देहरादून : भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक इन दिनों पार्टी की गतिविधियों में कम नजर आ रहे हैं। इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में उनके साइडलाइन किए जाने की चर्चाएं होती रही हैं। अब निशंक ने इन अटकलों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वह हमेशा मेन लाइन में रहते हैं और उन्हें साइडलाइन किए जाने का सवाल ही समझ नहीं आता।
‘मैं हमेशा मेन लाइन में रहता हूं’
रमेश पोखरियाल निशंक ने साइडलाइन किए जाने से जुड़े सवाल पर कहा, “ये साइडलाइन क्या होता है?” उन्होंने कहा कि वह लंबे समय से राजनीति में सक्रिय हैं, लेकिन आज तक उन्हें यह समझ नहीं आया कि साइडलाइन क्या होता है।
निशंक ने कहा कि वह हमेशा मेन लाइन में रहते हैं और जब तक राजनीति में रहेंगे, मेन लाइन में ही रहेंगे। उन्होंने खुद को सक्रिय राजनीति में बताते हुए कहा कि पार्टी की ओर से उन्हें जो जिम्मेदारी दी जाती है, वह उसका निर्वहन करते हैं।
उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब पार्टी की गतिविधियों में उनकी कम मौजूदगी को लेकर राजनीतिक चर्चाएं हो रही थीं। हालांकि, निशंक ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि वह राजनीति में सक्रिय हैं।
अंकिता भंडारी हत्याकांड की CBI जांच पर भी बोले निशंक
अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित VIP की पहचान को लेकर चल रही सीबीआई जांच पर भी रमेश पोखरियाल निशंक ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति का अपना नजरिया हो सकता है, लेकिन सामूहिक नजरिया सही होता है।
निशंक ने कहा कि मामले में सीबीआई जांच चल रही है, इसलिए इस पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। उनके बयान के मुताबिक, जांच पूरी होने से पहले मामले पर किसी तरह की टिप्पणी करने से बचना चाहिए।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री से केंद्रीय शिक्षा मंत्री तक का सफर
रमेश पोखरियाल निशंक की गिनती भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में होती है। वह 27 जून 2009 से 10 सितंबर 2011 तक उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे। राज्य में उन्होंने चिकित्सा, स्वास्थ्य, परिवार कल्याण और आयुष मंत्री सहित विभिन्न जिम्मेदारियां भी संभालीं।
साल 2014 में निशंक हरिद्वार लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने इसी सीट से जीत दर्ज की और केंद्र सरकार में मंत्री बने।
निशंक ने 31 मई 2019 से जुलाई 2021 तक केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री के रूप में कार्य किया। उनके कार्यकाल के दौरान मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय किया गया।
फिलहाल, साइडलाइन किए जाने की चर्चाओं पर निशंक के बयान के बाद उत्तराखंड के राजनीतिक गलियारों में उनके रुख को लेकर चर्चा हो रही है। उन्होंने अपने बयान में पार्टी के भीतर किसी तरह की नाराजगी जाहिर करने के बजाय सक्रिय राजनीति में बने रहने की बात कही है।
