ख़बर रफ़्तार, देहरादून : Uttarakhand को IT और Artificial Intelligence के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में राज्य सरकार एक बड़ी पहल करने जा रही है। प्रदेश में पहली बार राष्ट्रीय स्तर के ‘देवभूमि AI समिट’ का आयोजन किया जाएगा। यह समिट 9 अक्टूबर को देहरादून में आयोजित होगा, जिसमें देशभर से AI स्टार्टअप, टेक कंपनियों के प्रतिनिधि, इंडस्ट्री लीडर, सॉफ्टवेयर इंजीनियर, इनोवेटर्स और छात्र शामिल होंगे।
इस आयोजन का मकसद केवल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल पर चर्चा करना नहीं है, बल्कि उत्तराखंड में एक मजबूत AI और टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम तैयार करना है। सरकार की कोशिश है कि प्रदेश के युवा केवल बाहर विकसित तकनीकों का इस्तेमाल न करें, बल्कि खुद नए AI आधारित समाधान तैयार करें।
AI के क्षेत्र में नई पहचान बनाने की तैयारी
देवभूमि AI समिट का आयोजन उत्तराखंड के IT विभाग और ITDA के सहयोग से Axocom की ओर से किया जा रहा है। आयोजक और Axocom के सदस्य प्रणव पांडे के मुताबिक, उत्तराखंड को AI के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए सरकार, तकनीकी विशेषज्ञों, स्टार्टअप और युवाओं के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।
उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य के तहत समिट के साथ उत्तराखंड इनोवेशन एंड सॉल्यूशंस हैकाथॉन भी आयोजित किया जाएगा। इसमें छात्र, इनोवेटर्स, इंडस्ट्री प्रोफेशनल्स और सरकारी विभाग एक मंच पर आएंगे और प्रदेश की वास्तविक समस्याओं के तकनीकी समाधान तलाशने की कोशिश करेंगे।
सरकारी सेवाओं से लेकर आपदा प्रबंधन तक AI का इस्तेमाल
समिट में उत्तराखंड के संदर्भ में AI की संभावनाओं और भविष्य के इस्तेमाल पर चर्चा होगी। खासतौर पर सरकारी सेवाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में AI के उपयोग पर फोकस रहेगा।
आयोजकों का मानना है कि उत्तराखंड में प्रतिभाशाली युवाओं की कमी नहीं है। जरूरत ऐसे मंच की है, जहां प्रदेश की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और वैश्विक टेक इंडस्ट्री से जुड़ने का अवसर मिल सके।
90 दिन का हैकाथॉन होगा खास आकर्षण
देवभूमि AI समिट की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी 90 दिन का हैकाथॉन होगा। इसकी खास बात यह है कि प्रतिभागियों को काल्पनिक समस्याओं के बजाय सीधे सरकारी विभागों की वास्तविक चुनौतियों पर काम करने का मौका मिलेगा।
आयोजकों के मुताबिक, करीब एक दर्जन सरकारी विभाग अपनी ऐसी समस्याएं सामने रख चुके हैं, जिनके लिए वे AI आधारित समाधान चाहते हैं। कॉलेजों और स्टार्टअप्स को भी इस पहल से जोड़ा जा रहा है।
उदाहरण के तौर पर ITDA की ओर से ऐसा AI चैटबॉट विकसित करने की जरूरत बताई गई है, जिसके जरिए लोगों को सरकारी योजनाओं, दस्तावेजों और दूसरी जरूरी सूचनाओं की जानकारी आसानी से मिल सके।
अगर किसी प्रतिभागी या स्टार्टअप का समाधान संबंधित विभाग को उपयोगी लगता है तो उसे आगे विकसित करने के लिए सरकार की ओर से फंडिंग और अन्य जरूरी सहयोग दिए जाने की संभावना है।
डेटा सेंटर और कनेक्टिविटी पर भी सरकार का फोकस
IT मंत्री प्रदीप बत्रा के मुताबिक, आने वाला समय AI और आधुनिक तकनीक का है। सरकार का लक्ष्य है कि आध्यात्मिक पहचान के साथ उत्तराखंड डिजिटल और AI के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बनाए।
उन्होंने कहा कि देहरादून और रुड़की जैसे शहर पहले से ही शिक्षा और तकनीकी प्रतिभाओं के बड़े केंद्र हैं। प्रदेश के कई युवा देश-विदेश में IT और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। ऐसे आयोजनों के जरिए उन्हें बड़ी टेक कंपनियों और वैश्विक इंडस्ट्री से जोड़ने का अवसर मिलेगा।
हालांकि, पहाड़ी भौगोलिक परिस्थितियों के चलते नेटवर्क और इंटरनेट कनेक्टिविटी अभी भी चुनौती बनी हुई है। सरकार इस दिशा में भी काम कर रही है। इसके साथ ही प्रदेश में नए डेटा सेंटर की स्थापना की तैयारी भी चल रही है।
कुल मिलाकर, 9 अक्टूबर को होने वाला देवभूमि AI समिट उत्तराखंड में AI, IT और इनोवेशन को बढ़ावा देने की दिशा में अहम पहल माना जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि आने वाले समय में उत्तराखंड को केवल पर्यटन और आध्यात्मिक पहचान के लिए ही नहीं, बल्कि AI और टेक्नोलॉजी के नए हब के रूप में भी स्थापित किया जा सके।
