खबर रफ्तार, हल्द्वानी : 3 मार्च मंगलवार का दिन बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है। इस दिन अंग्रेजी वर्ष का पहला और सनातन वर्ष का अंतिम चंद्रग्रहण लगने जा रहा है। ””खण्डग्रास”” (आंशिक) अवस्था में होने वाला यह ग्रहण भारत के अलावा पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और प्रशांत महासागर के क्षेत्रों में दिखाई देगा, जिसका व्यापक असर वैश्विक स्तर पर महसूस किया जाएगा।
ज्योतिषी अशोक वार्ष्णेय के अनुसार इस चंद्रग्रहण का पृथ्वी पर सकारात्मक प्रभाव कम और नकारात्मक असर अधिक दिखाई दे रहा है। ग्रहण के समय से लेकर अगले 15 दिनों तक विश्व के कई राष्ट्र युद्ध की विभीषिका में उलझ सकते हैं। राष्ट्रों के बीच एक-दूसरे को नीचा दिखाने की होड़, सीमाओं पर तनाव, अर्थव्यवस्था में गिरावट और राजनीतिक उथल-पुथल की प्रबल संभावना है। साथ ही, भूगर्भीय (भूकंप आदि) और आकाशीय घटनाएं भी समाज को प्रभावित कर सकती हैं। ग्रहण सिंह राशि और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में घटित हो रहा है। ज्योतिषीय गणना बताती है कि चंद्रमा पर सूर्य, बुध और मंगल की दृष्टि होने से अग्नि तत्व की प्रधानता बढ़ेगी। जिससे कई देशों की राजनीतिक स्थिरता डगमगा सकती है।

+ There are no comments
Add yours