Uttrakhand में कमजोर पड़ने लगा मानसून, 21 सितंबर तक बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान

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ख़बर रफ़्तार, देहरादून: उत्तराखंड में मानसून अब धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगा है। मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून ने 21 सितंबर तक प्रदेश के मौसम को लेकर पूर्वानुमान जारी किया है। इसके मुताबिक अगले कुछ दिनों तक राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का सिलसिला बना रहेगा, लेकिन मानसून की सक्रियता में धीरे-धीरे कमी आने की संभावना है। आमतौर पर 15 सितंबर के बाद उत्तराखंड में मानसून कमजोर होने लगता है और सितंबर के अंतिम दिनों में इसकी विदाई की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।

15 सितंबर को कई जगह बारिश के आसार

मौसम विभाग के अनुसार मंगलवार 15 सितंबर को उत्तराखंड के कुछ जिलों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। पर्वतीय क्षेत्रों में कहीं-कहीं गरज के साथ तेज से बहुत तेज बारिश का दौर देखने को मिल सकता है। इसे देखते हुए मौसम विभाग ने येलो अलर्ट भी जारी किया है। कुछ इलाकों में आकाशीय बिजली चमकने और गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना जताई गई है।

16 सितंबर को भी पर्वतीय इलाकों में तेज बारिश संभव

बुधवार 16 सितंबर को प्रदेश के सभी जिलों में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान है। खासतौर पर पर्वतीय जिलों में कहीं-कहीं बारिश तेज से बहुत तेज हो सकती है। इस दौरान गरज-चमक के साथ बिजली चमकने की भी संभावना रहेगी।

17 सितंबर को विदाई से पहले मानसून दिखाएगा असर

गुरुवार 17 सितंबर को मानसून एक बार फिर कुछ सक्रिय नजर आ सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक पर्वतीय जिलों में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। वहीं मैदानी क्षेत्रों के हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर जिलों में भी कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।

18 से 21 सितंबर तक बना रहेगा बारिश का सिलसिला

18 सितंबर से 21 सितंबर के बीच भी प्रदेश में मौसम पूरी तरह साफ रहने के आसार नहीं हैं। शुक्रवार 18 सितंबर को सभी जिलों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। 19 सितंबर को भी कई इलाकों में इसी तरह का मौसम रहने का अनुमान है। इसके बाद 20 और 21 सितंबर को बारिश की गतिविधियां और कमजोर हो सकती हैं, हालांकि सभी जिलों में कहीं-कहीं बहुत हल्की से हल्की बारिश जारी रहने की संभावना है।

कुल मिलाकर उत्तराखंड में मानसून अब कमजोर पड़ने की दिशा में है, लेकिन अगले एक सप्ताह तक बारिश से पूरी तरह राहत मिलने की संभावना नहीं है। खासकर पर्वतीय इलाकों में तेज बारिश और गरज-चमक को लेकर लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।

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