ख़बर रफ़्तार, देहरादून/नैनीताल : Kainchi Dham उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित बाबा नीम करौली महाराज के प्रसिद्ध कैंची धाम में दर्शन व्यवस्था में बदलाव की तैयारी की जा रही है। मंदिर में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या और आसपास के क्षेत्रों में लगने वाले जाम को देखते हुए प्रशासन चारधाम यात्रा की तर्ज पर प्री-रजिस्ट्रेशन व्यवस्था लागू करने पर विचार कर रहा है। इसके तहत श्रद्धालुओं को कैंची धाम पहुंचने से पहले ऑनलाइन पंजीकरण कराना पड़ सकता है। हालांकि, यह व्यवस्था लागू होने की अंतिम प्रक्रिया और तारीख को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
कैंची धाम में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की भीड़
बाबा नीम करौली महाराज के प्रति देश-विदेश के श्रद्धालुओं की आस्था के चलते कैंची धाम में दर्शन के लिए आने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पहले श्रद्धालु बिना किसी पूर्व पंजीकरण के सीधे मंदिर पहुंचकर दर्शन कर सकते थे, लेकिन अब बढ़ती भीड़ के कारण व्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ने लगा है।
सामान्य वीकेंड पर यहां करीब 20 से 25 हजार श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। वहीं, लंबे वीकेंड और विशेष अवसरों पर यह संख्या बढ़कर 35 से 40 हजार तक पहुंचने की बात सामने आई है। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने से मंदिर परिसर के साथ-साथ आसपास की सड़कों पर भी दबाव बढ़ जाता है।
36 हजार श्रद्धालुओं के पहुंचने से लगा था लंबा जाम
2 अक्टूबर को कैंची धाम में करीब 36 हजार श्रद्धालुओं के पहुंचने के कारण भवाली-कैंची मार्ग पर लगभग दो किलोमीटर लंबा जाम लग गया था। इससे पर्यटकों और स्थानीय लोगों को घंटों परेशानी का सामना करना पड़ा।
जाम का असर केवल मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं तक सीमित नहीं रहा। आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की दैनिक आवाजाही भी प्रभावित हुई। स्कूल, अस्पताल, नौकरी और कारोबार के लिए आने-जाने वाले लोगों को भी यातायात संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
चारधाम यात्रा की तर्ज पर लागू हो सकती है पंजीकरण व्यवस्था
श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को व्यवस्थित करने के लिए प्रशासन कैंची धाम में ऑनलाइन प्री-रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है। इसके तहत श्रद्धालुओं को पहले से यह जानकारी देनी पड़ सकती है कि वे किस दिन दर्शन के लिए पहुंचेंगे।
कुमाऊं मंडल के आयुक्त दीपक रावत के अनुसार, श्रद्धालुओं की संख्या का पहले से आकलन करने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण व्यवस्था पर काम किया जा रहा है। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी एक दिन में क्षमता से अधिक भीड़ एकत्र न हो।
प्रस्तावित योजना के तहत प्रतिदिन करीब 20 से 25 हजार श्रद्धालुओं की संख्या को ध्यान में रखकर व्यवस्थाएं तैयार करने की बात कही जा रही है। अधिक भीड़ वाले दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या को नियंत्रित करने का विकल्प भी विचाराधीन है।
होटल और धर्मशालाओं की बुकिंग को भी जोड़ा जा सकता है
प्रशासन की योजना केवल ऑनलाइन पंजीकरण तक सीमित नहीं रह सकती। कैंची धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था को भी इससे जोड़ने पर विचार किया जा रहा है।
इसके तहत होटल, धर्मशाला और सराय में पहले से बुकिंग जैसी व्यवस्था को शामिल किया जा सकता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के अचानक पहुंचने से ठहरने और दूसरी जरूरी सुविधाओं पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।
श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने पर पार्किंग, भोजन, पेयजल, होटल और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होती है। ऐसे में प्रशासन भीड़ के अनुमान के साथ उपलब्ध सुविधाओं की क्षमता का आकलन करने की तैयारी में है।
मंदिर में प्रवेश और निकासी की व्यवस्था भी होगी व्यवस्थित
कैंची धाम में श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुचारु बनाने के लिए मंदिर परिसर के भीतर प्रवेश और निकासी के रास्तों को अलग करने की योजना भी बनाई जा रही है।
भीड़ अधिक होने पर एक ही स्थान से लोगों के प्रवेश और बाहर निकलने के कारण अव्यवस्था की स्थिति बन सकती है। अलग-अलग प्रवेश और निकासी मार्ग तैयार होने से श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य मंदिर परिसर में भीड़ का दबाव कम करना, अनावश्यक इंतजार से बचाना और धक्का-मुक्की जैसी स्थिति की आशंका को कम करना है।
श्रद्धालुओं के साथ स्थानीय लोगों को भी मिलेगी राहत
कैंची धाम में बढ़ते धार्मिक पर्यटन का असर आसपास के पहाड़ी कस्बों और स्थानीय आबादी पर भी पड़ रहा है। पर्यटन सीजन और लंबे वीकेंड पर लगने वाले जाम के कारण स्थानीय लोगों की दिनचर्या प्रभावित होती है।
ऐसे में प्री-रजिस्ट्रेशन, पार्किंग प्रबंधन, होटल बुकिंग और प्रवेश-निकासी की बेहतर व्यवस्था लागू होने से यातायात का दबाव नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
फिलहाल प्रशासन की ओर से नई व्यवस्था की तैयारी की जा रही है। ऑनलाइन पंजीकरण कब से शुरू होगा, इसकी प्रक्रिया क्या होगी और श्रद्धालुओं की संख्या को किस तरह नियंत्रित किया जाएगा, इस संबंध में अंतिम दिशा-निर्देश जारी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
