ख़बर रफ़्तार, नैनीताल: राज्य में जंगल की आग की घटनाएं चरम सीमा पर हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से समीक्षा बैठक के बाद इस पर नियंत्रण व प्रबंधन को लेकर वन विभाग के नए मुखिया ने रणनीति भी बदली है। पीसीसीएफ (हाफ) धनंजय मोहन ने अधिकारियों से लेकर फील्ड कर्मचारियों की जवाबदेही तय कर दी है।
अब सीनियर अफसरों को जिलों की जिम्मेदारी देकर मांगी रिपोर्ट
राज्य में जंगल की आग की घटनाओं की वजह से जनता के साथ ही शासन-प्रशासन तथा सरकारी विभागों के निशाने पर आए वन विभाग के नए मुखिया ने अब मुख्यालय में महत्वपूर्ण पदों पर जमे सीनियर आइएफएस अफसरों को नोडल अधिकारी बनाकर जिलों में उतार दिया है। साथ ही उनकी जवाबदेही तय कर दी है। इन नोडल अफसरों को मानीटरिंग के साथ ही रिपोर्ट भी देने को कहा है।
यह अफसर आग बुझने तक जिलों में जमे रहेंगे। पीसीसीएफ डा. धनंजय मोहन की ओर से प्रमुख वन संरक्षक प्रशासन बीपी गुप्ता को जिला नैनीताल, पीसीसीएफ पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन डा. कपिल कुमार जोशी को अल्मोड़ा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी कैम्पा जीएस पांडे को बागेश्वर, वन संरक्षण के नोडल अधिकारी आरके मिस्र को उत्तरकाशी, अपर प्रमुख वन संरक्षक परियोजनाएं कपिल लाल को टिहरी गढ़वाल, अपर प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव डा विवेक पांडे को चमोली व रुद्रप्रयाग, मुख्य वन संरक्षक पराग मधुकर धकाते को हरिद्वार व देहरादून का नोडल अफसर बनाया है।
निदेशक वानिकी प्रशिक्षण संस्थान हल्द्वानी तेजस्विनी पाटिल को ऊधम सिंह नगर व चंपावत, मुख्य वन संरक्षक अनुश्रवण व मूल्यांकन राहुल को पौड़ी गढ़वाल तथा मुख्य वन संरक्षक कार्ययोजना संजीव चतुर्वेदी को पिथौरागढ़ का नोडल अफसर नियुक्त किया गया है। 31 मार्च को सेवानिवृत्त पीसीसीएफ अनूप मलिक ने सीनियर अफसरों को जिलों का नोडल अफसर नियुक्त करने से इन्कार करते हुए कहा था कि इससे उलझन बढ़ेगी।
