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Tuesday, July 23, 2024
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ऋषिकेश: पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पहुंचे परमार्थ निकेतन, स्वामी चिदानंद से की मुलाकात; सनातन धर्म पर हुई चर्चा

ख़बर रफ़्तार, ऋषिकेश:  बागेश्वर धाम के पीठाधीश आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने परमार्थ निकेतन पहुंचकर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती से भेंट की।

सोमवार की सुबह परमार्थ निकेतन आगमन पर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का गुरूकुल के आचार्यों, ऋषिकृमारों और परमार्थ परिवार ने वेदमंत्रों, शंखध्वनि और पुष्पवर्षा कर अभिनन्दन किया। स्वामी चिदानंद सरस्वती के साथ बागेश्वर धाम के पीठाधीश आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने मां गंगा का पूजन व अभिषेक किया।
स्वामी चिदानंद को मार्च में बागेश्वर में किया आमंत्रित

बागेश्वर धाम आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने बड़ी ही विन्रमता, विनय और वंदन के साथ स्वामी चिदानन्द सरस्वती को मार्च में बागेश्वर धाम में 151 सामूहिक कन्या विवाह महोत्सव में युगल दम्पति को आशीर्वाद व आशीर्वचन देने हेतु आमंत्रित किया।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि सनातन संस्कृति के अग्रदूत युवा संत आचार्य धीरेन्द्र शास्त्री आदिगुरू शंकराचार्य के पदचिह्नों का अनुकरण करते हुये सनातन की मशाल लेकर आगे बढ़ रहे हैं। सनातन धर्म को हर सांस में जीते हुये सनातन संस्कृति की अविरल धारा! सनातन गंगा निरंतर प्रवाहित कर रहे हैं। गंगा की निर्मलता और सनातन की दिव्यता का दीप हर दिल में प्रज्ज्वलित हो क्योंकि सनातन है तो हम हैं।

सनातन है तो संस्कार, संस्कृति और जीवन का है मूल्य

सनातन है तो संस्कार, संस्कृति और जीवन के मूल्य है। युवाओं में सनातन की अखंड ज्योति जलती रहे, परिवारों में भारतीय संस्कृति के मूल, मूल्य और संस्कार स्थापित हो क्योंकि संस्कार है तो संसार है; संस्कार है तो परिवार है; संस्कार है तो जीवन का आधार है।

आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि आज पूज्य स्वामी जी और मां गंगा का पावन सान्निध्य पाकर अभिभूत हूं। ये मिलन जीवंत व जागृत कर देने वाला है। मेरे लिये ये दिव्य पल करूणा, प्रेम, श्रद्धा, विश्वास के अद्भुत पल हैं इस दिव्यता के पलों को वंदन और अभिनन्दन।

परमार्थ निकेतन से पूज्य स्वामी चिदानंद के पावन सान्निध्य में निरंतर पर्यावरण संरक्षण का संदेश हम सभी को प्राप्त होता है। वास्तव में इस तट से सनातन के संदेश के साथ संस्कृति और संस्कारों का उद्घोष प्रतिदिन होता है। उन्होंने स्वामी चिदानंद के पावन सान्निध्य में गंगा तट पर कथा आयोजित करने की इच्छा व्यक्त करते हुये कहा कि यह स्थान वास्तव में अपार शान्ति प्रदान करने वाला है।

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