आईएमए को दुनिया की प्रतिष्ठित सैन्य प्रशिक्षण संस्थाओं में गिना जाता है। यहां विदेशी कैडेट भारतीय कैडेटों के साथ कठोर सैन्य अभ्यास, नेतृत्व विकास और आधुनिक युद्धक रणनीतियों का प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल सैनिक तैयार करना नहीं, बल्कि ऐसे सैन्य नेतृत्व का निर्माण करना है जो चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में प्रभावी निर्णय ले सके।
परेड के दौरान बांग्लादेश के ऑफिसर कैडेट जैफ सादिद अल्वी को ‘बेस्ट फॉरेन कैडेट’ के सम्मान से नवाजा गया। उन्होंने इस उपलब्धि को अपने लिए सम्मान और गर्व का विषय बताते हुए कहा कि आईएमए में मिला प्रशिक्षण और विभिन्न देशों के कैडेटों के साथ अनुभव उनके सैन्य जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने भारत और बांग्लादेश के बीच मित्रतापूर्ण संबंधों को और मजबूत होने की उम्मीद भी जताई।
कैमरून के युवा अधिकारी इच्छू ने कहा कि आईएमए में मिला प्रशिक्षण उनके देश के सामने मौजूद सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में उपयोगी साबित होगा। उन्होंने बताया कि कैमरून लंबे समय से आतंकी संगठन बोको हराम की गतिविधियों से प्रभावित रहा है और ऐसे में आधुनिक सैन्य प्रशिक्षण आतंकवाद विरोधी अभियानों को और प्रभावी बनाएगा।
वहीं सूडान के कैडेट अलताहिर ने कहा कि उनका देश वर्षों से संघर्ष और अस्थिरता के दौर से गुजरता रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आईएमए में अर्जित ज्ञान और नेतृत्व क्षमता उन्हें अपने देश में शांति और स्थिरता स्थापित करने के प्रयासों में बेहतर योगदान देने में मदद करेगी।
केन्या के कैडेट कालिंगे ने भी अकादमी में बिताए समय को अपने जीवन का महत्वपूर्ण अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि उनके देश को बाहरी और आंतरिक दोनों प्रकार की सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। आईएमए में प्राप्त सैन्य नेतृत्व, रणनीति और युद्ध कौशल का प्रशिक्षण इन चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने में सहायक होगा।
आईएमए की यह पासिंग आउट परेड एक बार फिर भारत की सैन्य प्रशिक्षण क्षमता और अंतरराष्ट्रीय रक्षा सहयोग की मजबूत परंपरा को दर्शाती है। यहां प्रशिक्षित विदेशी अधिकारी भविष्य में अपने-अपने देशों की सेनाओं में नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा को मजबूत करने में योगदान देंगे

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