ख़बर रफ़्तार, नई दिल्ली : Parliament Monsoon सत्र का पांचवां दिन भी हंगामे की भेंट चढ़ गया। NEET पेपर लीक विवाद को लेकर विपक्ष ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तेज कर दी। शुक्रवार सुबह इंडिया गठबंधन के सांसदों ने संसद के मकर द्वार पर प्रदर्शन करते हुए कहा कि जब तक शिक्षा मंत्री पद नहीं छोड़ते, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही सोमवार सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी गई, जबकि राज्यसभा की कार्यवाही भी निर्धारित समय तक नहीं चल सकी। विपक्षी सांसद लगातार नारेबाजी करते रहे और सरकार से राजनीतिक जवाबदेही तय करने की मांग करते रहे।
समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने कहा कि सरकार छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की भूमिका की समीक्षा होनी चाहिए और नैतिक आधार पर शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए। कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने भी प्रधानमंत्री से शिक्षा मंत्री को पद से हटाने की मांग की और कहा कि यही देशभर के छात्रों की प्रमुख मांग है।
वहीं सरकार की ओर से केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार NEET मुद्दे पर संसद में चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री पहले ही छात्रों को भरोसा दिला चुके हैं और हाल ही में सोनम वांगचुक ने भी भूख हड़ताल समाप्त करते हुए संसद में इस मुद्दे पर चर्चा की उम्मीद जताई थी। सरकार का कहना है कि बहस से ही समाधान निकलेगा।
केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन (ललन) सिंह और गिरिराज सिंह ने विपक्ष पर छात्रों के मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार, सख्त कानून और फास्ट-ट्रैक कोर्ट जैसी पहल की घोषणा की है तथा दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
दूसरी ओर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आरजेडी, सीपीआई (एम) और अन्य विपक्षी दलों ने सरकार पर जवाबदेही से बचने का आरोप लगाया। विपक्ष का कहना है कि केवल चर्चा नहीं, बल्कि जिम्मेदारी तय होना भी जरूरी है। इसी मुद्दे पर संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक टकराव लगातार जारी है।
