ख़बररफ़्तार , गैरसैंण : उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण में 27 अक्टूबर को विधानसभा सत्र के दौरान विरोध प्रदर्शनों को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गईं। प्रदेश प्रधान संगठन ने अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर विधानसभा घेराव का ऐलान किया, वहीं प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने भी विभिन्न जनहित के मुद्दों पर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन की घोषणा की। दोनों प्रदर्शनों को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की और भराड़ीसैंण क्षेत्र में धारा 163 लागू कर दी।
ग्राम प्रधानों ने पंचायतों के प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों में कथित कटौती का विरोध करते हुए सरकार से लंबित मांगों पर शासनादेश जारी करने की मांग की है। दूसरी ओर, कांग्रेस ने स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, पेयजल, भ्रष्टाचार और अन्य मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी की।
10 सूत्रीय मांगों को लेकर ग्राम प्रधानों का आंदोलन
प्रदेश प्रधान संगठन उत्तराखंड लंबे समय से अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन कर रहा है। संगठन के गैरसैंण ब्लॉक अध्यक्ष मनोज नेगी के अनुसार, इससे पहले देहरादून में सचिवालय कूच के दौरान सरकार की ओर से मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था। हालांकि, उनके मुताबिक काफी समय बीतने के बाद भी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
मनोज नेगी ने कहा कि शासन स्तर पर फाइलें लंबित रहने के कारण प्रदेशभर के ग्राम प्रधानों में नाराजगी है। संगठन का आरोप है कि सरकार उनकी समस्याओं के समाधान को लेकर गंभीरता नहीं दिखा रही है।
प्रधान संगठन ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रखा जाएगा।
पंचायतों के अधिकार सीमित करने का लगाया आरोप
प्रधान संगठन के मुताबिक, आंदोलन का एक प्रमुख कारण ग्राम पंचायतों के प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों में कटौती है। संगठन का आरोप है कि नए पंचायत भवनों के निर्माण, पुनर्निर्माण और सुधारीकरण से जुड़े कार्य ग्राम पंचायतों से लेकर अन्य सरकारी कार्यदायी संस्थाओं को सौंपे जा रहे हैं।
प्रधानों का कहना है कि इस तरह के फैसलों से पंचायतों की भूमिका और स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने इसे पंचायती राज व्यवस्था को कमजोर करने वाला कदम बताते हुए सरकार से इस व्यवस्था की शक्तियों को बनाए रखने की मांग की।
संगठन का कहना है कि ग्राम पंचायतें स्थानीय विकास कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसलिए पंचायतों से जुड़े फैसले लेते समय उनके निर्वाचित प्रतिनिधियों के अधिकारों और जिम्मेदारियों का ध्यान रखा जाना चाहिए।
विधानसभा घेराव के लिए तैयार की गई रूपरेखा
प्रधान संगठन ने आंदोलन को लेकर कार्यक्रम की रूपरेखा भी तैयार की थी। संगठन के अनुसार, 27 अक्टूबर को सुबह 11 बजे ग्राम प्रधानों, ब्लॉक और जिला अध्यक्षों तथा प्रांतीय पदाधिकारियों को गैरसैंण के क्रीड़ा मैदान में एकत्रित होना था।
यहां संक्षिप्त सभा के बाद सभी प्रतिभागियों को रैली के रूप में विधानसभा भराड़ीसैंण की ओर कूच करना था। संगठन ने इस कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों और ब्लॉकों से बड़ी संख्या में ग्राम प्रधानों के शामिल होने की बात कही।
प्रधान संगठन के शीर्ष नेतृत्व ने चेतावनी दी कि यदि उनकी 10 सूत्रीय मांगों पर शासनादेश जारी नहीं किया गया और पंचायतों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों का समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है।
कांग्रेस भी जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरेगी
गैरसैंण विधानसभा सत्र के दौरान प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने भी विधानसभा घेराव का कार्यक्रम घोषित किया। पार्टी ने राज्य के विभिन्न हिस्सों से कार्यकर्ताओं के भराड़ीसैंण पहुंचने का आह्वान किया।
कांग्रेस के अनुसार, प्रदर्शन के प्रमुख मुद्दों में बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं, सड़कों की खराब स्थिति, पेयजल संकट और शिक्षा व्यवस्था शामिल हैं। इसके अलावा पार्टी ने गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने, पेपर लीक प्रकरण, अंकिता भंडारी हत्याकांड, भ्रष्टाचार, अग्निपथ योजना और महिलाओं तथा दलितों के खिलाफ उत्पीड़न के मुद्दे भी उठाने की बात कही।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि विधानसभा सत्र जनता से जुड़े सवालों पर सरकार से जवाब मांगने का अवसर है। पार्टी ने इन मुद्दों पर सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग की।
1 नवंबर को दिल्ली में ‘वोट चोरी’ के खिलाफ प्रदर्शन
कांग्रेस ने विधानसभा घेराव के अलावा 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर प्रदर्शन करने का भी निर्णय लिया है। पार्टी नेताओं ने कार्यकर्ताओं से इस कार्यक्रम में भाग लेने की अपील की है।
इस तरह उत्तराखंड में विधानसभा सत्र के दौरान स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ प्रदेश और राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े विषय भी प्रदर्शन का हिस्सा बनने जा रहे हैं।
भराड़ीसैंण में धारा 163 लागू, सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
विधानसभा सत्र और प्रस्तावित प्रदर्शनों को देखते हुए प्रशासन ने भराड़ीसैंण क्षेत्र में धारा 163 लागू की। पुलिस को शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सतर्क रहने के निर्देश दिए गए।
प्रशासन की ओर से प्रदर्शनों, नारेबाजी और अन्य गतिविधियों के दौरान लागू प्रतिबंधों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।
गैरसैंण में विधानसभा सत्र के दौरान ग्राम प्रधानों और कांग्रेस के विरोध प्रदर्शनों ने पंचायतों के अधिकारों, स्थानीय विकास और प्रदेश के विभिन्न जनहित के मुद्दों को फिर चर्चा में ला दिया है। अब इन मांगों पर सरकार की प्रतिक्रिया और प्रशासन की ओर से प्रदर्शनों के प्रबंधन पर नजर रहेगी।
