खबररफ़्तार , नैनीताल : उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हरिद्वार के पीरान कलियर क्षेत्र में गंगनहर के किनारे और रास्तों पर अतिक्रमण की शिकायत तथा देहरादून के क्लेमेंटटाउन-कैंटोनमेंट क्षेत्र में नाले पर हुए अतिक्रमण से जुड़ी जनहित याचिकाओं पर सुनवाई की। पीरान कलियर मामले में कोर्ट ने याचिकाकर्ता को संबंधित विभागों के समक्ष प्रत्यावेदन देने और अधिकारियों को तीन महीने के भीतर उस पर नियमानुसार निर्णय लेकर आगे की कार्रवाई करने के निर्देश दिए। वहीं, देहरादून के मामले में जिलाधिकारी को छह महीने के भीतर प्रत्यावेदन पर निर्णय लेने को कहा गया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अतिक्रमण हटाने से पहले संबंधित लोगों का पक्ष सुना जाए।
पीरान कलियर में गंगनहर के रास्तों पर अतिक्रमण का मामला
हरिद्वार जिले के पीरान कलियर क्षेत्र में गंगनहर के किनारे और उससे सटे रास्तों पर अतिक्रमण को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने की।
पीरान कलियर निवासी संदीप शर्मा ने याचिका में कहा कि हरिद्वार में गंगा नदी से सिंचाई के लिए कई नहरें निकाली गई हैं, जो उत्तराखंड के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के कई जिलों की कृषि भूमि तक पानी पहुंचाती हैं। इनमें कलियर के पास से गुजरने वाली गंगनहर भी शामिल है।
याचिकाकर्ता के अनुसार, नहर क्षेत्र और उसके ऊपर कथित तौर पर अतिक्रमण कर दुकानें, मकान और सब्जियों की रेहड़ियां लगाई जा रही हैं। इससे नहर के आसपास के रास्तों पर जाम की समस्या बढ़ रही है। उन्होंने आशंका जताई कि अतिक्रमण के कारण किसी अप्रिय घटना का खतरा भी पैदा हो सकता है।
तीन महीने में प्रत्यावेदन पर निर्णय लेने के निर्देश
संदीप शर्मा का कहना था कि अतिक्रमण हटाने के लिए उन्होंने संबंधित विभागों को पहले भी प्रत्यावेदन दिया था, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि नहर की देखरेख उत्तर प्रदेश सरकार के जिम्मे है और उत्तराखंड सरकार को याचिकाकर्ता की ओर से इस संबंध में कोई प्रार्थना पत्र नहीं मिला था।
इस पर याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि उन्होंने सिंचाई विभाग को शिकायत दी थी। उनके अनुसार, विभाग ने अतिक्रमण हटाने के लिए पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध नहीं होने की बात कही थी।
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को संबंधित विभागों के समक्ष अपना प्रत्यावेदन देने को कहा। साथ ही जिलाधिकारी हरिद्वार को निर्देश दिए कि प्रत्यावेदन पर कानून के अनुसार निर्णय लेकर तीन महीने के भीतर उचित कार्रवाई की जाए।
क्लेमेंटटाउन में नाले पर अतिक्रमण का मामला
हाईकोर्ट ने देहरादून के क्लेमेंटटाउन और कैंटोनमेंट क्षेत्र में नाले तथा उसके आसपास हुए अतिक्रमण से जुड़ी जनहित याचिका पर भी सुनवाई की। इस मामले में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने याचिका का निस्तारण करते हुए जिलाधिकारी देहरादून को छह महीने के भीतर याचिकाकर्ता के प्रत्यावेदन पर निर्णय लेने के निर्देश दिए।
कोर्ट ने कहा कि अतिक्रमण हटाने के संबंध में फैसला लेते समय संबंधित लोगों का पक्ष भी सुना जाए। इससे पहले की सुनवाई में अदालत ने सरकार और कैंट बोर्ड से पूछा था कि संबंधित क्षेत्र में अतिक्रमण हुआ है या नहीं। इसके लिए निरीक्षण कर स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया था।
निरीक्षण के बाद अतिक्रमण चिन्हित करने की तैयारी
सुनवाई के दौरान सरकार और कैंट बोर्ड की ओर से अदालत को बताया गया कि नाले के ऊपर और उसके आसपास अतिक्रमण किया गया है। यह क्षेत्र कैंट बोर्ड के अंतर्गत आता है। अतिक्रमण की पहचान करने के लिए संबंधित विभागों की एक संयुक्त टीम गठित की जाएगी।
बताया गया कि दशहरा अवकाश के बाद टीम मौके पर अतिक्रमण को चिन्हित करेगी और संबंधित लोगों का पक्ष सुनेगी। इसके बाद नियमानुसार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी देहरादून को छह महीने के भीतर प्रत्यावेदन पर निर्णय लेने का निर्देश दिया।
भारुवाला क्षेत्र के नाले को लेकर दायर हुई थी याचिका
क्लेमेंटटाउन निवासी संजय कुमार ने जनहित याचिका दायर कर बताया था कि भारुवाला क्षेत्र से होकर एक नाला गुजरता है, जो आगे चलकर बिंदाल नदी में मिलता है। याचिका के अनुसार, कुछ लोगों ने नाले और उसके आसपास अतिक्रमण कर उसे पाट दिया है। इससे क्षेत्र में जलभराव और अन्य गंभीर समस्याओं का खतरा पैदा हो सकता है।
संजय कुमार ने अतिक्रमण हटाने की मांग को लेकर 12 अगस्त 2026 को जिलाधिकारी, कैंट बोर्ड और अन्य संबंधित विभागों को प्रत्यावेदन दिया था। उनका कहना था कि इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया, जिसके बाद उन्हें हाईकोर्ट का रुख करना पड़ा।
दोनों मामलों में अब संबंधित अधिकारियों को तय समयसीमा के भीतर प्रत्यावेदन पर निर्णय लेना है। पीरान कलियर में तीन महीने और देहरादून के क्लेमेंटटाउन-कैंटोनमेंट क्षेत्र में छह महीने के भीतर आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
संपादकीय नोट: मूल खबर में पहली सुनवाई की तारीख “बुधवार (14 अगस्त)” लिखी है, जबकि 14 अगस्त 2026 शुक्रवार है। प्रकाशन से पहले सुनवाई की सही तारीख की पुष्टि कर लें।
