Bjp 2027 में खेलेगी बड़ा सियासी दांव!13 आरक्षित के साथ 2 सामान्य सीटों पर SC प्रत्याशी उतारने की तैयारी?

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ख़बर रफ़्तार, देहरादून: Uttrakhand में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने अभी से अपनी चुनावी रणनीति पर मंथन शुरू कर दिया है। पार्टी के भीतर अनुसूचित जाति समाज को साधने के लिए प्रतिनिधित्व बढ़ाने की संभावित रणनीति पर चर्चा होने की बात सामने आ रही है। माना जा रहा है कि भाजपा प्रदेश की 13 आरक्षित विधानसभा सीटों के अलावा दो सामान्य सीटों पर भी अनुसूचित जाति वर्ग से प्रत्याशी उतारने पर विचार कर सकती है।

अगर यह रणनीति अमल में आती है तो आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा की ओर से अनुसूचित जाति वर्ग से कुल 15 उम्मीदवार मैदान में उतारे जा सकते हैं। हालांकि, यह अभी पार्टी के स्तर पर चल रहा विचार बताया जा रहा है और अंतिम फैसला चुनावी समीकरणों और संगठन की रणनीति के आधार पर होगा।

2022 में 13 आरक्षित सीटों में BJP को मिली थीं 9 सीटें

उत्तराखंड विधानसभा में अनुसूचित जाति के लिए कुल 13 सीटें आरक्षित हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इनमें से 9 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि चार सीटें कांग्रेस के खाते में गई थीं।

इससे पहले 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन और मजबूत रहा था। उस चुनाव में पार्टी ने 13 में से 11 आरक्षित सीटों पर जीत हासिल की थी। ऐसे में भाजपा की कोशिश आगामी चुनाव में एक बार फिर एससी आरक्षित सीटों पर अपनी स्थिति मजबूत करने की बताई जा रही है।

शुद्धिकरण विवाद के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल

हल्द्वानी के शुद्धिकरण प्रकरण को लेकर जिस तरह से राजनीतिक बयानबाजी तेज हुई है, उसके बाद भाजपा संगठन भी इस पूरे मामले को गंभीरता से देख रहा है। पार्टी की कोर कमेटी की बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की ओर से इस मुद्दे पर चर्चा किए जाने की बात भी सामने आई है।

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, भाजपा इस विवाद के जरिए अनुसूचित जाति समाज के बीच अपनी स्थिति और मजबूत करने की संभावनाओं पर भी नजर रख रही है। इसी क्रम में सामान्य वर्ग की कुछ सीटों पर एससी समाज से आने वाले मजबूत चेहरों को मौका देने की संभावित रणनीति पर विचार किया जा सकता है।

हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर पर BJP की नजर

2022 के चुनाव परिणामों में हरिद्वार जिले की तीनों अनुसूचित जाति आरक्षित सीटों पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। वहीं, ऊधमसिंह नगर की बाजपुर विधानसभा सीट भी कांग्रेस के खाते में गई थी।

इन नतीजों को देखते हुए भाजपा के लिए आगामी चुनाव में इन क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करना अहम माना जा रहा है। पार्टी की रणनीति केवल आरक्षित सीटों तक सीमित रखने के बजाय एससी समाज के प्रभाव वाले सामान्य सीटों पर भी राजनीतिक समीकरण साधने की हो सकती है।

18.76 फीसदी है अनुसूचित जाति की आबादी

2011 की जनगणना के अनुसार उत्तराखंड की कुल आबादी 1,00,86,292 थी। इसमें अनुसूचित जाति की आबादी 18,92,516 दर्ज की गई थी, जो कुल आबादी का करीब 18.76 प्रतिशत है।

प्रदेश की राजनीति में अनुसूचित जाति समाज की यह आबादी चुनावी समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती है। यही वजह है कि विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और कांग्रेस दोनों ही इस वर्ग के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश करती हैं।

कांग्रेस के लिए भी चुनौती बढ़ा सकता है BJP का प्लान

अगर भाजपा सामान्य सीटों पर भी अनुसूचित जाति वर्ग के उम्मीदवारों को मैदान में उतारने का फैसला करती है, तो इसका सीधा असर कांग्रेस की रणनीति पर पड़ सकता है। कांग्रेस के सामने आरक्षित सीटों पर अपनी मौजूदा पकड़ बनाए रखने के साथ-साथ एससी वोट बैंक में भाजपा की संभावित सेंध को रोकने की चुनौती होगी।

हालांकि, भाजपा की ओर से इस संभावित रणनीति को लेकर अभी कोई अंतिम आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में अब नजर इस बात पर रहेगी कि पार्टी आगामी चुनाव के लिए उम्मीदवार चयन में इस फॉर्मूले को कितना महत्व देती है।

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