खबर रफ़्तार, पाकिस्तान: Uttarakhand जांच एजेंसियों के अनुसार संदिग्धों का उद्देश्य सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को प्रभावित कर एक नेटवर्क तैयार करना था। पूछताछ में कुछ विदेशी हैंडलरों और संदिग्ध व्यक्तियों के नाम भी सामने आए हैं, जिनकी भूमिका की जांच की जा रही है।
सुरक्षा एजेंसियों की जांच में यह भी सामने आया है कि देहरादून से गिरफ्तार एक संदिग्ध विक्रांत कथित तौर पर शहर की दीवारों पर तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान (टीटीएच) का नाम लिखकर संगठन का प्रचार कर रहा था। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि उसके संपर्क में और कौन-कौन लोग थे तथा इस गतिविधि का दायरा कितना व्यापक था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तराखंड एसटीएफ समेत अन्य केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर निगरानी बढ़ा दी है। कई अन्य संदिग्ध युवक भी एजेंसियों के रडार पर हैं और उनकी गतिविधियों की गहन जांच की जा रही ह
एसटीएफ के एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि सोशल मीडिया के माध्यम से राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में वृद्धि देखी जा रही है। उन्होंने कहा कि आतंकी संगठन युवाओं को गुमराह कर कट्टरपंथी गतिविधियों में शामिल करने का प्रयास करते हैं। जांच में एक ऐसा मॉड्यूल सामने आया है जो सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को जोड़ने का काम कर रहा था। उन्होंने बताया कि कुछ मामलों में युवाओं से ऐसे स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए, जहां से विदेशी हैंडलर निगरानी कर सकते थे।एसएसपी ने कहा कि ट्रांस-बॉर्डर ऑनलाइन गतिविधियों में बढ़ोतरी को देखते हुए निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया गया है तथा साइबर कमांडो तैनात किए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियां मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने का प्रयास जारी है।

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