खबर रफ़्तार, नई दिल्ली : इस कार्यक्रम की शुरुआत तीन अक्तूबर 2014 को हुई थी। इसे 22 भारतीय भाषाओं और 29 बोलियों के अलावा 11 विदेशी भाषाओं में भी प्रसारित किया जाता है, जिसमें फ्रेंच, चीनी, इंडोनेशियाई, तिब्बती, बर्मी, बलूची, अरबी, पश्तू, फारसी, दारी और स्वाहिली शामिल हैं। ‘मन की बात’ कार्यक्रम का प्रसारण आकाशवाणी के 500 से अधिक केंद्रों द्वारा किया जाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के जरिए रविवार (31 अगस्त) को लोगों से बात की। इस दौरान उन्होंने प्राकृतिक आपदाओं का जिक्र किया। उन्होंने बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से काफी तबाही हुई है। हर पीड़ित का दर्द, हम सभी का दर्द है। हर कोई पीड़ितों की मदद के लिए हरसंभव मदद कर रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रतिभा सेतु में उन उम्मीदवारों का डेटा रखा गया है, जिन्होंने UPSC की अलग-अलग परीक्षाओं के सभी चरण पास किए, लेकिन अंतिम मेरिट लिस्ट में उनका नाम नहीं आ पाया। इस पोर्टल पर 10 हजार से ज्यादा ऐसे होनहार युवाओं का डेटाबैंक मौजूद हैं। कोई सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहा था, कोई इंजीनियरिंग सर्विसेज में जाना चाहता था, कोई मेडिकल सर्विसेज के हर पड़ाव को पार कर चुका था, लेकिन अंत में उसका चयन नहीं हुआ, ऐसे सभी उम्मीदवारों की जानकारी अब ‘प्रतिभा सेतु’ पोर्टल पर उपलब्ध कराई जा रही है। इस पोर्टल से निजी कंपनियां इन होनहार छात्रों की जानकारी लेकर उन्हें अपने यहां नियुक्ति दे सकती हैं। साथियों, इस प्रयास के नतीजे भी आने लगे हैं। सैकड़ों उम्मीदवारों को इस पोर्टल की मदद से तुरंत नौकरी मिली है और वो युवा जो मामूली अंतर से रुक गए थे, अब नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मैंने पॉडकास्ट में बातों-बातों में मध्य प्रदेश के शहडोल के फुटबॉल के क्रेज से जुड़े एक गांव का वर्णन किया था। दरअसल, दो साल पहले में शहडोल गया था, वहा के फुटबॉल खिलाड़ी से मिला था। पॉडकास्ट के दौरान एक सवाल के उत्तर में मैंने शहडोल के फुटबॉल खिलाड़ियों का भी जिक्र किया था। यही बात जर्मनी के फुटबॉल खिलाड़ी और कोच डिएटमर बेइर्सडॉर्फर ने भी सुनी। शहडोल के युवा फुटबॉल खिलाड़ियों की जीवन की यात्रा ने उन्हें बहुत प्रभावित और प्रेरित किया। जर्मनी के इस कोच ने शहडोल के कुछ खिलाड़ियों को जर्मनी की एक अकादमी में ट्रेनिंग देने की पेशकश की है। इसके बाद मध्य प्रदेश की सरकार ने भी उनसे संपर्क किया है। जल्द ही शहडोल के हमारे कुछ युवा-साथी ट्रेनिंग कोर्स के लिए जर्मनी जाएंगे। मुझे यह देखकर भी बहुत आनंद आता है कि भारत में फुटबॉल की लोकप्रियता निरंतर बढ़ रही है। मैं फुटबॉल प्रेमियों से आग्रह करता हूं कि जब समय मिले वे शहडोल जरूर जाएं और वहां हो रहे स्पोर्टिंग रिवोल्यूशन को करीब से देखें।
उन्होंने कहा कि एक बार एक शहीद के पिता की कही गई बातें उनके हृदय को छू गई। शहीद के पिता ने कहा था ‘बेटा गया तो क्या हुआ, वतन तो सलामत है ना!’ इस एक बात ने जितेंद्र सिंह के मन में देश-भक्ति का एक अद्भुत जुनून भर दिया। आज वो कई शहीदों के परिवारों के संपर्क में हैं। उन्होंने करीब ढाई हजार शहीदों के माता-पिता के चरणों की मिट्टी भी अपने पास लाकर रखी है। ये सशस्त्र बलों के प्रति उनके गहरे प्रेम और जुड़ाव का जीवंत उदाहरण है। जितेंद्र जी का जीवन हमें देश-भक्ति की वास्तविक सीख देता है।

उन्होंने कहा कि बिहार की देवकी जी ने सोलर पंप से गांव की किस्मत बदल दी है। मुजफ्फरपुर के रतनपुरा गांव की रहने वाली देवकी को लोग अब प्यार से ‘सोलर दीदी’ कहते हैं। देवकी जी, उनका जीवन आसान नहीं था। वो एक सेल्फ हेल्प समूह से जुड़ीं और वहीं उन्हें सोलर पंप के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने सोलर पंप के लिए प्रयास शुरू किए और उसमें सफल भी रही। सोलर दीदी के सोलर पंप ने इसके बाद जैसे गांव की तस्वीर ही बदल दी। जहां पहले कुछ एकड़ में जमीन की सिंचाई हो पाती थी, अब सोलर दीदी के सोलर पंप से 40 एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में पानी पहुंच रहा है। सोलर दीदी के इस अभियान में गांव के दूसरे किसान भी जुड़ गए हैं। उनकी फसलें हरी-भरी होने लगी हैं आमदनी बढ़ने लगी।
पीएम मोदी ने कहा, ‘पहले देवकी जी की जिंदगी चारदीवारी के भीतर सिमटी हुई थी। आज वो पूरे आत्मविश्वास से अपना काम कर रही है, सोलर दीदी बनकर पैसे कमा रहीं हैं और सबसे दिलचस्प बात कि वो क्षेत्र के किसानों से यूपीआई के जरिए पेमेंट लेती हैं। अब पूरे गांव में उन्हें बहुत सम्मान से देखा जाता है। उनकी मेहनत और दूरदर्शिता ने दिखा दिया है कि सौर ऊर्जा सिर्फ बिजली का साधन नहीं है, बल्कि ये गांव-गांव में नई रोशनी लाने वाली एक नई शक्ति भी है।’
उन्होंने कहा कि खुशियों के बीच आप सभी स्वच्छता पर जोर देते रहें, क्योंकि जहां स्वच्छता है, वहां त्योहारों का आनंद भी और बढ़ जाता है। साथियों, ‘मन की बात’ के लिए मुझे इसी तरह बड़ी संख्या में अपने संदेश भेजते रहिए। आपका हर सुझाव इस कार्यक्रम के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। अपना फीडबैक मुझ तक जरूर पहुंचाते रहें। अगली बार जब हम मिलेंगे तो और भी नए विषयों की चर्चा होगी। बहुत-बहुत धन्यवाद, नमस्कार।
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