ख़बररफ़्तार , अल्मोड़ा : उत्तराखंड के अल्मोड़ा निवासी रवि टम्टा अपनी एक सीट वाली इलेक्ट्रिक फ्लाइंग कार के प्रोटोटाइप को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने अपने स्टार्टअप हैपिडा स्काई प्राइवेट लिमिटेड के तहत ‘हैपिडा स्काईनेक्स’ नाम से इलेक्ट्रिक फ्लाइंग कार तैयार की है। रवि इस प्रोटोटाइप का ट्रायल भी कर रहे हैं। उनका उद्देश्य इस तकनीक को आगे विकसित करना और भविष्य में इसके नए संस्करण तैयार करना है।
पेट्रोल-डीजल नहीं, बिजली से चलेगी फ्लाइंग कार
रवि टम्टा की बनाई गई फ्लाइंग कार की खासियत यह है कि इसे उड़ाने के लिए पेट्रोल या डीजल की जरूरत नहीं होती। यह पूरी तरह बिजली पर निर्भर है। इसकी उड़ान की प्रक्रिया हेलीकॉप्टर जैसी बताई जा रही है। यानी इसमें जमीन से सीधे ऊपर उठने और वापस नीचे उतरने की क्षमता है।
दो महीने से चल रहा ट्रायल
रवि टम्टा पिछले दो महीने से नियमित रूप से अपनी इलेक्ट्रिक फ्लाइंग कार का ट्रायल कर रहे हैं। इस दौरान अलग-अलग परिस्थितियों में इसके प्रदर्शन और क्षमता का परीक्षण किया जा रहा है। प्रोटोटाइप के ट्रायल के जरिए इसकी तकनीक को समझने और आगे सुधार की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है।
नए संस्करण पर भी काम कर रहे हैं रवि
अपने इनोवेशन और भविष्य की योजनाओं को लेकर रवि टम्टा ने ईटीवी भारत से बातचीत की। उनका कहना है कि उनका लक्ष्य सिर्फ एक सीट वाली फ्लाइंग कार बनाने तक सीमित नहीं है। वह इसके नए संस्करण पर भी काम कर रहे हैं, ताकि इस तकनीक को आगे बढ़ाया जा सके।
इनोवेटर्स को बेहतर मंच मिलने की जरूरत
रवि टम्टा का मानना है कि सीमित संसाधनों के साथ काम करने वाले इनोवेटर्स को भी अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए बेहतर मंच मिलना चाहिए। उनके मुताबिक, सही अवसर, आर्थिक सहायता और तकनीकी सहयोग मिलने पर इनोवेटर्स अपने विचारों को वास्तविक उत्पाद में बदल सकते हैं।
अल्मोड़ा के रवि टम्टा का यह प्रयास दिखाता है कि छोटे शहरों और सीमित संसाधनों के बीच भी नई तकनीक पर काम किया जा सकता है। हालांकि, इस तरह की फ्लाइंग कार को व्यावहारिक इस्तेमाल में लाने के लिए इसके तकनीकी परीक्षण, सुरक्षा मानकों और जरूरी अनुमतियों का पूरा होना अहम होगा।
