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Tuesday, April 23, 2024
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पहाड़ के 20 विधानसभा क्षेत्रों में मत प्रतिशत बढ़ाना चुनौती, पांच ऐसे जहां मतदान का प्रतिशत 50 से भी कम

ख़बर रफ़्तार, देहरादून: निर्वाचन आयोग ने इस लोकसभा चुनाव में उत्तराखंड से 75 प्रतिशत मतदान का लक्ष्य रखा है। हालांकि, इसके लिए आयोग को राज्य के 23 विधानसभा क्षेत्रों में अच्छी-खासी मेहनत करनी पड़ेगी।

इनमें विशुद्ध पर्वतीय 20 विधानसभा क्षेत्रों में पिछले विधानसभा चुनाव में 60 प्रतिशत से भी कम मतदान हुआ। पांच विधानसभा क्षेत्र तो ऐसे हैं, जहां मतदान का प्रतिशत 50 या उससे भी कम रहा। जाहिर है ऐसे क्षेत्रों में मतदान का तय लक्ष्य हासिल करना किसी चुनौती से कम नहीं होगा। इसी के मद्देनजर निर्वाचन आयोग की टीम इन दिनों प्रदेशभर में ऐसे पोलिंग बूथ और गांवों में घूम-घूमकर लोगों को मतदान के लिए जागरूक कर रही है, जहां पिछले विधानसभा चुनाव में कम मतदान हुआ।
उत्तराखंड में पांच संसदीय सीट हैं और प्रत्येक में 14-14 विधानसभा क्षेत्र आते हैं। राज्य गठन के बाद से अब तक यहां लोकसभा के चार, विधानसभा के पांच चुनाव हो चुके हैं और मतदान को लेकर लगातार जागरूकता भी बढ़ी है। बावजूद इसके उत्तराखंड लोकसभा चुनावों में मतदान के मामले में राष्ट्रीय औसत से पीछे ही रहा। इसकी प्रमुख वजह पर्वतीय विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं का मतदान में कम उत्साह दिखाना है।

बात वर्ष 2022 में हुए विधानसभा चुनाव की करें तो प्रदेश में 23 विधानसभा क्षेत्र ऐसे थे, जहां 60 प्रतिशत से कम मतदाताओं ने मताधिकार का प्रयोग किया। इनमें सर्वाधिक आठ-आठ विधानसभा क्षेत्र गढ़वाल और अल्मोड़ा संसदीय सीट के अंतर्गत आते हैं। टिहरी गढ़वाल संसदीय सीट में भी पांच ऐसे विधानसभा क्षेत्र हैं।

साफ है कि आयोग को विशुद्ध पर्वतीय क्षेत्र वाली इन संसदीय सीटों पर मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए मेहनत भी ज्यादा करनी पड़ेगी। इसके अलावा नैनीताल-ऊधम सिंह नगर और हरिद्वार संसदीय सीट पर भी एक-एक विधानसभा क्षेत्र में पिछले विधानसभा चुनाव में 60 प्रतिशत से कम मतदान हुआ। यहां भी आयोग ने मोर्चा संभाल रखा है।

12 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान उत्साहित करने वाला

निर्वाचन आयोग के लिए राहत की बात है कि उसे 12 विधानसभा क्षेत्रों में 75 प्रतिशत मतदान का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। इन विधानसभा क्षेत्रों में लोग मतदान में बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में भी यहां 75 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ।

इसमें आठ विधानसभा क्षेत्र हरिद्वार संसदीय सीट के अंर्तगत आते हैं। इसके अलावा नैनीताल-ऊधम सिंह नगर संसदीय सीट के अंतर्गत तीन और टिहरी गढ़वाल संसदीय सीट के एक विधानसभा क्षेत्र में भी मतदान 75 प्रतिशत से अधिक हुआ था। राज्य के शेष 35 विधानसभा क्षेत्रों में वर्ष 2022 में 60 से 75 प्रतिशत के बीच मतदान हुआ।

वर्ष 2022 में यहां हुआ 60 प्रतिशत से कम मतदान

  • विधानसभा क्षेत्र, मतदान प्रतिशत
  • सल्ट, 45.65
  • चौबट्टाखाल, 45.69
  • प्रतापनगर, 49.23
  • रानीखेत, 49.82
  • घनसाली, 50.35
  • लैंसडौन, 51.00
  • द्वाराहाट, 52.52
  • पौड़ी, 53.00
  • देवप्रयाग, 54.07
  • नैनीताल, 54.91
  • यमकेश्वर, 55.00
  • टिहरी, 55.13
  • जागेश्वर, 55.55
  • गंगोलीहाट, 55.61
  • देहरादून कैंट, 56.02
  • सोमेश्वर, 56.27
  • धर्मपुर, 56.45
  • श्रीनगर, 57.00
  • राजपुर रोड, 57.14
  • रुद्रप्रयाग, 58.15
  • लोहाघाट, 58.35
  • अल्मोड़ा, 58.68
  • थराली, 59.48

यहां पड़े थे 75 प्रतिशत से अधिक वोट

  • मंगलौर, 75.00
  • विकासनगर, 75.28
  • गदरपुर, 75.35
  • पिरान कलियर, 76.69
  • खटीमा, 77.20
  • खानपुर, 77.66
  • भगवानपुर, 78.00
  • झबरेड़ा, 78.07
  • सितारगंज, 78.42
  • ज्वालापुर, 78.60
  • हरिद्वार ग्रामीण, 82.00
  • लक्सर, 87.00

सड़क, परिवहन और मतदान केंद्र से दूरी हैं कम मतदान के प्रमुख कारक

पहाड़ में कम मतदान की प्रमुख वजह मतदान केंद्रों की अधिक दूरी और सुगम राह नहीं होना है। इसके अलावा सड़क व परिवहन सुविधा का अभाव और मौसम भी बड़े कारक हैं।

निर्वाचन आयोग हर बार चुनाव में इन समस्याओं के मद्देनजर मतदाताओं के लिए प्रबंध तो करता है, लेकिन अब तक इसका पर्याप्त असर नजर नहीं आया। दुर्गम क्षेत्रों में तो प्रत्याशी तक प्रचार के लिए नहीं पहुंच पाते। इस कारण भी मतदाताओं में चुनाव को लेकर उत्साह नहीं रहता।

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