Laksar बस स्टैंड पर महाराजा भागीरथ की पेंटिंग हटाने पर हंगामा, विधायक उमेश कुमार ने जताई नाराजगी

खबररफ़्तार , लक्सर : हरिद्वार जिले के लक्सर बस स्टैंड पर महाराजा भागीरथ की पेंटिंग हटाए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया। पेंटिंग हटाए जाने की सूचना मिलते ही खानपुर विधायक उमेश कुमार मौके पर पहुंचे और वहां मौजूद ठेकेदार व मजदूरों के सामने कड़ी नाराजगी जताई। विधायक ने आरोप लगाया कि महाराजा भागीरथ की पेंटिंग को बिना किसी पूर्व सूचना और धार्मिक विधि-विधान के हटा दिया गया। उन्होंने इस मामले में संबंधित लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की चेतावनी भी दी।

वहीं, सैनी समाज के जिलाध्यक्ष बाबूराम सैनी का कहना है कि पेंटिंग खंडित हो गई थी। इसी वजह से समाज के लोगों के साथ बातचीत के बाद उसे हटाकर वहां महाराजा भागीरथ की प्रतिमा स्थापित करने का निर्णय लिया गया। उन्होंने बताया कि प्रतिमा का विधि-विधान से पूजन और अनावरण बाद में किया जाएगा। दोनों पक्षों के अलग-अलग बयान सामने आने के बाद मामला चर्चा में है।

विधायक उमेश कुमार ने निजी खर्च से लगवाई थी पेंटिंग

जानकारी के अनुसार, करीब दो साल पहले खानपुर विधायक उमेश कुमार शर्मा ने अपने निजी खर्च से महाराजा भागीरथ की फ्रेम पेंटिंग बनवाई थी। बताया जाता है कि लक्सर बस स्टैंड पर पेंटिंग लगाने की मांग सैनी समाज की ओर से की गई थी। इसके बाद विधायक ने विधि-विधान और पूजा-अर्चना के साथ अपनी पत्नी सोनिया शर्मा के हाथों पेंटिंग का अनावरण कराया था।

तब से यह पेंटिंग बस स्टैंड पर लगी हुई थी। स्थानीय लोगों के बीच इसे महाराजा भागीरथ के प्रति श्रद्धा और आस्था के प्रतीक के रूप में देखा जाता था। 15 अक्टूबर को पेंटिंग हटाए जाने की जानकारी सामने आने के बाद विवाद शुरू हो गया।

पेंटिंग हटाने की सूचना पर मौके पर पहुंचे विधायक

बताया जा रहा है कि 15 अक्टूबर को सैनी समाज के जिलाध्यक्ष बाबूराम सैनी की ओर से बस स्टैंड के बराबर में स्थित स्थान से पेंटिंग हटवाई गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इसे हटाने से पहले न तो उन्हें सूचना दी गई और न ही धार्मिक प्रक्रिया का पालन किया गया।

जैसे ही पेंटिंग हटाए जाने की खबर स्थानीय लोगों तक पहुंची, मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। लोगों ने इस संबंध में खानपुर विधायक उमेश कुमार को जानकारी दी। सूचना मिलते ही विधायक लक्सर बस स्टैंड पहुंचे। वहां पेंटिंग हटाकर एक कोने में रखी हुई दिखाई दी, जिसे देखकर उन्होंने नाराजगी जाहिर की।

‘महाराजा भागीरथ हमारे आराध्य हैं’: उमेश कुमार

मौके पर मौजूद ठेकेदार और मजदूरों से विधायक उमेश कुमार ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि महाराजा भागीरथ केवल एक पेंटिंग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि लोगों की आस्था से जुड़े हैं। विधायक के मुताबिक, पेंटिंग को हटाने से पहले समाज के लोगों को जानकारी देनी चाहिए थी और पूजा-पाठ सहित आवश्यक धार्मिक प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए था।

विधायक उमेश कुमार ने कहा कि महाराजा भागीरथ ने गंगा को धरती पर लाकर जनकल्याण का कार्य किया था और उन्हें श्रद्धा के साथ देखा जाता है। ऐसे में पेंटिंग को इस तरह हटाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी धार्मिक प्रतीक को हटाने से पहले उससे जुड़ी भावनाओं और परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए।

अधिकारियों को फोन कर कार्रवाई की मांग

विधायक ने मौके से ही संबंधित अधिकारियों को फोन कर पूरे मामले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मामले में धार्मिक भावनाएं आहत करने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के संबंध में मुकदमा दर्ज कराने की मांग की जाएगी। उन्होंने सैनी समाज के जिलाध्यक्ष के खिलाफ भी कार्रवाई की चेतावनी दी।

विधायक के हस्तक्षेप के बाद मौके पर चल रहे निर्माण कार्य को रोक दिया गया। हालांकि, मामले में पुलिस या प्रशासन की ओर से किसी मुकदमे अथवा कार्रवाई की पुष्टि की जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है।

बाबूराम सैनी बोले- खंडित पेंटिंग हटाकर प्रतिमा स्थापित की गई

दूसरी ओर, सैनी समाज के जिलाध्यक्ष बाबूराम सैनी ने पेंटिंग हटाए जाने को लेकर अपना पक्ष रखा। उनका कहना है कि महाराजा भागीरथ की पेंटिंग खंडित हो गई थी। इस संबंध में समाज के लोगों के साथ काफी समय से बातचीत चल रही थी।

बाबूराम सैनी के अनुसार, समाज के लोगों ने आपसी सहमति से चंदा एकत्र कर वहां पेंटिंग की जगह महाराजा भागीरथ की प्रतिमा स्थापित करने का निर्णय लिया था। उन्होंने कहा कि इसी निर्णय के तहत खंडित पेंटिंग को हटाकर प्रतिमा स्थापित की गई है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रतिमा का विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद अनावरण किया जाएगा।

पेंटिंग हटाने को लेकर आमने-सामने आए दोनों पक्ष

लक्सर बस स्टैंड पर महाराजा भागीरथ की पेंटिंग हटाने का मामला अब दो अलग-अलग पक्षों के बयानों के कारण चर्चा में है। विधायक उमेश कुमार ने बिना सूचना और धार्मिक प्रक्रिया के पेंटिंग हटाए जाने पर आपत्ति जताई है, जबकि बाबूराम सैनी का कहना है कि खंडित पेंटिंग के स्थान पर नई प्रतिमा स्थापित करने का फैसला समाज की सहमति से लिया गया था।

फिलहाल विवाद के बीच निर्माण कार्य रोक दिए जाने की बात सामने आई है। आगे की स्थिति संबंधित पक्षों की बातचीत और प्रशासनिक कार्रवाई पर निर्भर करेगी।

You May Also Like

More From Author