ख़बर रफ़्तार, हरिद्वार : Kangana रनौत और योग गुरु स्वामी रामदेव के बीच चल रही जुबानी जंग एक बार फिर चर्चा में है। मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए रामदेव ने बिना नाम लिए कंगना पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वह विवाद को आगे नहीं बढ़ाना चाहते और ऐसे लोगों पर टिप्पणी करना उचित नहीं समझते। रामदेव ने कहा कि उनका योगदान और उनकी भूमिका देश जानता है, इसलिए वह किसी तरह के विवाद में पड़ना नहीं चाहते।
दरअसल, कुछ दिन पहले स्वामी रामदेव ने सरकारी नौकरियों के इंटरव्यू और भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने इस मुद्दे पर आंदोलन की चेतावनी भी दी थी। इसके बाद कंगना रनौत ने रामदेव के बयान पर तंज कसते हुए प्रतिक्रिया दी थी। इसी के बाद दोनों के बीच बयानबाजी शुरू हो गई।
‘वंदे मातरम’ के अर्थ पर रामदेव की सफाई
इसी दौरान स्वामी रामदेव ने ‘वंदे मातरम’ के अर्थ और इसके महत्व को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ का अर्थ भारत माता को नमन करना है। उनके मुताबिक, इसका संबंध किसी विशेष देवी-देवता, मंदिर या मठ की पूजा से नहीं है।
रामदेव ने कहा कि भारत माता ही देशवासियों के लिए दुर्गा, लक्ष्मी, विद्या और धर्म का स्वरूप हैं। उन्होंने कहा कि भारत माता को अलग-अलग उपमाओं से सम्मानित करना राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना है, इसे किसी विशेष धार्मिक पूजा से जोड़ना सही नहीं है।
सामाजिक एकता और भेदभाव पर भी बोले रामदेव
स्वामी रामदेव ने सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाज के किसी भी वर्ग के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। छात्रों, मरीजों, जवानों, किसानों, अनुसूचित जाति-जनजाति और ब्राह्मणों समेत हर वर्ग के सम्मान की बात करते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति या समुदाय का अपमान संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
रामदेव ने संन्यासियों को लेकर की जाने वाली अभद्र टिप्पणियों पर भी चिंता जताई और कहा कि समाज में आपसी सम्मान और सद्भाव बनाए रखना जरूरी है।
