ख़बर रफ़्तार, नई दिल्ली : supreme-court ने सोमवार को मद्रास हाई कोर्ट के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी, जिसमें तमिलनाडु में बकरीद समेत किसी भी दिन और किसी भी स्थान पर गाय एवं बछड़ों के वध पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया गया था। यह मामला न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया, जहां तमिलनाडु सरकार ने हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए कहा कि हाई कोर्ट के आदेश के अंतिम हिस्से में प्रथम दृष्टया सुधार की आवश्यकता प्रतीत होती है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने अगले आदेश तक हाई कोर्ट के निर्देशों के प्रभाव पर रोक लगा दी।
राज्य सरकार ने कहा- हाई कोर्ट ने याचिका की सीमा से आगे जाकर दिया फैसला
तमिलनाडु सरकार ने अपनी याचिका में दलील दी कि मूल जनहित याचिका केवल सार्वजनिक स्थानों पर अवैध गोवध रोकने तक सीमित थी। याचिकाकर्ता ने यह मांग की थी कि पशुओं का वध केवल निर्धारित और अधिकृत बूचड़खानों में ही कराया जाए।
सरकार का कहना है कि इसके बावजूद हाई कोर्ट ने पूरे राज्य में गाय और बछड़ों के वध पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया, जबकि ऐसी कोई राहत याचिका में मांगी ही नहीं गई थी। राज्य सरकार ने यह भी तर्क दिया कि तमिलनाडु का मौजूदा कानून गोवध पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं बल्कि उसके नियमन का प्रावधान करता है। ऐसे में हाई कोर्ट का आदेश कानून की नई व्याख्या करने और उसे बदलने जैसा है।
बकरीद से पहले आया था हाई कोर्ट का फैसला
मद्रास हाई कोर्ट की खंडपीठ ने 27 मई को, बकरीद से एक दिन पहले, हिंदू मक्कल काची के महासचिव के. सूर्य प्रशांत द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया था। अदालत ने अपने फैसले में राज्य सरकार के एक आदेश और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा था कि बकरीद मनाने के लिए गोहत्या कोई अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं है।
हालांकि अब सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए मामले की आगे सुनवाई का रास्ता खोल दिया है। शीर्ष अदालत के अंतिम फैसले के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि तमिलनाडु में गोवध को लेकर कानूनी स्थिति क्या रहेगी।

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