ख़बर रफ़्तार , श्रीनगर : जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडित राकेश हांडू को अल्पसंख्यक कर्मचारियों और प्रवासी मजदूरों को निशाना बनाकर कथित तौर पर धमकी भरे पोस्टर प्रसारित करने के मामले में गिरफ्तार किया गया है। सोपोर की एक अदालत ने मंगलवार को उन्हें पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। हांडू के वकील अजीम मुश्ताक पंडित ने इसकी जानकारी दी।
पुलिस ने हांडू को 17 अक्टूबर को हरियाणा के फरीदाबाद स्थित उनके घर से गिरफ्तार किया था। यह कार्रवाई बारामूला पुलिस स्टेशन में दर्ज एक मामले के सिलसिले में की गई। मामले में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66F और 84C के तहत आरोप लगाए गए हैं।
रोहित रैना की शिकायत पर दर्ज हुआ मामला
यह मामला कश्मीरी पंडित समुदाय के सदस्य रोहित रैना की शिकायत के बाद दर्ज किया गया। रैना प्रधानमंत्री रोजगार पैकेज के तहत जम्मू-कश्मीर के वित्त विभाग में कार्यरत हैं।
वकील अजीम मुश्ताक पंडित के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि राकेश हांडू द्वारा कथित तौर पर धमकी भरे पोस्टर प्रसारित किए जाने से उन्हें असुरक्षित महसूस हुआ और उनकी सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि हांडू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर ‘सोल्जर ऑफ रेजिस्टेंस, यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल’ से कथित तौर पर जुड़ी आतंक संबंधी इलेक्ट्रॉनिक सामग्री बार-बार साझा की। आरोप है कि मूल सामग्री में बदलाव कर शिकायतकर्ता को झूठे तरीके से निशाने पर दिखाया गया। इन आरोपों की पुष्टि अदालत में होना बाकी है।
साइबर आतंकवाद की धाराओं में कार्रवाई
हांडू के वकील ने बताया कि पुलिस ने उनके मुवक्किल पर साइबर आतंकवाद से संबंधित आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66F के तहत दोष सिद्ध होने पर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है।
अजीम मुश्ताक पंडित ने कहा कि उन्हें धारा 66F के तहत लगाए गए आरोपों की जानकारी मजिस्ट्रेट के सामने जमानत याचिका दायर करने के दौरान मिली। उन्होंने दावा किया कि मामले के तथ्य साइबर आतंकवाद की कानूनी परिभाषा के दायरे में नहीं आते और यह मामला मानहानि से संबंधित हो सकता है।
वकील के मुताबिक, मामला अब नामित अदालत के समक्ष है और बचाव पक्ष की ओर से जमानत याचिका दायर करने की तैयारी की जा रही है। यह पक्ष की दलील है; मामले में आरोपों और कानूनी प्रावधानों की अंतिम व्याख्या अदालत करेगी।
अगस्त में भी प्रसारित हुए थे धमकी भरे पोस्टर
रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त में कश्मीर में प्रधानमंत्री रोजगार पैकेज के तहत कार्यरत कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के खिलाफ सोशल मीडिया पर यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल (ULC) के नाम से धमकी भरे पोस्टर प्रसारित हुए थे। इन पोस्टरों के सामने आने के बाद कर्मचारियों के बीच डर का माहौल बनने की बात कही गई थी।
धमकियों के मद्देनजर सरकार ने संबंधित कर्मचारियों को छुट्टी पर भेज दिया था। राकेश हांडू उन लोगों में शामिल बताए गए हैं, जिन्होंने इन पोस्टरों की जांच कराने और इनके पीछे शामिल लोगों की पहचान करने की मांग की थी।
फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ भी लड़ चुके हैं चुनाव
59 वर्षीय राकेश हांडू वर्ष 2008 में श्रीनगर की हजरतबल विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुके हैं। उस चुनाव में उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ मुकाबला किया था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
फिलहाल, धमकी भरे पोस्टरों के प्रसार से जुड़े मामले में हांडू पुलिस हिरासत में हैं। आगे की कार्रवाई और जमानत पर फैसला संबंधित अदालत के समक्ष होने वाली सुनवाई पर निर्भर करेगा।
