ख़बर रफ़्तार, देहरादून : Road Safety प्रदेश में सड़क सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए जिलों में रोड सेफ्टी कोऑर्डिनेटर तैनात किए जाने की तैयारी है। परिवहन मुख्यालय ने इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेजा है। इन समन्वयकों की जिम्मेदारी सड़क हादसों में घायलों को इलाज की सुविधा दिलाने के साथ-साथ सड़क सुरक्षा से जुड़े कार्यों को बेहतर तरीके से लागू कराने की होगी।
फरवरी से सड़क दुर्घटनाओं में घायलों के इलाज के लिए पीएम राहत योजना शुरू की गई है, लेकिन अब तक राज्य में सिर्फ सात लोग ही इसका लाभ उठा सके हैं। योजना का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए जिलों में रोड सेफ्टी कोऑर्डिनेटर की तैनाती की तैयारी की जा रही है।
कोऑर्डिनेटर हादसों में घायल लोगों को योजना के तहत उपचार दिलाने में मदद करेंगे। इसके अलावा हिट एंड रन मामलों में पीड़ितों को मुआवजा दिलाने और पुलिस, परिवहन सहित अन्य संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की जिम्मेदारी भी इनके पास होगी।
सड़क सुरक्षा कोष में बढ़ेगी चालान राशि की हिस्सेदारी
सड़क सुरक्षा कोष को मजबूत करने के लिए भी बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। वर्तमान में पुलिस और परिवहन विभाग द्वारा नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों से वसूली गई चालान राशि का 30 प्रतिशत सड़क सुरक्षा कोष में जमा किया जाता है। अब इस हिस्सेदारी को बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
हिस्सेदारी बढ़ने से सड़क सुरक्षा से जुड़े कार्यों के लिए कोष में अधिक धन उपलब्ध होगा। परिवहन विभाग के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति की ओर से भी सड़क सुरक्षा कोष में राशि बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। इसी के तहत यह प्रस्ताव तैयार किया गया है।
अपर परिवहन आयुक्त सनत कुमार सिंह के अनुसार, जिलों में रोड सेफ्टी कोऑर्डिनेटर की तैनाती और चालान राशि की हिस्सेदारी बढ़ाने से संबंधित प्रस्ताव शासन को भेजे जा चुके हैं।

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