनाव में वह खुद मैदान में उतरेंगे। ऐसे में जन निर्माण पार्टी के जरिए अपनी राजनीतिक गतिविधियों को आगे बढ़ाना उनकी रणनीति का हिस्सा है।
हरीश रावत के साथ 2016 से राजनीतिक तल्खी का जिक्र
उमेश कुमार ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के साथ अपने पुराने राजनीतिक विवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 से चली आ रही राजनीतिक टीस अब तक खत्म नहीं हुई है।
उमेश कुमार ने कहा कि जिन लोगों पर उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे और जिनकी सरकार को उन्होंने राजनीतिक रूप से चुनौती दी थी, उनके समर्थन में नारे लगाना उनके लिए संभव नहीं है। उनके इस बयान को कांग्रेस में शामिल होने की अटकलों के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है।
विपक्ष पर जनहित के मुद्दों पर साथ नहीं देने का आरोप
उमेश कुमार ने अपने इस्तीफे की वजह बताते हुए विधानसभा में पिछले साढ़े चार वर्षों के अनुभवों का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता से जुड़े मुद्दे उठाने के दौरान उन्हें विपक्ष का अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।
उनके मुताबिक, किसानों की समस्याओं, आपदा प्रभावित लोगों की परेशानियों और बिजली-पानी जैसे बुनियादी मुद्दों पर उन्होंने आवाज उठाई, लेकिन जरूरत के समय विपक्ष उनके साथ मजबूती से खड़ा नहीं हुआ।
उमेश कुमार का कहना है कि उन्होंने कई मुद्दों पर विपक्ष का साथ दिया, लेकिन जब उन्होंने अपने क्षेत्र और जनता से जुड़ी समस्याओं को सदन में उठाया तो उन्हें निराशा हाथ लगी। उन्होंने इसी असंतोष को अपने इस्तीफे की प्रमुख वजहों में शामिल बताया।
विधानसभा अध्यक्ष को मिला इस्तीफे का पत्र
विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी ने उमेश कुमार के इस्तीफे को लेकर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विधायक की ओर से उन्हें एक पत्र प्राप्त हुआ है, जिसमें इस्तीफे की बात कही गई है।
विधानसभा अध्यक्ष के अनुसार, पत्र को आगे की प्रक्रिया के लिए विधानसभा सचिवालय भेज दिया गया है। अब इस्तीफे से संबंधित नियमों और कानूनी प्रावधानों की जांच के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस तरह उमेश कुमार की ओर से इस्तीफे का पत्र दिए जाने की जानकारी सामने आई है, जबकि उसके स्वीकार होने की औपचारिक प्रक्रिया अलग है।
प्रणव सिंह चैंपियन ने इस्तीफे को बताया ‘ड्रामेबाजी’
उमेश कुमार के इस्तीफे के बाद खानपुर के पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने उमेश कुमार के फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे ‘ड्रामेबाजी’ बताया।
चैंपियन ने कहा कि जब विधानसभा के मौजूदा कार्यकाल में केवल करीब दो महीने शेष रह गए हैं, तो ऐसे समय में इस्तीफा देने का क्या औचित्य है। उन्होंने युवाओं की जरूरतों का जिक्र करते हुए कहा कि आज की पीढ़ी को राजनीतिक दिखावे और बयानबाजी के बजाय विकास, रोजगार और बेहतर भविष्य जैसे मुद्दों पर ध्यान देने की जरूरत है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रतिमाओं की स्थापना, मंदिरों और शादी समारोहों जैसे आयोजनों के बजाय युवाओं के भविष्य और रोजगार को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। चैंपियन की यह प्रतिक्रिया उमेश कुमार के इस्तीफे के बाद दोनों नेताओं के बीच जारी राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा है।
जन निर्माण पार्टी के जरिए चुनावी तैयारी
उमेश कुमार के इस्तीफे और जन निर्माण पार्टी के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ने के ऐलान के बाद उनकी आगामी राजनीतिक रणनीति चर्चा में है। उन्होंने भाजपा और कांग्रेस दोनों से दूरी बनाए रखने की बात कही है और अपनी पार्टी के माध्यम से जनता के मुद्दे उठाने का संकेत दिया है।
अब विधानसभा अध्यक्ष और सचिवालय की ओर से इस्तीफे पर होने वाली आगे की कार्रवाई के साथ यह भी महत्वपूर्ण होगा कि उमेश कुमार आगामी चुनाव के लिए जन निर्माण पार्टी के तहत अपनी राजनीतिक गतिविधियों को किस तरह आगे बढ़ाते हैं।
