ख़बर रफ़्तार, देहरादून : Uttrakhand में सड़क हादसों पर लगाम लगाने के तमाम प्रयासों के बावजूद दुर्घटनाओं का आंकड़ा चिंता बढ़ा रहा है। वर्ष 2026 में जुलाई तक प्रदेश में 1272 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं। इन हादसों में 775 लोगों की मौत हुई, जबकि 1341 लोग घायल हुए हैं। वर्ष 2019 से अब तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो सड़क हादसों में जान गंवाने वालों की संख्या लगातार गंभीर बनी हुई है।
परिवहन विभाग के मुताबिक, प्रदेशभर में 2559 दुर्घटना संभावित क्षेत्र चिन्हित किए गए हैं। इनमें से 2140 स्थानों पर सुधार कार्य पूरा किया जा चुका है, जबकि 419 स्थानों पर अभी सुधार किया जाना बाकी है। इसके बावजूद सड़क हादसों में कमी नहीं आना सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।
मोहब्बेवाला बना नया दुर्घटना हॉटस्पॉट
राजधानी देहरादून का मोहब्बेवाला क्षेत्र हाल के महीनों में सड़क हादसों को लेकर चर्चा में है। बीते 9 महीनों में यहां 9 बड़े हादसे हो चुके हैं। इन घटनाओं में दो लोगों की मौत हुई है, जबकि कई लोग घायल हुए हैं।
लगातार हादसों के बावजूद क्षेत्र में सड़क सुरक्षा को लेकर स्थायी सुधार की जरूरत महसूस की जा रही है। मोहब्बेवाला में हादसों की बढ़ती संख्या ने दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की निगरानी और सुधार कार्यों की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े किए हैं।
किस विभाग की सड़कों पर कितने दुर्घटना संभावित क्षेत्र?
प्रदेश में चिन्हित 2559 दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में सबसे ज्यादा 1761 स्थान लोक निर्माण विभाग की सड़कों पर हैं। इसके अलावा नेशनल हाईवे पर 496, एनएचएआई की सड़कों पर 97, बीआरओ की सड़कों पर 9 और पीएमजीएसवाई की सड़कों पर 114 दुर्घटना संभावित क्षेत्र चिन्हित किए गए हैं।
प्रदेश में 179 ब्लैक स्पॉट चिन्हित
2559 दुर्घटना संभावित क्षेत्रों के अलावा परिवहन विभाग ने प्रदेश में 179 ब्लैक स्पॉट भी चिन्हित किए हैं। इनमें से 169 ब्लैक स्पॉट पर सुधार कार्य पूरा हो चुका है, जबकि 10 स्थानों पर काम अभी जारी है।
सुधार कार्य के बावजूद हादसों की संख्या कम नहीं होने के कारण अब इन स्थानों की प्रभावशीलता की जांच पर जोर दिया जा रहा है।
40 ब्लैक स्पॉट का होगा थर्ड पार्टी ऑडिट
परिवहन विभाग ने 179 चिन्हित ब्लैक स्पॉट में से 40 स्थानों का थर्ड पार्टी ऑडिट कराने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि सुधार कार्य होने के बाद भी इन क्षेत्रों में सड़क हादसे क्यों हो रहे हैं।
ऑडिट के जरिए सड़क की डिजाइन, यातायात व्यवस्था, साइन बोर्ड, स्पीड कंट्रोल, ब्लैक स्पॉट की वास्तविक स्थिति और अन्य संभावित कारणों की समीक्षा की जा सकती है। इसके बाद सामने आने वाले निष्कर्षों के आधार पर सड़क सुरक्षा उपायों को और प्रभावी बनाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
फिलहाल बढ़ते सड़क हादसे और बड़ी संख्या में दुर्घटना संभावित क्षेत्रों का बने रहना उत्तराखंड में सड़क सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

+ There are no comments
Add yours