ख़बररफ़्तार , थराली : चमोली जिले के नारायणबगड़ विकासखंड में क्षेत्र पंचायत (BDC) की बैठक के दौरान ग्राम प्रधानों का आक्रोश सामने आया। अपनी 10 सूत्रीय मांगों पर कार्रवाई न होने से नाराज ग्राम प्रधानों ने नारेबाजी करते हुए सदन का बहिष्कार कर दिया। इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी (CDO) डॉ. अभिषेक त्रिपाठी और ग्राम प्रधानों के बीच तीखी बहस भी हुई। ब्लॉक प्रमुख ने प्रधानों को मनाने का प्रयास किया, लेकिन वे अपनी मांगों पर अड़े रहे। ग्राम प्रधानों ने मांगें पूरी नहीं होने पर आगामी विधानसभा चुनाव के बहिष्कार और आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है।
10 सूत्रीय मांगों को लेकर बैठक में हंगामा
नारायणबगड़ विकासखंड में आयोजित क्षेत्र पंचायत की बैठक उस समय हंगामे में बदल गई, जब ग्राम प्रधान अपनी मांगों पर सुनवाई न होने से नाराज होकर बैठक से बाहर निकल गए। प्रधान संघ अध्यक्ष योगेंद्र सिंह खत्री के नेतृत्व में ग्राम प्रधानों ने नारेबाजी करते हुए सदन का बहिष्कार किया।
प्रधानों का आरोप है कि वे लंबे समय से अपनी समस्याओं और मांगों को शासन-प्रशासन के सामने रख रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इसी नाराजगी के चलते उन्होंने बैठक में शामिल नहीं रहने का निर्णय लिया।
CDO के साथ तीखी बहस, ब्लॉक प्रमुख ने मनाने का किया प्रयास
बैठक के दौरान मुख्य विकास अधिकारी डॉ. अभिषेक त्रिपाठी और ग्राम प्रधानों के बीच मांगों को लेकर तीखी बहस हुई। वहीं, ब्लॉक प्रमुख गणेश चंदोला ने कई बार प्रधानों को समझाने और उनकी समस्याओं का समाधान निकालने का प्रयास किया। हालांकि, ग्राम प्रधान अपनी मांगों पर अड़े रहे और बैठक का बहिष्कार जारी रखा।
मानदेय बढ़ाकर 20 हजार रुपये करने की मांग
ग्राम प्रधानों की 10 सूत्रीय मांगों में मानदेय बढ़ाने का मुद्दा प्रमुखता से शामिल है। प्रधानों ने वर्तमान मानदेय में बढ़ोतरी करते हुए इसे 20 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग उठाई है। इसके अलावा ग्राम पंचायतों की खुली बैठकों में शामिल होने वाले वार्ड सदस्यों को भी मानदेय देने की मांग की गई है।
प्रधानों ने मनरेगा में ऑनलाइन हाजिरी की अनिवार्यता समाप्त करने और मजदूरी की दरों में बढ़ोतरी की मांग भी रखी है। उनकी मांग है कि अकुशल श्रमिकों को 600 रुपये और कुशल श्रमिकों को 800 रुपये प्रतिदिन मजदूरी दी जाए।
ग्राम पंचायतों को अधिक बजट और अधिकार देने की मांग
ग्राम प्रधानों ने राज्य वित्त आयोग और केंद्रीय वित्त आयोग से मिलने वाली धनराशि बढ़ाने की मांग की है। इसके साथ ही विधायक और सांसद निधि की तर्ज पर ग्राम प्रधान निधि बनाने का प्रस्ताव भी रखा है, ताकि गांवों में विकास कार्यों के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध हो सके।
प्रधानों की अन्य मांगों में 10 लाख रुपये तक के विकास कार्य ग्राम पंचायतों से कराने और पंचायत राज अधिनियम के तहत 29 विभागों के अधिकार ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित करना शामिल है।
इसके अलावा ग्राम प्रधानों ने जिला योजना में प्रधान संगठन की भागीदारी सुनिश्चित करने तथा ग्राम प्रधानों का स्वास्थ्य और जीवन बीमा कराने की मांग भी उठाई है।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो विधानसभा चुनाव के बहिष्कार की चेतावनी
ग्राम प्रधानों का कहना है कि गांवों के विकास की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है, लेकिन पर्याप्त मानदेय, वित्तीय अधिकार और संसाधन नहीं मिलने से विकास कार्य प्रभावित होते हैं। उनका मानना है कि ग्राम पंचायतों को अधिक वित्तीय सहायता और अधिकार मिलने से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति मिल सकती है।
प्रधानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी 10 सूत्रीय मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे आगामी विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करेंगे। साथ ही, मांगें पूरी कराने के लिए आंदोलन को और तेज करने की बात भी कही है। फिलहाल, ग्राम प्रधानों के इस विरोध के बाद क्षेत्र में उनकी मांगों और प्रशासन के अगले कदम को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
