Pantnagar एयरपोर्ट का होगा विस्तार, 387 करोड़ रुपये से बनेगा नया टर्मिनल; बड़े विमानों और कार्गो उड़ानों की बढ़ेंगी संभावनाएं

ख़बररफ़्तार , रुद्रपुर : उत्तराखंड के तराई क्षेत्र में हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए पंतनगर एयरपोर्ट के विस्तारीकरण की तैयारी चल रही है। करीब 387 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना के तहत एयरपोर्ट के रनवे की लंबाई बढ़ाकर 3,000 मीटर की जाएगी। इसके अलावा 8,500 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में नया टर्मिनल भवन बनाने की योजना है। परियोजना पूरी होने के बाद बड़े यात्री विमानों के संचालन की संभावनाएं बढ़ेंगी। साथ ही कार्गो विमानों के संचालन के जरिए क्षेत्र के औद्योगिक और व्यावसायिक विकास को भी गति मिलने की उम्मीद है।

387 करोड़ रुपये से बदलेगी एयरपोर्ट की तस्वीर

पंतनगर एयरपोर्ट का विस्तारीकरण क्षेत्र में हवाई सेवाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है। वर्तमान में सीमित आधारभूत सुविधाओं के कारण यहां बड़े विमानों के संचालन की संभावनाएं सीमित हैं। विस्तारीकरण के तहत रनवे की लंबाई बढ़ाने और आधुनिक यात्री सुविधाओं से युक्त नया टर्मिनल बनाने की योजना है। इन सुविधाओं के विकसित होने से एयरपोर्ट की परिचालन क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

परियोजना के लिए केंद्र सरकार की ओर से करीब 387 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। वहीं, राज्य सरकार ने आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाया है। निर्माण कार्य की जिम्मेदारी पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड को सौंपी गई है।

3,000 मीटर लंबा होगा रनवे, बनेगा नया टर्मिनल

पंतनगर एयरपोर्ट के निदेशक पवन कुमार के अनुसार, विस्तारीकरण परियोजना के तहत रनवे की लंबाई बढ़ाकर 3,000 मीटर की जाएगी। इसके साथ ही 8,500 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में नए टर्मिनल भवन का निर्माण प्रस्तावित है।

रनवे के विस्तार और टर्मिनल की नई सुविधाओं से बड़े यात्री विमानों के संचालन की संभावनाएं बढ़ेंगी। इससे भविष्य में हवाई सेवाओं के विस्तार का रास्ता भी खुल सकता है। हालांकि, किन विमानों का संचालन शुरू होगा और किन शहरों के लिए नई उड़ानें उपलब्ध होंगी, यह आगे की परिचालन योजना पर निर्भर करेगा।

524 एकड़ भूमि मिलने से बढ़ा एयरपोर्ट का दायरा

एयरपोर्ट के विस्तारीकरण के लिए भूमि की उपलब्धता महत्वपूर्ण रही है। राज्य सरकार की ओर से परियोजना के लिए 524 एकड़ भूमि हस्तांतरित की जा चुकी है। इससे पहले एयरपोर्ट के पास लगभग 270 एकड़ भूमि उपलब्ध थी। नई भूमि मिलने के बाद कुल उपलब्ध भूमि बढ़कर 794 एकड़ हो गई है।

परियोजना के लिए अतिरिक्त भूमि उपलब्ध होने से रनवे विस्तार और नए टर्मिनल के निर्माण की योजना को आगे बढ़ाने का आधार तैयार हुआ है। अब निर्माण कार्य की प्रगति आवश्यक मंजूरियों और परियोजना के क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी।

पर्यावरणीय स्वीकृति का इंतजार

पंतनगर एयरपोर्ट के विस्तारीकरण की प्रक्रिया में फिलहाल पर्यावरणीय स्वीकृति महत्वपूर्ण पड़ाव है। एयरपोर्ट प्रबंधन को उम्मीद है कि नवंबर 2026 में आवश्यक पर्यावरणीय मंजूरी मिल सकती है। इसके बाद निर्माण कार्य में तेजी आने की संभावना जताई जा रही है।

बताया गया है कि बारिश के कारण भी परियोजना से जुड़े कार्य प्रभावित हुए हैं। नवंबर के अंतिम सप्ताह में अवार्ड जारी होने के बाद विस्तारीकरण कार्य गति पकड़ सकता है। हालांकि, निर्माण की समयसीमा और वास्तविक प्रगति संबंधित स्वीकृतियों तथा कार्य की स्थिति पर निर्भर करेगी।

वर्ष 1960 में हुई थी पंतनगर एयरपोर्ट की स्थापना

पंतनगर एयरपोर्ट की स्थापना वर्ष 1960 में हुई थी। यह पंडित गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय परिसर में स्थित है और लंबे समय से कुमाऊं क्षेत्र के लोगों के लिए हवाई यात्रा का महत्वपूर्ण माध्यम रहा है।

क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों, व्यापार और पर्यटन के विस्तार के साथ बेहतर हवाई कनेक्टिविटी की आवश्यकता भी बढ़ी है। ऐसे में एयरपोर्ट के विस्तारीकरण को मौजूदा सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

उद्योग, व्यापार और पर्यटन को मिल सकता है फायदा

पंतनगर एयरपोर्ट का विस्तारीकरण केवल यात्री सुविधाओं तक सीमित नहीं रहेगा। कार्गो विमानों के संचालन की संभावनाएं बढ़ने से क्षेत्र में माल परिवहन को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। इसका लाभ ऊधम सिंह नगर के औद्योगिक क्षेत्रों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और कृषि आधारित कारोबार को मिलने की उम्मीद है।

इसके अलावा बेहतर हवाई संपर्क से कुमाऊं क्षेत्र में पर्यटन, व्यावसायिक यात्राओं और निवेश को भी प्रोत्साहन मिल सकता है। हालांकि, इन संभावनाओं का वास्तविक लाभ एयरपोर्ट के विस्तार के बाद शुरू होने वाली सेवाओं और उड़ानों की उपलब्धता पर निर्भर करेगा।

फिलहाल पंतनगर एयरपोर्ट के विस्तारीकरण के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति का इंतजार है। मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य में तेजी आने की उम्मीद है। करीब 387 करोड़ रुपये की यह परियोजना पूरी होने पर उत्तराखंड के तराई क्षेत्र में हवाई कनेक्टिविटी मजबूत करने और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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